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मैनेजमेंट गुरु नवीन कृष्ण राय ने ट्रेनी ऑफिसर्स को दी ट्रेनिंग, नेगोशिएशन एवं लोक प्रबंधन की दी जानकारी

नेगोशिएशन के असफल होने की स्थिति में उनके पास दूसरा सबसे अच्छा विकल्प क्या है और उन्हें अपने उस विकल्प से कमतर किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करना चाहिए....

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Guru Naveen Krishna

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भोपाल। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशसन अकादमी, भोपाल में लोक सेवा आयोग से चुने गए अधिकारियों के लिए चल रहे फाउंडेशन कोर्स के अन्तर्गत सोमवार को 'नेगोशिएशन' विषय पर एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में 100 से अधिक प्रतिभागियों को आईआईएम इंदौर के मैनेजर श्री नवीन कृष्ण राय ने सम्बोधित किया। इस प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य प्रतिभागियों को मैनज्मेंट से सम्बंधित कान्सेप्ट्स और सिधांतों से रूबरू कराना था।

नेगोशिएशन एवं लोक प्रबंधन की दी जानकारी

इस सत्र में ट्रेनी अधिकारियों को विभिन्न प्रकार के मनोविज्ञान और प्रबंधन के सिद्धांतों व मॉडलों के माध्यम से नेगोशिएशन एवं लोक प्रबंधन के बारे में बताया गया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राय ने टीम के लोगों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक्सपेक्टेंसी थ्योरी ऑफ़ मोटिवेशन की मदद से बताया कि अपने टीम के सदस्यों का मोटिवेशन बनाए रखने के लिए उन्हें वही इनाम दें जिसे प्राप्त कर उन्हें ख़ुशी मिले।

लाभ और हानि को अलग-अलग महत्व

लोगों के निर्णय लेने के बारे में बात करते हुए राय ने बताया गया है कि लोग हमेशा तर्कसंगत व्यवहार नहीं करते हैं और वे पूर्वाग्रह रखते हैं। प्रास्पेक्ट सिद्धांत की मदद से प्रतिभागियों को बताया गया कि लोग लाभ और हानि को अलग-अलग महत्व देते हैं। समान मूल्य के लाभ और हानि होने की स्थिति में, कोई भी व्यक्ति उस लाभ से मिलने वाली ख़ुशी को उसी मूल्य के हानि से होने वाली पीड़ा की तुलना में से कम आंकता है। उसे उस पीड़ा का अहसास ज़्यादा होता है।

कॉन्फ़्लिक्ट मैनेजमेंट के बारे में बात करते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को नेगोशीएशन की विभिन्न शैलियों, चरणों और रणनीतियों के बारे में बताया। नेगोशीएशन के विभिन्न चरणों के बारे में विस्तार से बात करते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि किसी भी नेगोशीएशन के लिए तैयारी करते समय व्यक्ति को यह बात सोचनी व समझ लेनी चाहिए कि उस नेगोशिएशन के असफल होने की स्थिति में उनके पास दूसरा सबसे अच्छा विकल्प क्या है और उन्हें अपने उस विकल्प से कमतर किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करना चाहिए।