
Chhattisgarh Monsoon 2026 मानसून। (फोटो सोर्स- पत्रिका)
MP Monsoon Update: मध्य प्रदेश के लोग इन दिनों तीन तरह के मौसम की मार झेल रहे हैं। कभी तेज गर्मी-धूप, कभी मौसम में नमी के कारण बनने वाली उमस और कभी तूफानी हवाओं के साथ तेज बारिश का दौर। दिनभर पसीने में बेहाल लोगों को शाम को आंधी-बारिश के चलते कुछ राहत मिलती है। लेकिन यह ज्यादा देर तक नहीं टिकती। बारिश बंद होते ही लोग उमस से परेशान होने लगते हैं और खुद से ही सवाल कर बैठते हैं कि आखिर कब जाएगी गर्मी और मानसून कब आएगा। जानने के लिए यहां पढ़ें पूरी खबर…
मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र के ऊपर पहुंच गया है। वहां से वह मध्य प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून एक्टिविटीज के बीच कोई रुकावट नहीं आई, तो मध्यप्रदेश में समय पर बरसेगी राहत वाली बारिश, नहीं होगी देरी।
कृषि महाविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एके श्रीवास्तव के मुताबिक सामान्य तौर पर दक्षिण पश्चिम मानसून मध्य प्रदेश के दक्षिणी या जबलपुर संभाग के जिलों बालाघाट, मंडला, सिवनी आदि से होते हुए मध्य प्रदेश में एंट्री करता है। मानसून का यह आगमन 12 से 15 जून के आसपास ही आने की संभावना रहती है। इसके बाद 20-25 जून तक अधिकांश प्रदेश में छा जाता है।
इस बार 2026 में मानसून 4 जून को केरल पहुंचा, जो सामान्य तौर पर एक जून को पहुंचना था। लेकिन वह 3 दिन की देरी से पहुंचा है। ऐसे में मध्य प्रदेश में भी मानसून की सामान्य तिथि पर या फिर कुछ देरी से मध्य प्रदेश पहुंच सकता है। लेकिन मौसम विभाग की मानें तो, मानसून पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है और जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो अनुमान है कि 12 से 18 जून के बीच मानसून की प्रदेश में एंट्री हो सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक मानसून की वर्तमान प्रगति और कई मौसम प्रणालियां एक साथ एक्टिव हैं। कुल मिलाकर प्री मानसून की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। यदि ये गतिविधियां जारी रहीं तो मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री तय समय पर हो सकती है।
बता दें कि प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री जबलपुर से होती है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून इंदौर और जबलपुर संभाग से प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर ला सकता है। वह छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बालाघाट, बैतूल, बड़वानी, खरगोन या बुरहानपुर जिलों से होता हुआ प्रदेश भर में छा जाएगा। बताते चलें कि जबलपुर ऐसा संभाग है, जहां मानसून की बारिश बहुत अच्छी होती है। यही कारण है कि अच्छी बारिश का रिकॉर्ड भी जबलपुर के नाम पर ही दर्ज है। वर्ष 2016 से 2025 तक के रिकॉर्ड बताते हैं कि कोटे की 30 फीसदी बारिश जून में ही दर्ज की गई है। इसका कारण यहां से मानसून की एंट्री है। इसीलिए यहां मानसून की शुरुआत में ही शानदार बारिश दर्ज की जाती है। वहीं यही बड़ा कारण भी है कि जबलपुर के पास बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड भी है। यह रिकॉर्ड वर्ष 1998 का है, जब एक महीने में यहां करीब 30 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
मौसम विभाग के मुताबिक इस बार जुलाई-अगस्त में अल नीनो के 85 फीसदी तक एक्टिव होने की संभावना है। जिससे मानसून के कमजोर होने की भी बात कही जा रही है। इसके असर से इस बार मौसम वैज्ञानिक सामान्य बारिश की संभावना जता रहे हैं। डॉ. एके श्रीवास्तव के मुताबिक अलनीनो का असर एमपी मानसून पर भी दिखाई दे सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के मुताबिक अल नीनो के णसर से एमपी में इस बार भले ही बारिश सामान्य रहे, लेकिन बारिश के दिनों की संख्या घट सकती है। जुलाई अगस्त जैसे पीक सीजन में लंबे ड्राई स्पेल आ सकते हैं। कुछ जिलों में बहुत ज्यादा बारिश, तो कुछ में कम बारिश जैसी असमानता वाली स्थितियां बन सकती हैं।
इधर मौसम के रुख को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. श्रीवास्तव ने प्रदेश के किसानों को सलाह दी है कि वह खरीफ फसल की बुवाई के लिए खेत की तैयारी शुरू करने के लिए मानसून का इंतजार न करें। मानसून से पहले की बारिश का उपयोग खेत तैयार करने के लिए करें, लेकिन सोयाबीन, उड़द, मूंगफली और मूंग की मुख्य बुवाई 20 जून के बाद 2-3 अच्छी बारिश होने तक रोक दें।
Updated on:
09 Jun 2026 10:36 pm
Published on:
09 Jun 2026 05:17 pm
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