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MP में निकाय चुनाव से पहले बड़ा झटका, महापौर-पार्षद निधि को किया गया खत्म

MP Nikay Chunav: मध्यप्रदेश के नगर निगमों में महापौर, अध्यक्ष और पार्षदों की अलग-अलग निधि अब खत्म कर दी गई है। नगरीय विकास विभाग ने सभी निगम आयुक्तों को निर्देश जारी किए हैं।

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भोपाल

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Akash Dewani

Mar 07, 2026

Mayor-Councilor funds abolished major setback ahead of MP civic elections

MP civic elections 2027 (फोटो- Patrika.com)

MP Civic Elections:मध्य प्रदेश के नगर निगमों में अब महापौर के साथ अध्यक्ष, पार्षदों आदि की निधि के प्रावधान नहीं होंगे। नगरीय विकास विभाग ने सभी निगम आयुक्तों को निर्देश जारी किए हैं। अगले साल निकाय चुनाव (MP Nikay Chunav) होने वाले हैं, ऐसे में नगर निगमों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि इससे परेशानी में आ सकते हैं। अभी तक महापौर अपने हिसाब से महापौर निधि का प्रावधान करा लेते थे जो एक साल में 10 करोड़ तक थी।

यह विधायक निधि से भी ज्यादा है। उप सचिव प्रमोद शुक्ला ने जारी निर्देशों में कहा है कि यह तथ्य संज्ञान में आया है कि नगर पालिक निगमों के द्वारा अपने बजट में महापौर निधि का प्रावधान किया जाता है। जबकि अधिनियम में नगरपालिक निधि के प्रावधान है। इसमें वित्तीय वर्ष में निगम की प्राप्तियों तथा आय का अनुमान पत्रक या बजट प्रस्ताव में महापौर निधि के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। (MP News)

पिछले बजट में दोगुनी की थी महापौर-पार्षद निधि

नगर निगम भोपाल में पिछले साल बजट में महापौर, पार्षद, एमआइसी मेंबर, अध्यक्ष की सालाना निधि दोगुनी कर दी गई थी। महापौर निधि 5 की जगह 10 करोड़ तो अध्यक्ष की 5 और एमआइसी मेंबर की 1 करोड़ रुपए, पार्षद की 50 लाख और जोन अध्यक्ष की 10 लाख रुपए की गई थी। इंदौर में महापौर निधि 10 करोड़ और ग्वालियर में 6 करोड़ है। महापौर, पार्षद आदि जनप्रतिनिधि इस निधि से अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराते हैं। महापौर जहां किसी भी वार्ड में काम करा सकते हैं वहीं पार्षद अपने वार्ड में सड़क, नाली, टाइल्स, पार्क, सौंदर्गीकरण आदि के काम कराते हैं। अब केवल नगर पालिक निगम निधि में ही राशि रहेगी। (MP News)