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एमपी में सरकार के लिए परेशानी बने आधा दर्जन मंत्री, मंत्रिमंडल विस्तार में बदलेंगे चेहरे

MP BJP- एक साल में विवादों के चलते सुर्खियों में रहे, सत्ता-संगठन के लिए चुनौती बन विपक्ष को दे रहे मुद्दा बयान, बगावत और टकराव, ढाई साल में सरकार के लिए परेशानी बने मंत्री
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Congress compiling details of CM Mohan Yadav relatives assets

CM Mohan Yadav- Patrika.com

MP BJP- अवकाश गर्ग, भोपाल. प्रदेश की भाजपा सरकार इन दिनों विपक्ष के हमलों से कम और अपने ही मंत्रियों के विवादित बयानों, कार्यशैली और आपसी टकरावों से ज्यादा असहज नजर आ रही है। हाल के विवादों ने तो अब संगठन में भी मंत्रियों के विवादों को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। ढाई साल के कार्यकाल में कई मंत्री ऐसे रहे, जिनके बयान राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा और विवाद का कारण बने। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर टिप्पणी का मामला तो देशभर में गूंजा। ताजा विवाद लोक स्वास्थ्य मंत्री संपतिया उइके और अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान के बीच सामने आया। इन विवादों ने सत्ता-संगठन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मंत्रियों को यह काफी भारी पड़ सकता है। प्रदेश मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार में कुछ की छंटनी हो सकती है।

प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बद्जुबानी, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद और कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के रेत माफिया पर दिए बयान सुर्खियों में रहे। यहां तक कि विपक्ष भी लगातार सरकार को घेरता रहा।

बदल सकते हैं कई चेहरे

मोहन सरकार के ढाई साल पूरे होने के साथ ही सत्ता-संगठन के प्रदेश के मंत्रियों की शीर्ष बैठक आयोजित की। इसमें सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ संगठन की ओर से राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मौजूद रहे। सूत्रों की मानें तो इसमें मंत्रियों के कार्य-व्यवहार का भी आकलन किया गया। राष्ट्रीय नेतृत्व भी प्रदेश के मंत्रियों के विवादों से वाकिफ है कयास हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं।

प्रदेश के शीर्ष मंत्री और उनसे जुड़े विवाद

विजय शाह: जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंदौर के रायकुंडा में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित दिए। देशभर में इसका विरोध हुआ। मामला हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

कैलाश विजयवर्गीय: नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी अपने बयानों के कारण कई बार आलोचना झेल चुके हैं। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित से मौतों के दौरान पत्रकारों के सवाल पर अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया था।

प्रतिमा बागरी: नगरीय विकास एवं आवास विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी नया राजनीतिक विवाद बन गई हैं। कांग्रेस प्रवक्ता प्रदीप अहिरवार की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि बागरी के पास फर्जी जाति प्रमाण पत्र है।

एदल सिंह कंषाना: कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना भी अपने बयान को लेकर आलोचना झेल रहे हैं। उन्होंने कहा 'रेत माफिया नहीं होते, ये तो पेट माफिया हैं, जो पेट भरते हैं।' इसके बाद मुरैना में रेत वाहन की टक्कर से एक रेंजर की मौत हो गई।

नागर सिंह चौहान: अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान पहले भी बगावती तेवर दिखा चुके हैं। हाल में भाई इंदर सिंह चौहान ने आलीराजपुर जनपद की सीईओ को धमकाया। हालाकि मंत्री ने स्वयं को भाई से अलग बताया।

संपतिया उइके: लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंत्री संपतिया उइके पहले विभाग के करोड़ों के गबन के आरोपों में घिरी रहीं। हाल में मंत्रियों की वन-टू-वन बैठक के बाद नागर सिंह को उन्होंने शराब कारोबारी बता कहा, उनसे समन्वय नहीं कर सकते।