
new transfer policy: लंबे इंतजार के बाद मोहन कैबिनेट ने मंगलवार को तबादला नीति 2025 को मंजूरी दे दी। 1 मई से तबादलों की प्रक्रिया शुरू होगी, जो 30 दिन चलेगी। पहली बार 3 की जगह चार स्लैब बनाए हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में तबादला करने के दायरे को 2 से 3 फीसद तक बढ़ाया है। पिछली बार की तरह इच्छुक विभागों को अलग नीति बनाने और उस अनुरूप तबादले की छूट भी दी है।
वहीं कैबिनेट ने कर्मचारियों को बढ़े डीए के एरियर की राशि का पांच किस्तों में भुगतान और केंद्र सरकार के समान एकीकृत पेंशन योजना लागू करने के लिए वरिष्ठ स्तर प्रक्रिया निर्धारण समिति के गठन के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। तबादला नीति, डीए और पेंशन संबंधी प्रस्तावों से 7.50 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
मोहन सरकार केंद्र की तरह मध्यप्रदेश में भी एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) लागू करने पर आगे बढ़ी है इसके लिए राज्य स्तरीय समिति गठन किया है, जिसके अध्यक्ष एसीएस अशोक बर्णवाल होंगे। यह यूपीएस लागू करने की प्रक्रिया तैयार कर सरकार को पेश करेगी।
कर्मचारियों को वर्तमान में 50 फीसद महंगाई भत्ते का लाभ मिल रहा था, अब पांच प्रतिशत डीए बढ़ने से उन्हें अब 55 प्रतिशत डीए मिलने लगेगा। कर्मचारियों को एक जुलाई 2024 से 3 प्रतिशत एवं एक जनवरी 2025 से 2 प्रतिशत डीए मंजूर किया गया है। इस तरह उनका डीए 5 प्रतिशत बढ़ा है। एरियर का भुगतान जून 2025 से अक्टूबर 2025 तक पांच किश्तों में किया जाएगा। पांच प्रतिशत डीए बढ़ने से सरकार के खजाने पर 3500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।
पांच किस्तों में मिलेगा एरियर कर्मचारियों को बढ़े हुए 3 और 2 फीसद महंगाई भत्ते के एरियर की राशि का भुगतान पांच कि स्तों में किया जाएगा। ये किस्त जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर व अक्टूबर 2025 में मिलेंगी।
कैबिनेट में तय किया कि 30 मई की रात 12 बजे तक हर हाल में विभागीय मंत्री, प्रभारी मंत्री और विभाग प्रमुखों को कर्मचारियों के प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता और पात्रता के आधार पर निर्णय लेकर अनुशंसा पत्र जारी करने होंगे, ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत जारी किए अनुशंसा पत्र ही मान्य होंगे।
पति-पत्नी से जुड़े ऐसे मामले, जिनमें दोनों में से कोई एक किसी अन्य स्थान पर सेवाएं दे रहे हैं तो उन्हें एक ही स्थान पर सेवा देने के अवसर मिल सकें। पात्रता रखने वाले दिव्यांग कर्मचारियों को सामान्य पात्र कर्मचारियों की तुलना में पहली प्राथमिकता दी जाएगी। बीमार कर्मचारी और उसके परिवार के बीमार सदस्य की स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर वरीयता दी जाएगी।
पिछली तबादला नीति में 3 स्लैब थे, नई नीति में 4 होंगे। यदि किसी विभाग के किसी संवर्ग में 200 पद भरे होंगे तो उसमें से 20% कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे। इस तरह 201 से 1000 पद भरे होने पर 15 प्रतिशत, 1001 से 2000 पद भरे होने पर 10 प्रतिशत और 2001 से अधिक पद भरे होने पर उनमें से 5 प्रतिशत कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे। इस स्लैब को कोई तोड़ नहीं सकेंगे। पुरानी नीति में एक स्लैब 201 से 2000 का होता था, जिसमें से 10 फीसद कर्मचारियों के ही तबादले करने की अनुमति थी, अब इसे दो हिस्सों में बांटा है।
विभागीय मंत्री : एक से दूसरे जिले में होने वाले तबादलों से जुड़े आवेदनों पर निर्णय लेंगे। तबादले के लिए अनुशंसा पत्र जारी करेंगे।
प्रभारी मंत्री : जिले के अंदर तबादलों से जुड़े आवेदनों पर निर्णय लेंगे।
विभाग प्रमुख : कुछ मामलों में आवेदन विभाग प्रमुखों के पास आएंगे, जो विभागीय मंत्री, प्रभारी मंत्रियों द्वारा निराकरण के लिए भेजे जाएंगे।
Updated on:
07 Oct 2025 10:44 pm
Published on:
30 Apr 2025 01:38 pm
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