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ऐसे बदल रहा है सरकार का ये विभाग, जानिये इस बजट में क्या मिला तोहफा

आंगनवाड़ी सेवाओं को प्रभावशाली बनाने के लिए टेक होम राशन...

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womam and child devlopment

भोपाल। इस बार महिला बाल विकास के लिए सरकार ने अपना पिटारा खोलते हुए कई राशियों की संख्या में इजाफा किया है। प्रदेश में इस बार के बजट में महिला एवं बाल विकास के लिए 3,722 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वहीं आंगनवाड़ी सेवाओं को प्रभावशाली बनाने के लिए आंगनवाड़ी पोषण आहार योजना के अंतर्गत 0-3 साल तक के बच्चों को दिए जाने वाले टेक होम राशन तथा 3 से 6 साल तक के बच्चों को गर्म भोजन प्रदान करने के लिए राशि 6रुपए प्रति हितग्राही से हटाकर 8 रुपए प्रति हितग्राही की जा रही है।

ये हुआ खास...
- लाडली लक्ष्मी योजना के लिए 9,000 करोड़ रुपए का इस बजट में प्रावधान किया गया है। वहीं अब तक 27 लाख कन्याओं को इस योजना से लाभ मिल चुका है।
- इसके अलावा इस बार के बजट में महिला एवं बाल विकास के लिए 3,722 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आंगनबाड़ी योजना का विस्तारीकरण करने का निर्णय लिया गया है।

- गर्भवती व धात्री माताओं के लिए टेक होम राशन व्यवस्था के लिए राशि रुपए 7 प्रति हितग्राही सा बढ़ाकर 9.50 रुपए की जा रही है। साथ ही शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं को टेक होम राशन की व्यवस्था के लिए प्रति हितग्राही राशि रुपए 5 से बढ़ाकर 9.50 रुपए की जा रही है।
- राज्य सरकार ने सह नीतिगत निर्णय लिया है कि पूरक पोषण आहार प्रदाय की व्यवस्था महिला स्वसहायता समूहों के फेडरेशन केमाध्यम से की जाए।

- महिला एंव बाल विकास विभाग हेतु 3 हजार 722 करोड़ का प्रावधान है , जो साल 2017-2018 के पुनरीक्षित अनुमान से 30 प्रतिशत अधिक है।

इधर, महिला-बाल विकास के दो संचालनालय फिर होंगे एक...
राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के दोनों संचालनालय एकीकृत बाल विकास परियोजना और महिला सशक्तिकरण को फिर से एक कर दिया है।

राज्य कैबिनेट ने पिछले दिनों महिला एवं बाल विकास विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार का विभाग में दो संचालनालय बनाने का अनुभव खराब रहा है, क्योंकि पांच साल में पूरक पोषण आहार व्यवस्था दुरुस्त होने की बजाय समस्याएं बढ़ गई हैं। मैदानी स्तर पर समन्वय की कमी दिखाई देने लगी है। इन पांच सालों में महिला सशक्तिकरण का परफॉर्मेंस अच्छा नहीं रहा।

6 वर्ष पहले में बदली थी व्यवस्था: जानकारी के अनुसार वर्ष 2012 में पूरक पोषण आहार व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एकीकृत बाल विकास परियोजना और महिला सशक्तिकरण के अलग-अलग संचालनालय बनाए गए थे।

उस समय अफसरों का तर्क था कि दो संचालनालय होंगे तो मैदानी स्तर पर जिम्मेदारी बंटेगी और पूरक पोषण आहार व्यवस्था में सुधार आएगा।

नई व्यवस्था से सिर्फ विभाग के सौ सहायक संचालकों को फायदा हुआ। उन्हें उप संचालक के पद पर पदोन्नति दे दी गई।

इस भवन में लगेगा दफ्तर: दोनों संचालनालयों को एक करने के बाद विभाग का संचालनालय वात्सल्य भवन में लगेगा। फिलहाल महिला सशक्तिकरण संचालनालय पर्यावास भवन में लगता है।