भोपाल में चुनावी सरगर्मियां अब तेज हो रही हैं। जिन प्रत्याशियों के टिकट घोषित हो चुके हैं, उन्होंने प्रचार और जनसंपर्क बढ़ा दिया है। सभी की निगाहें अपने-अपने क्षेत्रों में समाजों के वोट बैंक पर हैं। शहर की सभी विधानसभा सीटों में कई समाजों की अच्छी खासी आबादी है। ऐसे में प्रमुख दलों की नजर समाजों पर है।
राजधानी भोपाल में चुनावी सरगर्मियां अब तेज हो रही हैं। जिन प्रत्याशियों के टिकट घोषित हो चुके हैं, उन्होंने प्रचार और जनसंपर्क बढ़ा दिया है। सभी की निगाहें अपने-अपने क्षेत्रों में समाजों के वोट बैंक पर हैं। शहर की सभी विधानसभा सीटों में कई समाजों की अच्छी खासी आबादी है। ऐसे में प्रमुख दलों की नजर समाजों पर है।
कई सीटों पर मुस्लिम, कायस्थ और ब्राह्मण समाज सहित अन्य समाज निर्णायक स्थिति में हैं। खास बात यह है कि किसी भी एक दल के पास इन समाजों का वोटबैंक नहीं है। इसलिए सभी पार्टियां इन्हें साधने में जुटी हैं।
अलग-अलग विधानसभा में अलग-अलग समाज
राजधानी में भोजपुरी, मलयाली, बंगाली, मराठी, सहित अन्य समाज के लोग रहते हैं। विभिन्न समाजों की सबसे अधिक मिश्रित आबादी गोविंदपुरा और कोलार के हुजूर क्षेत्र में हैं। मध्य, दक्षिण पश्चिम, नरेला और उत्तर में भी कुछ समाजों की दखल है। उत्तर में मुस्लिम समाज, तो हुजूर में ब्राह्मण ज्यादा उत्तर विधानसभा के साथ नरेला में मुस्लिम समाज की खासी आबादी है। इसमें पुराने शहर का अधिकांश हिस्सा आता है। जैन और अग्रवाल, कायस्थ, ब्राह्मण समाज के लोग भी इस क्षेत्र में हैं।
उत्तर, नरेला, मध्य विधानसभा में मुस्लिम समाज के साथ-साथ अग्रवाल, जैन, पंजाबी समाज, कायस्थ समाज सहित अन्य कई समाजों की खासी संख्या है। नरेला, दक्षिण पश्चिम और हुजूर विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का वोट बैंक अधिक है।
गोविंदपुरा में दक्षिण भारतीय समाज
इस क्षेत्र में दक्षिण भारतीय समाज, बंगाली समाज का सबसे अधिक दखल है। इसके साथ-साथ भोजपुरी समाज की बड़ी आबादी भी इस क्षेत्र में निवास करती है। यहां अन्ना नगर क्षेत्र में सबसे अधिक दक्षिण भारतीय परिवार रहते हैं, इसी प्रकार मलयाली, बंगाली के साथ-साथ भोजपुरी समाज का भी यहां खासा होल्ड है।
छठ पूजा के कारण आगे बढ़ाएं तारीख
भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद कहते हैं कि भोजपुरी समाज में बिहार, उप्र, झारखंड आदि राज्यों के लोग शामिल हैं। समाज के लोगों का कहना है कि छठ पूजा के दो दिन पहले चुनाव हो रहे हैं। सभी मतदान कर पाएं इसलिए चुनाव की तारीख आगे बढऩी चाहिए।
मतदान अवश्य करें
मप्र मुस्लिम त्योहार कमेटी के औसाफ शाहमीरी खुर्रम के अनुसार शहर की पांच विधानसभा सीटें मुस्लिम बहुल हैं। लोकतंत्र के उत्सव में हर मतदाता को अपना बहुमूल्य मत देकर बेहतर जनप्रतिनिधि चुनकर लोकतंत्र को मजबूत बनाना चाहिए।
किस समाज की कितनी आबादी (अनुमानित संख्या)
मुस्लिम समाज-07
ब्राह्मण समाज-4.50
भोजपुरी समाज-04
कायस्थ समाज-03
मराठी समाज-03
मलयाली समाज-1.50
जैन समाज-01 लाख
(संख्या लाख में, समाजों के पदाधिकारियों के अनुसार)