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दुनिया की सबसे बड़ी शंकराचार्य की प्रतिमा मध्यप्रदेश में लगेगी, कई धर्मगुरुओं ने बैठकर तय की रणनीति

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास का गठन, यही तय करेगा कि कैसे वेदांत पीठ और प्रतिमा की स्थापना हो

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Swami

भोपाल. दुनिया की सबसे बड़ी शंकराचार्य प्रतिमा की स्थापना मध्यप्रदेश के ओंकरेश्वर में होगी। इसकी कार्ययोजना के लिए सरकार ने आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास का गठन किया है। जिसमें देश के प्रमुख धर्मगुरुओं को शामिल किया है। जबकि श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य को उसका मुख्य मार्गदर्शक नियुक्त किया है। यह न्यास प्रतिमा की स्थाना से लेकर वेदांत पीठ और दूसरी गतिविधियों को पूरा करने की रणनीति पर काम करेगा। इस न्यास की पहली बैठक सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर हुई। जिसमें कई नीतियों पर चर्चा भी हुई।

दरअसल, सरकार ने एकात्म यात्रा शुरू की थी, जिसमें आदि शंकराचार्य की 108 फुट की प्रतिमा की स्थापना ओंकारेश्वर में करने के लिए पूरे प्रदेश से अष्टधातु को इकठ्ठा करने का अभियान चलाया था। जिसमें कई लोगों ने सोना से लेकर दूसरी धातुएं दान की थीं। यात्रा का समापन हो गया है और अब प्रतिमा की स्थापना के साथ—साथ वहां पर वेदांत पीठ बनाने पर भी सहमति बनी है। जिसका उद्देश्य है कि आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत को पूरी दुनिया के सामने लाया जा सके।

यह लोग हैं न्यास समिति में
न्यास समिति में जिन लोगों को जगह दी गई है, उसमें जूना अखाड़े के स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, चिन्मय मिशन से जुड़े स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज, परमात्मानंद सरस्वती जी, स्वामी संवित सोमगिरी जी महाराज, स्वामी हरिब्रह्मोद्रानंद जी महाराज, विवेकानंद केंद्र की निवेदिता रघुनाथ भिड़े, संघ से जुड़े मुकुल कानिटकर हैं। जबकि श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य को उसका मुख्य मार्गदर्शक नियुक्त किया है।

ओमकारेश्वर में ही क्यों होगी प्रतिमा
न्यास के सदस्य और लालेश्वर महादेव मंदिर के महंत स्वामी संवित सोमगिरी जी महाराज ने बताया कि करीब 1200 वर्ष आदि शंकराचार्य जी का आदुर्भाव हुआ था। उन्होंने ओमकारेश्वर में करीब चार वर्ष रहकर अपने गुरु के सानिध्य में अपनी साधना पूरी की थी। यही वजह है कि यहां पर उनकी प्रतिमा की स्थापना होनी चाहिए। उनका जो दर्शन था, जिसमें अद्वैत वेदांत दर्शन को पूरी दुनिया को बताने की जरूरत है। उनका दर्शन सभी के पास पहुंचे यही हमारी कोशिश है। इसे सभी तक पहुंचाने की कोशिश न्यास करेगा। हम इसके बारे में बैठकर रणनीति बनाएंगे। हमारी कोशिश होगी कि हम नए युग में सभी का मार्गदर्शन करें।