Chaitra Navratri 2019: बस इस दिन करें ये काम और पाएं देवी मां से मनचाहा वरदान!

Chaitra Navratri 2019: बस इस दिन करें ये काम और पाएं देवी मां से मनचाहा वरदान!

Deepesh Tiwari | Publish: Apr, 11 2019 05:02:43 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

यदि अभी तक किन्हीं कारणों-वश नहीं दे पाएं हो पूरा ध्यान तो भी इस एक तरीके से पूरी हो सकती है आपकी मनोकामना...

भोपाल। साल में चार नवरात्रि होती है, जिनमें से एक चैत्र नवरात्रि व दूसरी शारदीय नवरात्रि हैं, वहीं इनके अलावा दो गुप्त नवरात्रियां भी होती है।

सनातन धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व होता है। इन नौ दिनों में देवी मां की पूजा से कई तरह के विशिष्ट कार्य पूरे होने की बात भी कही जाती है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार सनातन धर्म में देवी शक्ति का प्रतीक मानी गई हैं। अत: किसी भी कार्य को करने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती ही है, ऐसे में देवी मां का आह्वान किया जाता है।

माना जाता है कि पहले के समय में नवरात्र के दौरान लोग देवी मां की भक्ति में ही लीन रहते थे, और अपना सारा समय माता के चरणों में बिताना ही पसंद करते थे। लेकिन देखा गया है कि आज कल की दौड़ भाग वाली इस जिंदगी में भक्त लाख चाह कर भी नवरात्र में देवी के लिए पूरी तरह से समय नहीं निकाल पाते हैं।

यदि आप भी अभी तक किन्हीं कारणों-वश मातारानी की पूजा में पूरा समय व ध्यान नहीं दे पाएं हैं,तो भी एक तरीके से आप देवी मां को प्रसन्न कर सकते हैं।
जी हां, यदि आप नवरात्र के बीत चुके इन पांच दिनों में अब तक देवी मां की पूजा या अन्य भक्ति में पूरा ध्यान नहीं दे सके होें, तो पंडित शर्मा के अनुसार नवरात्र में एक दिन ऐसा होता है। जो आपको एक ही दिन में पूरे नौ दिनों का फल दे सकता है।

उनके अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ व रामरक्षास्त्रोत का पाठ कर हम आसानी से देवी मां को प्रसन्न कर सकते है। वहीं यदि अन्य दिनों में हम इन पाठों को नहीं कर सके हों तो केवल अष्टमी के दिन भी पूरी श्रृद्धा से इनका पाठ करने से तकरीबन सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

 

 

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नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। इसके अलावा भी सालभर भक्तजन सप्तशती का पाठ कर देवी मां को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। वहीं जानकारों के अनुसार सप्ताह के हर दिन सप्तशती पाठ का अपना अलग महत्व है और वार के अनुसार इसका पाठ विभिन्न फल देने वाला कहा गया है।

इस बार 13 अप्रैल यानि शनिवार को अष्टमी पड़ रही है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शनिवार का दिन देवी मां का ध्यान कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करना, एक करोड़ चंडी पाठ के फल के बराबर होता है।

ऐसे समझें वार अनुसार दुर्गा सप्तशती का फल...

1. रविवार: जो मनुष्य इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है, उसे नौ गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।
2. सोमवार : इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से एक हजार गुना फल प्राप्त होता है।
3. मंगलवार: इस दिन दुर्गा सप्तशती पाठ करने से सौ पाठ करने का पुण्यफल प्राप्त होता है।
4. बुधवार : इस दिन मां का ध्यान कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करना, एक लाख पाठ का फल देने वाला है।
5. गुरुवार और शुक्रवार : इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ कर मां की आराधना करने का फल, दो लाख चंडी पाठ के फल के बराबर होता है।
6. शनिवार : इस दिन देवी मां का ध्यान कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करना, एक करोड़ चंडी पाठ के फल के बराबर होता है।

मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि में अष्टमी का सर्वाधिक महत्व है। और इस दिन भक्ति भाव से की गई पूजा का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता।

