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यूरोप में महका मप्र का महुआ, बैतूल से भी भेजा गया 18 क्विंटल महुआ

मध्यप्रदेश का महुआ अब यूरोप के नागरिकों में एथनिक फूड के रूप में पहचान बना रहा है। यूरोप के फूड मार्केट में महुआ से बने खाद्य पदार्थ दिखने लगे हैं और पसंद किए जा रहे हैं।

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महुआ से बने प्रोडेक्ट विदेशी बाजार में बिक रहे

Products made from Mahua are being sold in the foreign market

बैतूल। मध्यप्रदेश का महुआ अब यूरोप के नागरिकों में एथनिक फूड के रूप में पहचान बना रहा है। यूरोप के फूड मार्केट में महुआ से बने खाद्य पदार्थ दिखने लगे हैं और पसंद किए जा रहे हैं। यूके की लंदन स्थित कंपनी ओ-फारेस्ट ने महुआ के कई प्रोडक्ट बाजार में उतारे हैं। इनमें मुख्य रूप से महुआ चाय, महुआ पावडर, महुआ निब-भुना महुआ मुख्य रूप से पसंद किएजा रहे हैं। ओ-फारेस्ट ने मध्यप्रदेश से 200 टन महुआ खरीदने का समझौता किया है। जिसमें बैतूल जिले से 18 क्विंटल महुआ विदेशा भेजा गया था।
इनका कहना
- जिले से नेट क्वालिटी का महुआ विदेश भेजा गया था। कुल 18 क्विंटल महुआ भेजा गया था। महुएं का 110 रुपए क्विंटल से हिसाब से बेचा गया। संग्रहणकर्ताओं को 94 रुपए प्रति किलो के हिसाब से भुगतान किया गया है।
- विजयांतम टीआर, वनमंडलाधिकारी दक्षिण वनमंडल।

यूरोप में 100 से 110 रुपए किलो मिल रहा मूल्य
महुआ जनजातीय समाज के लिए अमृत फल है। महुआ लड्डू और महुआ से बनी देशी हेरिटेज मदिरा उनके पारम्परिक व्यंजन हैं। महुआ अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाने से महुआ बीनने वाले जनजातीय परिवारों को अच्छी कीमत मिल रही है। महुआ का समर्थन मूल्य 35 रुपए किलो है। यूरोप में महुआ की खपत होने से उन्हें 100 से 110 रुपए प्रति किलो का मूल्य मिलेगा।ओ-फारेस्ट कंपनी की सह-संस्थापक मीरा शाह बताती हैं कि मध्यप्रदेश के महुआ से बने खादय पदार्थों के प्रति रूचि बढ़ रही है। यूके में जनसंख्या की विविधता है इसलिए दुनिया के हर देश का व्यंजन और खादय पदार्थ यहां मिल जाता है।

7 लाख 55 हजार क्विंटल तक उत्पादन
प्रदेश में महुआ बहुतायत में होता है। एक मौसम में करीब 7 लाख 55 हजार क्विंटल तक मिल जाता है। पूरी तरह महुआ फूल से लदा एक पेड़ 100 किलो तक महुआ देता है। करीब 3 लाख 77 हजार परिवार महुआ बीनकर अपना घर-परिवार चलाते हैं। एक परिवार कम से कम तीन पेड़ों से महुआ बीनता है। साल में औसतन दो क्विंटल तक महुआ बीन लेता है। कुल महुआ संग्रहण का 50 प्रतिशत उमरिया, अलीराजपुर, सीधी, सिंगरौली, डिण्डौरी, मण्डला, शहडोल और बैतूल जिलों से होता है।