
Both BJP and Congress did power performance
भोपाल। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल इस चुनाव में पिछले तीन दशक की सबसे बड़ी बगावत देख रहे हैं। अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ पर्चा भरने का आंकड़ा दोनों दलों में 75-75 के पार जा पहुंचा है।
डैमेज कंट्रोल की कोशिशें पर्चा दाखिल करने के पहले से ही शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस बार बागियों के तेवर तीखे हैं। वे कहते हैं, अब बैठने का सवाल ही नहीं पैदा होता है। हर हाल में चुनाव लडऩा है।
जिन विधायकों का टिकट कटा, उनका दावा है कि हमने क्षेत्र में पांच साल जी-जान से विकास कराया। अब अपनी मेहनत के बल पर चुनाव जीतने का वक्त आया तो पार्टी ने किसी ओर को मौका दे दिया।
भाजपा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, उमा भारती, उपाध्यक्ष प्रभात झा के करीबी ज्शदा बागी हुए हैं। उधर, कांग्रेस में दिग्विजय, कमलनाथ और सिंधिया के समर्थक ही मैदान में कूदे हैं। पत्रिका ने बगावत का झंडा बुलंद करने वाले उम्मीदवारों से सीधी बात की।
भाजपा के बागी....
अब सौ सुनार, एक लोहार का मामला
रामकृष्ण कुसमारिया बीडीए अध्यक्ष
कुसमारिया दमोह और पथरिया दो सीटों से मैदान में हैं। उनका कहना है कि अब मैं किसी की नहीं मानूंगा, दोनों सीटों से लडूंगा। सीएम का फोन आया था, लेकिन उन्हें साफ कह दिया है। जयंत मलैया और उनकी पत्नी ने भी भेंट की थी, पर अब तो सौ सोनार और एक लोहार की कहावत ही चरितार्थ होगी। जनता मेरे साथ है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुझे मिठाई खिला रहे
धीरज पटेरिया पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजयुमो (निर्दलीय)
पटेरिया जबलपुर उत्तर से मैदान में डटे हैं। पटेरिया का कहना है कि चुनाव लडऩे का निर्णय कार्यकर्ताओं का है। मैं भाजपा के वरिष्ठ नेता भगवती धर वाजपेयी से मिलने गया था। मुझे लगा कि वे मेरे इस निर्णय पर असंतोष व्यक्त करेंगे, लेकिन उन्होंने मुझे मिठाई खिलाई और कहा कि तुमने गंभीर निर्णय किया है।
फोन आएगा तो भी पर्चा वापिस नहीं लूंगा
संतोष जोशी उपाध्यक्ष गौ संवर्धन बोर्ड (निर्दलीय)
सुसनेर सीट पर निर्दलीय उतरे संतोष जोशी का कहना है कि मैं भाजपा की रीति-नीति और सिद्धांतों पर विश्वास करने वाले हर कार्यकर्ता को अपना नेता मानता हूं।
मैंने निर्दलीय चुनाव लडऩे का फैसला किया है। किसी के कहने पर बैठने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी ने फोन नहीं किया है और अगर फोन आया तो भी मानूंगा नहीं। मैं कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान को बचाने के लिए उतरा हूं।
राघवजी पूर्व वित्तमंत्री (प्रत्याशी सपाक्स)
अब खामोश रहा तो भीष्म कहलाऊंगा
सपाक्स के टिकट पर शमशाबाद से चुनाव लड़ रहे पूर्व वित्त मंत्री राघवजी का कहना है कि 1991 में जब अटल बिहारी वाजपेयी विदिशा आए थे, तब उन पर पत्थर फेंकने वालों को इस बार टिकट दिया गया है। मैं यदि अब भी मैं खामोश रहा तो महाभारत के भीष्म और द्रोणाचार्य की श्रेणी में आ जाऊंगा।
