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सबसे असरदार तरीका, 5 साल तक आसपास भी नहीं फटकेंगे मच्छर

मच्छरों से होनेवाली खतरनाक बीमारियों से हर कोई घबराता है। इनसे बचने के लिए मच्छरदानी लगाना सबसे असरकारक साबित होता है। डेंगू-मलेरिया से निपटने के लिए अब अधिकांश लोग मच्छरदानी का सहारा लेने लगे हैं। अब ऐसी मच्छरदानी आई हैं जोकि 20 धुलाई तक काम करेगी। मच्छर 5 साल तक आसपास भी नहीं फटकेंगे।

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डेंगू-मलेरिया से निपटने के लिए अब अधिकांश लोग मच्छरदानी का सहारा लेने लगे हैं

मच्छरों से होनेवाली खतरनाक बीमारियों से हर कोई घबराता है। इनसे बचने के लिए मच्छरदानी लगाना सबसे असरकारक साबित होता है। डेंगू-मलेरिया से निपटने के लिए अब अधिकांश लोग मच्छरदानी का सहारा लेने लगे हैं।
अब ऐसी मच्छरदानी आई हैं जोकि 20 धुलाई तक काम करेगी। मच्छर
5 साल तक आसपास भी नहीं फटकेंगे।

भोपाल में मच्छरजनित जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए अब सरकार मुफ्त मच्छरदानी बांटेगी। केंद्र सरकार ने राज्य को कुल 96 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानियां मुहैया करवाई हैं। इनमें से भोपाल को एक लाख 56 हजार मच्छरदानियां मिली हैं। शहर में डेढ़ लाख घर स्लम व अवैध कॉलोनियां हैं। जिनमें करीब सात लाख की आबादी रहती है। ऐसे में साढ़े पांच लाख लोग मच्छरजनित बीमारियों के खतरे में रहेंगे।

क्यों खास है मच्छरदानी:
मेडिकेटेड मच्छरदानी के संपर्क में आते ही मच्छर दम तोड़ देता है क्योंकि, इसमें डेल्टा मैथरीन दवा का उपयोग किया गया है। 20 धुलाई तक दवा का असर मच्छरदानी में रहता है वहीं पांच साल तक इसका उपयोग किया जा सकता है।

मच्छरदानी की कीमत डेढ़ सौ रुपए
मार्च से पहले वितरण 96 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानियों को पूरे प्रदेश में मार्च से पहले वितरित करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए गए हैं। एक मच्छरदानी की कीमत डेढ़ सौ रुपए है। इस तरह 96 लाख मच्छरदानियों के लिए करीब डेढ़ सौ करोड़ का भुगतान किया जाएगा।

मेथ्रिल सेल्यूशन 2.5 रसायन का उपयोग
मेडिकेटेड मच्छरदानी को मेडिकेट करने के लिए डेल्टा मेथ्रिल सेल्यूशन 2. 5 रसायन के घोल में डुबोना होता है। इससे एक पांच साल तक मच्छर मच्छरदानी के आसपास भी नहीं फटकते। यह रसायन बाजार में भी मिलता है।

3 साइज में मच्छरदानी
मेडिकेटेड मच्छरदानियां तीन साइज की हैं, साइज एक एक व्यक्ति के लिए, साइज दो-दो व्यक्तियों के लिए व साइज तीन में तीन से अधिक लोग सो सकते हैं। 2019 में भी प्रदेश में 62 लाख मच्छरदानियां बांटी गई थीं।

एनवीबीडीसीपी के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. हिमांशु जयसवार ने बताया कि जहां मलेरिया व डेंगू के रोगी मिल चुके है वहां मच्छरदानी देने में प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं गर्भवती व पांच साल के छोटे बच्चों को भी प्राथमिकता देंगे। स्वास्थ्य विभाग सर्वे कर रहा है। वितरण के लिए आशा कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी गई है।

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