
new bypass will build cost of Rs 3225 crore reducing 90-minute journey to just 20 minutes (demo pic)
mp news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए भोपाल शहर के बाहर से ही एक फोर-लेन पश्चिमी बायपास बनाया जाएगा। 31.61 किमी लंबे इस बायपास को बनाने में 3225 करोड़ रुपये की लागत आएगी। ये फोरलेन बायपास मंडीदीप रतनपुर मार्ग से कोलार-रातीबड़, फंदाकलां होते हुए भोपाल-देवास मार्ग पर फंदा तक बनाया जाएगा। इसके बनने के बाद भोपाल शहर में बढ़ रहे यातायात के दबाव से निजात मिलेगी।
भोपाल शहर के बाहर मंडीदीप रतनपुर मार्ग से कोलार-रातीबड़ होते हुए भोपाल-देवास मार्ग पर फंदा तक बनने वाले 31.61 किमी लंबे पश्चिमी बायपास का सबसे ज्यादा फायदा जबलपुर-बैतूल की ओर से आकर इंदौर जाने वाले वाहनों को होगा। इन वाहनों को बायपास बनने के बाद दोनों ही तरफ से आते-जाते वक्त भोपाल शहर से नहीं गुजरना होगा और वो शहर के बाहर से ही निकल जाएंगे। इससे सफर आसान तो होगा ही साथ ही अभी जो सफर 90 मिनट में पूरा होता है उसे पूरा करने में महज 20 मिनट का समय लगेगा। शहर में इन वाहनों के प्रवेश न करने से यातायात का दबाव भी कम होगा।
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक बुधवार को सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक में भोपाल के पश्चिमी बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट का अनुमोदन किया गया। इसके साथ ही इंदौर- उज्जैन और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग का भी कुछ बदलाव के साथ अनुमोदन किया गया।
भोपाल के पश्चिम बायपास के संशोधित एलाइनमेंट के आधार पर तेजी से काम कराने को लेकर चर्चा हुई। तय हुआ, रातापानी वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित करने और भोज वैटलैंड को देखते हुए बायपास के अलाइनमेंट में बदलाव किया था, इसलिए पूर्व की जिन शर्तों के आधार पर टेंडर हुए थे, उस पर आगे बढ़ना ठेकेदार के लिए संभव नहीं था। इसके कारण काम में देरी की वजह ठेकेदार नहीं है। अब यदि बदले हुए अलाइनमेंट को आधार बनाकर नया टेंडर करते हैं तो प्रक्रिया में एक साल लगेंगे। इसलिए ठेकेदार की सहमति के आधार पर पूर्व में हो चुके टेंडर के आधार पर ही काम शुरू किया जाए।
किसानों की मांग पर मोहन सरकार ने इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के निर्माण का मॉडल बदल दिया है। अब ये मार्ग नॉन एक्सेस कंट्रोल मॉडल पर बनेंगे। अर्थात अब इन सड़कों पर कहीं से भी वाहनों की प्रवेश व निकासी हो सकेगी। पूर्व में ये दोनों मार्ग एक्सेस कंट्रोल मॉडल पर बनने थे। इसमें चुनिंदा पॉइंट से ही मार्ग पर प्रवेश व निकासी हो सकती थी। इस मॉडल पर किसानों की आपत्तियों के मद्देनजर सीएम डॉ. मोहन यादव ने मप्र सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के संचालक मंडल की बैठक में यह निर्णय लिया। इसमें पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह, सीएस अनुराग जैन व अन्य मौजूद रहे।
Published on:
02 Apr 2026 05:34 pm
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