चै‍त्र नवरात्रि में अष्टमी का महत्व...
नवरात्रों मे आठवे दिन यानि अष्टमी का विशेष महत्व है इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है। मां गौरी को शिव की अर्धांगनी और गणेश जी की माता के रूप मे जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई भक्त महागौरी की सच्चे दिल से उपासना करता है तो भक्तों के सभी बुरे कर्म धुल जाते हैं और पूर्व संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। माता महागौरी के चमत्कारिक मंत्र का अपना महत्व है जिन्हें जपने से अनंत सुखों का फल मिलता है।

इनका मंत्र इस प्रकार है...
(1) 'ॐ महागौर्य: नम:।'
(2) 'ॐ नवनिधि गौरी महादैव्ये नम:।'

दुर्गा सप्तशती पाठ विशेष रूप से नवरात्रों में किया जाता है और अचूक फल देने वाला होता है। दूर्गा सप्तशती पाठ में 13 अध्याय है। पाठ करने वाला , पाठ सुनने वाला सभी देवी कृपा के पात्र बनते है। नवरात्रि में नव दुर्गा की पूजा के लिए यह सर्वोपरि किताब है। इसमें माँ दुर्गा के द्वारा लिए गये अवतारों की भी जानकारी प्राप्त होती है।

दूर्गा सप्तशती अध्याय 1 मधु कैटभ वध...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 2 देवताओ के तेज से माँ दुर्गा का अवतरण और महिषासुर सेना का वध...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 3 महिषासुर और उसके सेनापति का वध...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 4 इन्द्राणी देवताओ के द्वारा मां की स्तुति...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 5 देवताओ के द्वारा मां की स्तुति और चन्द मुंड द्वारा शुम्भ के सामने देवी की सुन्दरता का वर्तांत...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 6 धूम्रलोचन वध...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 7 चण्ड मुण्ड वध...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 8 रक्तबीज वध...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 9 -10 निशुम्भ शुम्भ वध...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 11 देवताओ द्वारा देवी की स्तुति और देवी के द्वारा देवताओं को वरदान...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 12 देवी चरित्र के पाठ की महिमा और फल...

दूर्गा सप्तशती अध्याय 13 सुरथ और वैश्यको देवी का वरदान...


दुर्गा सप्तशती पाठ विधि :....

– सर्वप्रथम साधक को स्नान कर शुद्ध हो जाना चाहिए।

– तत्पश्चात वह आसन शुद्धि की क्रिया कर आसन पर बैठ जाए।

– माथे पर अपनी पसंद के अनुसार भस्म, चंदन अथवा रोली लगा लें।

– शिखा बांध लें, फिर पूर्वाभिमुख होकर चार बार आचमन करें।

– इसके बाद प्राणायाम करके गणेश आदि देवताओं एवं गुरुजनों को प्रणाम करें, फिर पवित्रेस्थो वैष्णव्यौ इत्यादि मन्त्र से कुश की पवित्री धारण करके हाथ में लाल फूल, अक्षत और जल लेकर देवी को अर्पित करें तथा मंत्रों से संकल्प लें।

– देवी का ध्यान करते हुए पंचोपचार विधि से पुस्तक की पूजा करें।

– फिर मूल नवार्ण मन्त्र से पीठ आदि में आधारशक्ति की स्थापना करके उसके ऊपर पुस्तक को विराजमान करें। इसके बाद शापोद्धार करना चाहिए।

– इसके बाद उत्कीलन मन्त्र का जाप किया जाता है। इसका जप आदि और अन्त में इक्कीस-इक्कीस बार होता है।

-इसके जप के पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या का जाप करना चाहिए।

इसके बाद पूरे ध्यान के साथ माता दुर्गा का स्मरण करते हुए दुर्गा सप्तशती पाठ करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। दुर्गा अर्थात दुर्ग शब्द से दुर्गा बना है , दुर्ग =किला ,स्तंभ , शप्तशती अर्थात सात सौ। जिस ग्रन्थ को सात सौ श्लोकों में समाहित किया गया हो उसका नाम शप्तशती है। जो कोई भी इस ग्रन्थ का अवलोकन एवं पाठ करेगा “मां जगदम्बा” की उसके ऊपर असीम कृपा होगी।

वहीं दुर्गा द्वादशन्नि माला का पाठ भी सभी प्रकार की कठिनाइयों से मुक्ति देता है।

 


दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय रखें इन 9 बातों का ध्यान...

