
meenakshi natarajan nomination rejected congress attacks bjp (मीनाक्षी नजराजन का नामांकन खारिज होने के बाद भोपाल में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस SOURCE-PATRIKA)
Congress Candidate Meenakshi Natarajan Nomination Reject: मध्यप्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद भोपाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा गर्मा गया है। कांग्रेस पूरी तरह से बीजेपी पर हमलावर है और मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को रद्द किए जाने को प्रजातंत्र की हत्या और वोट चोरी के बाद सीट चोरी के आरोप लगाए हैं। बता दें कि बीजेपी के द्वारा मीनाक्षी नटराजन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में तेलंगाना की एक कोर्ट में दर्ज मामले की जानकारी छिपाई है, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी सियासी पारा गर्मा गया है। भोपाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीनाक्षी नटराजन व अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर बीजेपी पर बड़ा हमला बोला तो वहीं दिल्ली में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग करते हुए भाजपा पर हमला बोला है।
केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस महासचिव- यह लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में सभी संवैधानिक और कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।
जीतू पटवारी- 'मध्य प्रदेश में हुई घटना पूरे देश के लिए एक काला अध्याय है। भाजपा ने मप्र को कलंकित कर दिया है, हमारे सभी दस्तावेज पूरी तरह सही थे, लेकिन भाजपा और चुनाव आयोग पहले से ही यह तय करके आए थे कि साम, दाम, दंड, भेद अपनाकर कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन निरस्त करना है। भाजपा सरकार ने पहले पूरी पटकथा लिखी और फिर चुनाव आयोग को उसी के अनुसार चलाकर नामांकन निरस्त करवा दिया।'
विवेक तनखा- अब वोट चोरी से नेक्स्ट लेवल पे सीट चोरी का सिलसिला शुरू हो गया है। मीनाक्षी जी का राज्य सभा का नामांकन निरस्त नहीं हुआ है। प्रजातंत्र की हत्या हुई है।
मीनाक्षी नटराजन- 'यह सब तब शुरू हुआ जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने ज़रूरी संख्या बल न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा था, तभी पता चल गया था कि वो संविधान और लोकतंत्र को कुचलने वाली राजनीति कर रहे थे। यह सिर्फ राज्यसभा सीट या किसी खास उम्मीदवार की बात नहीं है। यह 'आइडिया ऑफ़ इंडिया' और लोकतंत्र के लिए उस व्यापक संघर्ष की बात है, जिसके लिए हमारे नेता राहुल गांधी आज देश के लिए एक अहम लड़ाई लड़ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र बचेगा, क्या भारत का संघीय ढांचा कायम रहेगा, और क्या एक-पार्टी सिस्टम और तानाशाही थोपने की कोशिश नाकाम होगी।'
Published on:
09 Jun 2026 10:06 pm
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