scriptMP News: नौरादेही के बाद अब टाइगर स्टेट एमपी में यहां होगा 8वां टाइगर रिजर्व | MP News After Nauradehi now Tiger State MP will have its 8th Tiger Reserve near Bhopal Rata Pani Tiger Reserve | Patrika News
भोपाल

MP News: नौरादेही के बाद अब टाइगर स्टेट एमपी में यहां होगा 8वां टाइगर रिजर्व

MP News: वाइल्डलाइफ को करीब से जानने का मिजाज रखने वालों के लिए ये बड़ी खुशखबरी है, क्योंकि 7 टाइगर रिजर्व में घूमने के बाद जल्द ही उन्हें टाइगर स्टेट एमपी में 8वें टाइगर रिजर्व में दिन गुजारने का मौका भी मिल सकता है..

भोपालJun 12, 2024 / 11:14 am

Sanjana Kumar

Tiger Reserve in MP
MP News: राजधानी से सटे रातापानी वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने के रास्ते पिछले 16 साल में दूसरी बार खुले हैं। मंगलवार को हुई राज्य स्तरीय वन्यप्राणी बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मौखिक सहमति देते हुए कहा कि रिजर्व बनाने की जो प्रक्रिया चल रही है, उसे जल्द पूरा किया जाए। इसमें प्रत्येक स्तर पर नियमों का पालन हो। अगर सबकुछ योजना के तहत हुआ तो जल्द ही टाइगर स्टेट एमपी में एक और टाइगर रिजर्व होगा। बता दें कि नौरादेही के बाद ये एमपी का 8वां टाइगर रिजर्व होगा।
एमपी के मुख्यमंत्री ने कहा कि जो गांव बाहर शिफ्ट करने बाकी है, उन गांव वालों के मन में यदि कोई संशय हो तो उन्हें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से बाहर बसाए गए गांवों को दिखाएं, जहां सरकार ने सभी मापदंडों को पूरा करते हुए बेहतर सुविधाएं दी है। असल में अधिकारियों ने बोर्ड बैठक में रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाए जाने की जारी प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट रखी थी। जिसका अध्ययन करने के बाद सीएम ने ये बातें कही।

रातापानी की औबेदुल्लागंज-रायसेन तक सीमा

पहली बार कांग्रेस की कमल नाथ सरकार के कार्यकाल में रातापानी को रिजर्व बनाने की कवायद तेज हुई थी। उसके पहले और तब से लेकर अब यह पहला मौका है, जब रातापानी को रिजर्व बनाने पर सरकार सहमत हुई है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने 2008 में रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने की सैद्धांतिक सहमति दी थी।
2019 में वन विभाग ने प्रत्येक स्तर पर मंथन करने के बाद इसकी सीमा भी निर्धारित कर कर 8 राजस्व व 3 वनग्रामों को बाहर शिफ्ट करने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। जिस पर कभी सहमति नहीं बनी। रातापानी भोपाल के वन क्षेत्र से सटा है, वहां भ्रमण करने वाले बाघ, भोपाल के जंगलों तक आते रहे हैं। अभी यह अभयारण्य है और इसकी सीमा औबेदुल्लागंज, रायसेन से भी लगती है।

मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

बैठक में नर्मदापुरम से बैतूल के बीच वन भूमि पर तीसरी रेल लाइन को लेकर भी सहमति दी। वहीं भोपाल के पास रातापानी अभयारण्य के बमनई जीपी से देलावाड़ी तक मार्ग के किनारे राइट-ऑफ-वे में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने, माधव राष्ट्रीय उद्यान में पेयजल पाइप लाइन का काम करने जैसे प्रस्तावों पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश के वन क्षेत्र में दुर्लभ व लुप्तप्राय: प्रजातियों के वन्य प्राणियों को लाने की संभावनाओं का अध्ययन कराया जाए। जंगली जानवरों से जान-माल की रक्षा के उपाए करें। वन्यप्राणियों के लिए हर संभाग में रेस्क्यू सेंटर जल्द शुरू किए जाएं।

एमपी में हैं सबसे ज्यादा 7 टाइगर रिजर्व

बता दें कि मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा यूं ही नहीं मिला है। यहां टाइगर की संख्य़ा देश में सबसे ज्यादा है, तो टाइगर रिजर्व भी देश में सबसे ज्यादा यहीं है। यही नहीं देश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व का तमगा भी एमपी के ही नाम है। मध्य प्रदेश में 7 टाइगर रिजर्व में सतपुड़ा, पन्ना, पेंच, कान्हा, बांधवगढ़, संजय दुबरी, नौरादेही का नाम शामिल है।

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