2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कांग्रेस: टिकट बंटवारे पर सिंधिया-दिग्विजय भिड़े

टिकट टेंशन : दोनों दलों ने सूची रोकी, आज घोषणा संभव

3 min read
Google source verification
congress

कांग्रेस: टिकट बंटवारे पर सिंधिया-दिग्विजय भिड़े

भोपाल। कांग्रेस और भाजपा में उम्मीदवारों के चयन को लेकर विधानसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरु होने से एक दिन पहले गजब का टेंशन देखा गया। ऐसे में दोनों ही दलों ने गुरुवार को जारी की जाने वाली पहली सूची को एक दिन के लिए रोक लिया। वहीं कांग्रेस में तो टिकट बंटवारे पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया आपस में भिड़ गए...

प्रदेश में कांग्रेस नेताओं के बीच समन्वय में जुटे पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रयासों को विधानसभा चुनाव के मौके पर तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली में उनके सामने ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया आपस में भिड़ गए।

तकरार इतनी बढ़ी कि उन्हें शांत करने के लिए अन्य नेताओं को आगे आना पड़ा। इस घटनाक्रम से नाराज हुए राहुल ने समन्वय बनाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी। वह भी नाकाम रही। इससे गुरुवार को होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक टल गई।

दरअसल, बुधवार शाम को बैठक में टिकटों पर जैसे ही चर्चा शुरू हुई तो सिंधिया ने कहा, दो बार से हारे हुए नेताओं को टिकट नहीं देना चाहिए। दिग्विजय ने बात को काटते हुए कहा कि यह फार्मूला सभी पर लागू नहीं होता है। कुछ नेताओं को फिर से टिकट देना चाहिए, जो चुनाव जीत सकते हैं। दोनों के बीच बहस बढ़ती गई।

इन नेताओं पर रहेगा समन्वय का जिम्मा
दिग्गज नेता अहमद पटेल, वीरप्पा मोइली और अशोक गहलोत की कमेटी प्रदेश के नेताओं के बीच समन्वय करेगी। समिति टिकटों को लेकर उभर रहे विवादों को सुलझाएगी, ताकि नामों पर सहमति करा सके। अब चुनाव समिति की बैठक शुक्रवार को होगी। इसके बाद पहली सूची जारी हो सकती है।

दिग्विजय-सिंधिया में पुरानी है तकरार
दिग्विजय और ज्योतिरादित्य के बीच जो विवाद हुआ, उसका इतिहास पुराना है। पहले सिंधिया परिवार के सामने अर्जुन सिंह हुआ करते थे, लेकिन अब यह जगह दिग्विजय ने ले ली है।

पुराने जानकारों के अनुसार अर्जुन सिंह ने राजीव गांधी की इच्छा होने के बावजूद माधवराव सिंधिया को कभी प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया। दिग्विजय पॉवर में आए तो उन्होंने भी माधवराव को नुकसान पहुंचाया।

कांग्रेस में एक कुनबा ऐसा है, जिसने सिंधिया परिवार को कभी प्रमुख पदों पर आने नहीं दिया। 1989 में चुरहट कांड के चलते अर्जुन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा तो राजीव चाहते थे कि माधवराव को कमान सौंप दी जाए। अर्जुन कुर्सी छोडऩे को तैयार नहीं थे।

माधव के नाम का ऐलान होने वाला था, तभी अर्जुन ने मोती लाल वोरा का नाम आगे बढ़ा दिया। राजीव इतने नाराज हुए कि श्यामाचरण शुक्ला को वापस बुलाकर शक्तिशाली बना दिया।

वोरा के बाद शुक्ला सीएम बनाए गए। अर्जुन सिंह को मप्र की राजनीति से बाहर कर दिया गया। अर्जुन सिंह ने अपनी चालें चलना बंद नहीं किया। वो दिल्ली से बैठकर दिग्विजय सिंह को आगे बढ़ाने लगे। 1993 में एक बार फिर वही समय लौटकर आया और माधवराव सिंधिया का नाम सीएम के लिए फाइनल किया गया।

सिंधिया फोन का इंतजार करते रहे और लास्ट मिनट में फिर से एक रणनीति पर काम हुआ और दिग्विजय सिंह को मप्र का मुख्यमंत्री बना दिया गया। दिग्विजय सिंह और माधवराव सिंधिया के बीच राजनीतिक टकराव आगे जाकर व्यक्तिगत दुश्मनी में बदल गया।

50 सीटों पर हो रहा है विवाद
कें द्रीय चुनाव समिति 180 सीटों के प्रत्याशियों पर मुहर लगा चुकी है। बाकी की 50 सीटों पर विवाद है, जिन पर पैनल बनाए हैं। प्रत्याशी तय करने के लिए दिल्ली तक कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन नेताओं में सहमति न बनने के कारण टिकटों की घोषणा टल रही है।

हम साथ हैं: दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर बताया कि मेरे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के विवाद और राहुलजी के हस्तक्षेप की जो खबर मीडिया में फैलाई जा रही है, वो पूरी तरह से गलत है। हम सब कांग्रेसी एक हैं और प्रदेश की भ्रष्ट भाजपा सरकार को हराने के लिए संकल्पित हैं।

विवाद नहीं: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रात 11.15 बजे ट्वीट कर लिखा कि मीडिया में मेरे और दिग्विजय सिंह के बीच आ रही बहस की खबरें निराधार और झूठी हैं। कांग्रेस के सभी लोग एक होकर प्रदेश में भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हैं।