
MP UCC BIll BJP Advice to UCC Committee: एमपी में यूसीसी को लागू करने की तैयारी जारी। बीजेपी ने रखे सुझाव। (फोटो सोर्स: डॉ. मोहन यादव एक्स हैंडल)
MP UCC Bill: मध्यप्रदेश में अब तक भाजपा एकमात्र राजनीतिक दल रहा है, जिसने यूसीसी का खुलकर समर्थन किया। सोमवार को यूसीसी कमेटी के सामने प्रशासन अकादमी में प्रदेश भाजपा निर्वाचन आयोग समन्वय विभाग के संयोजक एसएस उत्पल व प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने पार्टी की ओर से कई सुझाव रखे। प्रदेश भाजपा की ओर से कहा गया कि सभी के लिए एक समान कानून होना ही चाहिए।
इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने जो कदम उठाए हैं, वे स्वागत योग्य है। यह भी दोहराया कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकारी और गोद लेने जैसी प्रक्रियाएं सभी के लिए एक समान (MP UCC Bill MP BJP) हो। विवाह, तलाक व गुजारा-भत्ता जैसे प्रकरणों के निपटारे अधिकतम 6 महीने में हो, इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था हो। सभी के लिए विवाह पंजीयन कराना और विवाह की तय उम्र का पालन कराना अनिवार्य किया जाए। हालांकि भाजपा ने जो सुझाव दिए, उनमें से कई बातें पहले ही यूसीसी की उच्च स्तरीय समिति द्वारा तैयार मसौदे में है।
सुनवाई के दौरान उच्च स्तरीय समिति के सदस्य और उत्तराखंड के सेवानिवृत मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और अधिवक्ता डॉ शोभा वेथनकर, समाजसेवी अनूप नायर व बुद्ध पाल सिंह और सरकार की ओर से सदस्य सचिव अजय कटेसरिया मौजूद रहे।
समिति के सामने बाल संरक्षण आयोग, मानव अधिकार आयोग, राज्य महिला आयोग, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग, जनजाति आयोग के प्रतिनिधि और वनवासी विकास संघ की ओर से भी सुझाव (MP UCC Bill Advice) दिए गए।
-कुछ लोग है जो तय उम्र में विवाह न करके कम उम्र में करते हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। सभी के लिए विवाह पंजीयन अनिवार्य (MP UCC Bill 2026) हो। जो भी तय उम्र से पहले विवाह करते हैं, उनके विवाह अमान्य घोषित किए जाएं, उन्हें लाभों से वंचित रखा जाए।
- पैतृक और स्व अर्जित संपत्ति में बेटे और बेटी को बिल्कुल समान अधिकार देने का प्रस्ताव है। पति-पत्नी के अधिकार, जीवन साथी की मृत्यु के बाद संपत्ति पर जीवित साथी के अधिकारों को सुरक्षित और एक समान करने का प्रावधान है। वसीयत करने के नियमों को सभी के लिए एक जैसा किया जाए।
- गोद लिए गए बच्चे को भी जैविक बच्चे के समान संपत्ति व परिवार के अन्य अधिकार मिले। तलाक के बाद पत्नी, बच्चों व बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण के लिए एक समान और न्यायसंगत नियम तय करने होंगे।
- विवाह के आवेदन, गोद लेने की प्रक्रिया और वसीयत को प्रमाणित करने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल होना चाहिए, ताकि अदालतों पर भार कम हो सके।
- विवाह के बाद डिजिटली विवाह प्रमाण पत्र जारी किया जाए, जो सभी सरकारी व वित्तीय कामों के लिए मान्य हो।
- यदि बुजुर्ग माता-पिता की बच्चे देखभाल नहीं करते तो संपत्ति हस्तांतरण को रद्द करने और भरण-पोषण भत्ता सीधे बच्चों की आय से काटने के प्रावधान हो।
- माता-पिता की संपत्ति में दिव्यांग बच्चों के हिस्से और उनकी आजीवन सुरक्षा के लिए ट्रस्ट या विशेष कानूनी सुरक्षा के प्रावधान होने चाहिए।
- विवाह के बाद पति-पत्नी द्वारा खरीदी गई किसी भी संपत्ति पर तलाक की स्थिति में दोनों का 50-50 का प्रतिशत का समान अधिकार होना चाहिए, ताकि घरेलू महिलाएं तलाक के बाद बेघर या बेसहारा न हो।
- विवाह, तलाक या गुजारे भत्ते से जुड़े पारिवारिक विवादों का निपटारा अधिकतम 6 महीने के भीतर करने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक एवं फैमिली कोर्ट अनिवार्य (MP UCC Bill Rules) किए जाएं, ताकि मानसिक व आर्थिक शोषण रुक सके।
Updated on:
23 Jun 2026 10:32 am
Published on:
23 Jun 2026 10:32 am
