1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

संगीत और योग एक ही सिक्के दो पहलू

भारत भवन में विश्व संगीत और योग दिवस पर योग नाद का आयोजन  

2 min read
Google source verification
yog

मंत्री स्वाती सिंह ने प्रतापगढ़ में किया योगा।

भोपाल। भारत भवन में विश्व योग व विश्व संगीत दिवस के अवसर पर योग नाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। द योग इंस्टीट्यूट मुंबई की निदेशक हंसा ने योग विषय पर व्याख्यान दिया तो पंडित शिवकुमार शर्मा और राहुल शर्मा ने संतूर पर जुगलबंदी पेश की। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राग जन सम्मोहिनी से कर शहर की फिजा में संतूर की स्वरलहरियों को गूंजा दिया।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि संगीत और योग एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों का ही मानव जीवन में अमूल्य योगदान हैं। एक संगीत आपको बर्हिमुखी करता है, इंद्रियों को आकर्षित करता है। एक अंतरमुर्खी करता है। संगीत में नौ रसों की अपनी खूबी है। हम इन्हीं में से किसी सूक्ष्म रस को हम चुनते है। मैं खुद भी अपने अंर्तमन में अनुभव करता हूं और श्रोताओं को भी इसे अनुभव कराने की कोशिश करता हूं। उनके साथ तबले पर रामकुमार मिश्रा और तानपुरे पर ताका हीरो ने संगत दी।

मेडिटेशन बुद्धि और विवेक को जोड़ता है

द योग इंस्टीट्यूट मुंबई की निदेशक हंसा जयदेव ने जीवन में योग का महत्व बताते हुए एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि आप माउंट एवरेस्ट पर चढ़ रहे हैं। कुछ दूर आसानी से चलते हुए चढ़ाई चढऩा शुरू किया। सुबह से दोपहर, दोपहर से शाम और रात हो गई है। अचानक आपका पैर फिसल जाता है और आप गहराई में गिरते जा रहे हैं। आप ईश्वर को याद करते हैं।

ईश्वर रस्सी काटने को कहता है तो डर जाते हो। रस्सी नहीं काटते, आप मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। सुबह रेस्क्यू टीम आपको जमीन से मात्र 10 फीट की ऊंचाई पर पाती। यह किस्सा हर एक व्यक्ति के जीवन का है। उन्होंने कहा कि, मन की वृत्तियों पर काबू पाना ही योग है। जबकि आजकल लोग विभिन्न् प्रकार के आसन और कष्टकारी प्रक्रियाओं को योग मानने लगे है। हाल ही में इस इंस्टीट्यूट को प्रधानमंत्री योग पुरस्कार मिलने की घोषणा की गई है।

खुद के लिए निकालें समय
उन्होंने कहा कि अपने लिए और अपनों के लिए समय निकालना सीखें। जब भी मौका मिले आंखे बंद कर अपने आप को खोजें। सोएं नहीं सोना अलग प्रक्रिया है। अपनी पांचों इंद्रियों को एक जगह रख कर मेडीटेशन करें। बुद्धि का उपयोग करें और छोड़ दें, समर्पित होना सीखें। बुद्धि से परे उठें।

मनोविज्ञान, दर्शन (लक्ष्य से अविचल) और योग आसन इन तीनों को जीवन में शामिल करें। योग शास्त्र कहता है कि आप चीजों को महसूस करना सीखे। योग साइकोलॉजी, फिलोसफी और आसन/प्राणायाम का मिश्रण है। भावनाओं पर काबू रखना सीखने से जीवन में पॉजिटिविटी आती है।