संगीता चारेल विधायक सैलाना (निर्दलीय)
सीएम दौड़े हैं तो हमने भी 5 साल काम किया
संगीता चारेल कहती हैं, मैं चुनाव लड़ूंगी, अब किसी की नहीं सुनने वाली। इस सवाल का जवाब पार्टी को देना होगा कि जब बेहतर काम किया तो टिकट किस आधार पर काटा गया। उन्होंने कहा, सीएम शिवराज हमारे नेता हैं, जब उन्होंने पांच साल काम किया तो हमने भी रात-दिन एक किया है।
कांग्रेस के बागी
दिनेश अहिरवार विधायक जतारा (निर्दलीय)
दबाव नहीं, अन्याय के खिलाफ उतरा हूं
दिनेश अहिरवार का कहना है कि मुझे किसी नेता ने फोन नहीं किया। जनता के कहने पर मैदान में आया हूं। कमलनाथ व विवेक तन्खा मेरे नेता हैं। अब किसी से बात करने का मतलब नहीं है। पार्टी पर दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि मैं अन्याय से लडऩे उतरा हूं। मैं वर्तमान में विधायक हूं और पांच साल जनता के लिए काम किया है।
प्रदीप जायसवाल पूर्व विधायक, वारा सिवनी (निर्दलीय)
मैं कांग्रेस को बचाने चुनाव लड़ रहा हूं
सीएम के रिश्तेदार संजय सिंह को टिकट मिलने के बाद बागी बने जायसवाल कहते हैं, मैं कांगे्रस को बचाने के लिए चुनाव लड़ रहा हूं। वारासिवनी में प्रत्याशी चयन से जनता नाराज है। बालाघाट के पर्यवेक्षक गोपाल अग्रवाल ने बात कर फार्म वापस करने के लिए कहा गया है। हमारी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी मेरे प्रस्तावक हैं, उन्हें मैं नाखुश नहीं कर सकता।
डॉ. हमीरसिंह राठौर, जवारा (निर्दलीय)
जनता की अपील पर उतरा हूं मैदान में
क्षेत्र के लोगों की अपील पर चुनाव लडऩे के लिए नामांकन भरा है। अर्जुन सिंह के बाद दिग्विजय सिंह हमारे नेता हैं। दिग्विजय ने टिकट का आश्वासन भी दिया था, जो पूरा नहीं हुआ। अभी तक किसी नेता का फोन नहीं आया है, आएगा तो कह दूंगा कि जिसे प्रत्याशी बनाया है, उससे फार्म वापस करवाओ। राठौर कहते हैं, हमारे यहां किसान और युवा परेशान हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर लड़ रहे थे, अब चुनाव में भी उठाएंगे।
मनोज अग्रवाल, विधायक कोतमा (निर्दलीय)
पत्नी भी वोट ना दे तो भी लड़ूंगा
मैं निर्दलीय प्रत्याशी हूं, मेरा कोई नेता नहीं है। हर हाल में चुनाव लड़ूंगा, चाहे मुझे मेरी पत्नी ही वोट न दे। पार्टी पर दबाव बनाने के लिए नहीं बल्कि क्षेत्र को बचाने के लिए लड़ रहा हूं। मैं अपने पिछले कार्यकाल के स्कोर के आधार पर मैदान में हूं और इसका परिणाम 28 नवम्बर को मिल जाएगा। कांग्रेस प्रत्याशी से बात भी नहीं करना चाहता।
तिलकराज सिंह मानपुर, घोषित करने के बाद नाम बदला (निर्दलीय)
सबने मिलकर मेरा नुकसान किया
टिकट घोषित करने के बाद भी बदल दिया। मुझमें क्या कमी है, यह बताया ही नहीं गया। राहुल गांधी और कमलनाथ को नेता मानता हूं, बाकी सबने मिलकर हमारा नुकसान कर दिया। नेताओं के कहने पर नहीं बल्कि जनता के कहने पर खड़ा हुआ हूं, वही भविष्य तय करेगी। नजदीकी नेताओं का फोन आया था और उन्हें भी यही बता दिया है।
Updated on:
11 Nov 2018 10:30 am
Published on:
11 Nov 2018 10:30 am
