
cm mohan yadav
MP Budget 2026: मध्य प्रदेश बजट 2026 को लेकर चर्चा है कि यह देश का पहला रोलिंग बजट मॉडल बन गया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मोहन यादव सरकार के तीसरे बजट को रोलिंग बजट बताया है। उन्होंने कहा कि यह भविष्योन्मुख और निरंतर अपडेट होने वाला ढांचा है। यहां जानें क्या यह सच में देश का पहला रोलिंग बजट है और एमपी का ये बजट सामान्य अन्य राज्यों और केंद्र के बजट से किस तरह अलग है?
रोलिंग बजट पारंपरिक वार्षिक बजट से अलग होता है। दरअसल इसमें सिर्फ वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि आने वाले 2 से 3 साल का अनुमान और लक्ष्य भी शामिल होते हैं। हर साल पुराने अनुमानों को अपडेट करते हुए नया वर्ष जोड़ दिया जाता है। यानी बजट एक स्थिर दस्तावेज नहीं, बल्कि गतिशील योजना बन जाता है।
अब तक अधिकतर राज्यों में और केंद्र सरकार का वार्षिक बजट पेश किया जाता रहा है। इनमें मध्यम अवधि रूपरेखा जैसी व्यवस्थाएं तो दिखीं, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से रोलिंग बजट मॉडल के रूप में पेश नहीं किया गया।
एमपी बजट 2026 में योजनाओं को बहुवर्षीय यानी 3 साल के लक्ष्य से जोड़ा गया है। 2026 से 2029 तक की कार्य योजनाएं शामिल की गई हैं। तीन साल के अंत में इस मॉडल से 2030 को जोड़ दिया जाएगा और 26-27 को हटा दिया जाएगा। हर साल वास्तविक खर्च और उपलब्धि देखते हुए अगले दो साल के अनुमान बदले जाएंगे।
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक सुरक्षा प्रोजेक्ट्स के लिए चरणबद्ध वित्तीय अनुमान के साथ ही इसमें हर साल समीक्षा और संशोधन की गुंजाइश रखी गई है। बजट को लेकर सरकार का दावा है कि इस तरह का बजट विकास कार्यों में निरंतरता लाएगा। अधूरी परियोजनाओं की समस्याएं इस मॉडल से कम होगी।
नीतिगत एक्सपर्ट्स और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रोलिंग तत्व पहले भी बजट ढांचे में मौजूद रहे हैं, लेकिन यदि मध्य प्रदेश ने इसे औपचारिक रूप से लागू और घोषित किया है। इसे प्रशासनिक दृष्टि से नई पहल माना जा सकता है।
Updated on:
18 Feb 2026 02:59 pm
Published on:
18 Feb 2026 02:12 pm