दुर्गा सप्‍तशती का पाठ वैसे तो कई घरों में रोजाना किया जाता है। मगर नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करना विशेष और जल्दी फलदायक माना गया है। नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करने से अन्‍न, धन, यश, कीर्ति की प्राप्ति होती है। लेकिन पाठ की सफलता और पूर्ण लाभ के लिए पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए…



1. स्पष्‍ट होना चाहिए उच्‍चारण...
दुर्गा सप्तशती के पाठ में सस्वर और एक लय से पाठ करने का महत्व है। सप्तशती में बताया गया है कि पाठ इस तरह से करना चाहिए कि एक-एक शब्द का उच्चारण साफ हो और आप उसे सुन सकें। बहुत जोर से या धीमे से पाठ ना करें।


2. शुद्धता है बहुत जरूरी...
पाठ करते समय हाथों से पैर का स्पर्श नहीं करना चाहिए, अगर पैर को स्पर्श करते हैं तो हाथों को जल से धो लें।

3. ऐसे आसन का करें प्रयोग...
पाठ करने के लिए कुश का आसन प्रयोग करना चाहिए। अगर यह उपलब्ध नहीं हो तब ऊनी चादर या ऊनी कंबल का प्रयोग कर सकते हैं।

 

4. ऐसे वस्‍त्र करें धारण...
पाठ करते समय बिना सिले हुए वस्त्रों को धारण करना चाहिए, पुरुष इसके लिए धोती और महिलाएं साड़ी पहन सकती हैं।


5. मन एकाग्रचित होना जरूरी...
दुर्गा पाठ करते समय जम्हाई नहीं लेनी चाहिए। पाठ करते समय आलस भी नहीं करना चाहिए। मन को पूरी तरह देवी में केन्द्रित करने का प्रयास करना चाहिए।

6.इस प्रकार करना चाहिए पाठ...
दुर्गा सप्तशती में तीन चरित्र यानी तीन खंड हैं प्रथम चरित्र, मध्य चरित्र, उत्तम चरित्र। प्रथम चरित्र में पहला अध्याय आता है। मध्यम चरित्र में दूसरे से चौथा अध्याय और उत्तम चरित्र में 5 से लेकर 13 अध्याय आता है। पाठ करने वाले को पाठ करते समय कम से कम किसी एक चरित्र का पूरा पाठ करना चाहिए। एक बार में तीनों चरित्र का पाठ उत्तम माना गया है।


7. ऐसा करने से मिलता है पूर्ण फल...
सप्तशती के तीनों चरित्र का पाठ करने से पहले कवच, कीलक और अर्गलास्तोत्र, नवार्ण मंत्र, और देवी सूक्त का पाठ करना करना चाहिए। इससे पाठ का पूर्ण फल मिलता है।


8. कुंजिकास्तोत्र का पाठ...
अगर संपूर्ण पाठ करने के लिए किसी दिन समय नहीं तो कुंजिकास्तोत्र का पाठ करके देवी से प्रार्थना करें कि वह आपकी पूजा स्वीकार करें।

 

9. देवी मां से क्षमा प्रार्थना...
सप्तशती पाठ समाप्त करने के बाद अंत में क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए और देवी से पाठ के दौरान कोई कोई भूल हुई हो तो उसके लिए क्षमा मांगनी चाहिए।

तांत्रिक मंत्र! जो करते हैं ये उपाय

1. शीघ्र विवाह के लिए।

क्लीं ऐं ह्रीं चामुण्डायै विच्चे।

2. लक्ष्मी प्राप्ति के लिए स्फटिक की माला पर।

ओंम ऐं हृी क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

3. परेशानियों के अन्त के लिए।

क्लीं हृीं ऐं चामुण्डायै विच्चे।

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