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एमपी गजब है: 48 लाख खर्च कर ऐसी सड़क बनाई जिसे झाडू से बटोर दें

- मंत्री भार्गव ने 7 दिन में मांगा जवाब अधिकारी ने 70 दिन बाद भी नहीं दिया - पीडब्ल्यूडी विभाग की सड़कों में पोता जा रहा भ्रष्टाचार का डामर - अंधेरगर्दी: 4 किमी की सड़क बनाकर कर दिया 4.9 किमी का भुगतान - मंत्री के गृह जिले में करोड़ों की लागत से बनी सड़क कुछ महीनों में उधड़ गई

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डिंडोरी जिले में 48 लाख रूपए खर्च कर ऐसी रोड तैयार की गई है।

भोपाल@रूपेश मिश्रा

जिस लोक निर्माण विभाग पर जनता को सुगम एवं सुरक्षित यातायात मार्ग देने का जिम्मा है। अगर वही लोक निर्माण विभाग भ्रष्टाचार का पथ बनाने में मशगूल हो जाए तो सोचिए हालात कैसे होंगे। दरअसल डिंडोरी जिले के आदिवासी अचंल में पीडब्ल्यूडी विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने गाड़ासरई- बछरगांव रोड को बनाने के लिए विभाग ने दिसंबर 2022 में करीब 48 लाख रूपए फूंक दिए, जिसे हाथ से खरोंच कर झाडू से बटोरा जा सकता है। अंदाजा लगाइए भ्रष्टाचार का डामर किस कदर लगाया होगा। जबकि इस रोड पर ज्यादा वाहनों का आवागमन भी नहीं है। सिर्फ कारगुजारी इतनी ही नहीं है बल्कि 4 किलोमीटर सड़क निर्माण करवाकर विभाग के अधिकारियों ने करीब एक किलोमीटर यानी का ठेकेदार को फर्जी पेमेंट कर दिया।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क की मंजूरी फिर भी मरम्मत कार्य

सरकार ने इस मार्ग को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत नई सड़क बनाने की मंजूरी दे रखी है। लेकिन इसके बावजूद विभाग के अधिकारी मलाई काटने के लिए इन मार्गों पर मरम्मत के नाम पर लाखों रूपए का गबन कर रहे हैं।

गोपाल भार्गव के जांच का पत्र अधिकारियों पर बेअसर

इस पूरे भ्रष्टाचार की आंच मंत्री गोपाल भार्गव के बंगले तक पहुंची तो मंत्री ने 25 जनवरी को विभाग के जबलपुर क्षेत्र के मुख्य अभियंता एससी वर्मा को पूरे भ्रष्टाचार को लेकर पत्र लिखा। जिसमें मंत्री ने प्रभारी कार्यपाल यंत्री संतोष ठाकुर को लेकर लिखा था कि मनमाने ढंग से बजट आवंटन, आवंटित राशि का दुरूपयोग, शहपुरा- बरोधा मार्ग के अनुबंध में शासन को हानि पहुंचाने, गाड़ासरई- बछरगांव बोना मार्ग में गुणवत्ता विहीन डामर कार्य और बगैर कार्य किए भुगतान किया है। जिसकी जांच कर 7 दिन में प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। लेकिन 3 महीने बीत जाने के बाद भी मंत्री को प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि संभाग के सभी बड़े अधिकारी कुछ दिनों के लिए भोपाल गए थे उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में है।

मुख्य अभियंता से पूछा सवाल तो करने लगे गुमराह

जबलपुर क्षेत्र के मुख्य अभियंता एससी वर्मा से जब मंत्री के पत्र और फर्जी भुगतान को लेकर सवाल पूछा तो वो गुमराह करने लगे। पहले कहने लगे मुझे जानकारी ही नहीं है और बाद में कहने लगे मंत्री का पत्र मिला है जबाव तैयार करवा रहा हूं। जल्द जवाब दिया जाएगा। अब सवाल है कि मंत्री के 25 जनवरी का पत्र जिसका जवाब 7 दिन में देना था उसका जवाब अभी अधिकारी तैयार करवा रहे हैं। इस पता चलता है कि मंत्री के पत्र को लेकर अधिकारी कितान गंभीर हैं।

जरूरत पड़ी तो भोपाल से टीम बनाकर भेजेंगे

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता नरेंद्र कुमार से जब इस बारे में सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि आपके माध्यम से मुझे इसकी जानकारी मिली है। मंत्री के पत्र का अधिकारी ने जवाब क्यों नहीं दिया इसकी भी मुझे जानकारी नहीं है। मामले की जांच करवाएंगे और जरूरत पड़ी तो भोपाल से टीम बनाकर भेजेंगे।

मंत्री के गृह क्षेत्र की सड़कों में भी लग रहा भ्रष्टाचार का डामर

सड़क बनते ही उखड़ गई
अन्य जगहों को छोड़ दीजिए लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव के गृह क्षेत्र में ही विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार युक्त सड़के बना रहे हैं। गढ़ाकोटा से 28 किलोमीटर दूर सेमरा तिराहा से बम्होरी चौथा तक विभाग ने 4 किलोमीटर का मार्ग बनाया लेकिन 6 माह में ही इस सड़क की धज्जियां उड़ने गली। बता दें रोजाना इस मार्ग से हजारों लोगों का आना जाना है।

शर्मनाक..करोड़ों की लागत से बनी सड़क दो साल भी नहीं चलती

लोक निर्माण विभाग ने खंडवा जिले में पाच साल के भीतर 13 छोटी- बड़ी सड़कों का निर्माण किया है। लेकिन जानकर हैरानी होगी की ज्यादातर सड़कें गारंटी पीरियड में ही उखड़ने लगीं। पंधाना क्षेत्र में कालमुखी से हिरापुर सड़क मार्ग की लंबाई 2.60 किलोमीटर है। जिसका टेंडर जुलाई 2018 में हुआ था। इसकी लागत 1.37 करोड़ है। कार्यपूर्ण 18 फरवरी 2019 को करना था। लेकिन सड़क नवंबर नवंबर 2020 में तैयार हो पाई। लेकिन इसके बावजूद गारंटी पीरियड में ही सड़क उखड़ने लगी। इसी तरह जावर बायपास मार्ग 0.56 किमी मजबूतीकरण विभाग ने 49 लाख खर्च कर दिए। जिसका कार्य 2021 में पूरा हुआ लेकिन पूरी सड़क में अब गढ्ढे- गढ्ढे हो गए।