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अंतरिक्ष से भोपाल का लड़का करेगा चंद्रमा की फोटोग्राफी, स्पेसएक्स के चंद्रमिशन के लिए बनाया लैंडर

Moon Mission: चंद्रमा पर नासा के आर्टेमिस मिशन को गुरुवार को अमेरिकन समयानुसार रात 1:05 बजे इंटुएटिव मशीन्स द्वारा विकसित नोवा-सी लैंडर को लॉन्च किया गया था। जिसके लिए भोपाल के प्रोफेसर डॉ. मधुर तिवारी ने ईगलकैम लैंडर को डिजाइन किया है। यह लैंडर चंद्रमा की परिक्रमा करते हुआ वहां की फोटो लेकर भेजेगा।

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बता दें कि फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39 ए से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट पर लॉन्च किया गया था। लगभग 48 मिनट बाद रात 1:53 बजे, लैंडर को फाल्कन 9 के दूसरे चरण से सफलतापूर्वक तैनात किया गया। तैनाती के बाद, ह्यूस्टन में मिशन नियंत्रण ने पुष्टि कर दी कि अंतरिक्ष यान के साथ संपर्क स्थापित हो गया है। अंतरिक्ष यान फिलहाल स्थिर है और सौर ऊर्जा से संचालित हो रहा है।

इसका विकास एम्ब्री-रिडल एरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी ने किया है, जिसमें मिनी सेटेलाइट कैमरा सिस्टम का यूज किया गया है, जिसे "ईगलकैम" के नाम से जाना जाता है। तकनीकी रूप से यह 14 फरवरी के शुरुआती घंटों में लगभग रात के 1 बजे किया गया। इस महत्वपूर्ण घटना में ईगलकैम ने कई अभूतपूर्व कारनामे करने का प्रयास किया।

Wi-Fi टैक्नीक यूज करने वाला पहला प्रोजेक्ट

चंद्रमा तक पहुंचने के लिए यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट की ओर से ये पहला मिशन था। यह प्रोजेक्ट चंद्र कक्षा में किसी अंतरिक्ष यान के तीसरे व्यक्ति के दृश्य प्राप्त करने वाला पहला और वाईफाई टैक्नीक का उपयोग करने वाला पहला प्रोजेक्ट होगा। माना जा रहा है कि 22 फरवरी यानी आज स्टूडेंट का यह लैंडर चंद्रमा पर उतरने से पहले इंटुएटिव मशीन्स नोवा-सी लूनर लैंडर से अलग हो जाएगा। ईगलकैम का टारगेट इस घटना की अभूतपूर्व छवियों को कैप्चर करना है।

भोपाल के डॉ. मधुर तिवारी मिशन का हिस्सा

मेलबर्न, FL में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. मधुर तिवारी इस मिशन का हिस्सा हैं। ईगलकैम के विकास के दौरान वह एम्ब्री-रिडल एरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी में पीएचडी छात्र थे। डॉ. तिवारी ने कहा, सभी एयरोस्पेस इंजीनियर का सपना होता है कि वह किसी बड़े काम में सीधे योगदान दे। मैं विश्वास नहीं कर सकता कि मैं चंद्रमा पर मिशन का हिस्सा हूं।'' डॉ. तिवारी ने इस पूरे काम के लिए जिम्मेदार टीम का नेतृत्व किया।

उन्होंने कहा कि मेरी टीम चंद्रमा पर सुरक्षित लैंडिंग डिजाइन करने के लिए जिम्मेदार थी। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अपनी उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अमेरिका जाने से पहले डॉ. तिवारी ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल भोपाल में की।