
भोपाल। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक रामेश्वर शर्मा को विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर (protem speaker) बनाया गया है। यह नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष की नियुक्ति तक रहेगी।
मध्यप्रदेश विधानसभा के सामयिक अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे जगदीश देवड़ा की ओर से दो जुलाई को अपने पद से त्याग पत्र दे दिया है। देवड़ा ने हाल ही में मध्यप्रदेश के मंत्री के रूप में शपथ ली है। अध्यक्ष का पद रिक्त होने की स्थिति में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। इसके अलावा विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त है।
राज्यपाल की ओर से संविधान के अनुच्छेद 180 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए रामेश्वर शर्मा को अध्यक्ष के निर्वाचन तक अध्यक्ष पद के कर्तव्यों के निर्वहन के लिए नियुक्त किया गया है।
मंत्री पद नहीं मिल पाया
इससे पहले मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाने वाले हुजूर विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई थी। माना जा रहा है कि उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए यह पद सौंपा गया है।
आनंदीबेन पटेल लखनऊ रवाना
इधर खबर है कि मध्यप्रदेश की प्रभारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शनिवार को लखनऊ के लिए रवाना हो गई हैं। वे मंत्रिमंडल विस्तार के लिए मध्यप्रदेश आई थीं और उन्हें मध्यप्रदेश राज्य का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। आनंदीबेन वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल है। मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के अस्वस्थ होने के बाद प्रदेश का प्रभार आनंदीबेन पटेल को दिया गया था।
कई बार सुर्खियों में रहे रामेश्वर शर्मा
हुजूर विधानसभा से भाजपा के विधायक रामेश्वर शर्मा कई बार अपने विवादित बयानों से सुर्खियों में रह चुके हैं। कई बार विवादों में आए रामेश्वर हुजूर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा अपने बयानों से हमेशा ही विवादों में रहते हैं। पिछले साल ही उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान सिंधी समाज के लिए अमर्यादित टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद उन पर बैरागढ़ थाने में एफआईआर दर्ज हो गई थी। इसके पहले भी शर्मा के आडियो वायरल हो चुके हैं, जिसमें वे किसी अधिकारी से बहस करते कर रहे थे।
कौन होता है प्रोटेम स्पीकर
-प्रोटेम स्पीकर किसी सीनियर विधायक को बनाया जाता है। उसे सदन चलाने के लिए महत्वपूर्ण नियमों का ज्ञान होना चाहिए।
-विधायक की छवि एक साफ-सुथरे ईमानदार सदस्य की होना चाहिए।
-प्रोटेम स्पीकर के पास स्थाई स्पीकर जैसे अधिकार नहीं होते।
-सदन को भंग करने जैसे अति-महत्वपूर्ण निर्णय प्रोटेम स्पीकर की ओर से नहीं लिए जा सकते।
-ये प्रोटेम स्पीकर पर निर्भर करता है कि वो बहुमत साबित करने के लिए वोटिंग में कौन से तरीकों का इस्तेमाल करे।
Updated on:
04 Jul 2020 03:07 pm
Published on:
04 Jul 2020 02:42 pm
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