
Nagpanchami Puja Vidhi Nagchandreshwar Mandir Nag Puja Vidhi
भोपाल. सावन शुक्ल पंचमी के दिन प्रतिवर्ष नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान शेष का प्राकट्य हुआ था। इस दिन घर की दीवार पर गोबर अथवा मिट्टी से नागदेव का चित्र बनाकर उसकी पूजा अर्चना की परंपरा है। प्राय: मृत्यु के भय से मुक्ति, कालसर्प दोष या नागदोष आदि के निवारण के लिए नाग देवता की पूजा की जाती है।
इस बार 13 अगस्त यानि शुक्रवार को नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। माना जाता है कि इस दिन नागपूजा करने से नागदोष से मुक्ति मिलती है और आयुष्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। सनातन धर्म में नाग यानि सांपों की प्रारंभ से ही पूजा की जाती रही है।
नागपंचमी के दिन जहां नाग पूजा का विशेष महत्व होता है वहीं इस दिन कुछ कार्य प्रतिबंधित भी किए गए हैं। इस दिन नुकीली या धारदार वस्तुओं के इस्तेमाल की मनाही की गई है। नागपंचमी पर किचन में तवा या कढ़ाही चढ़ाना भी प्रतिबंधित है। इसके साथ ही नाग पंचमी के दिन खेत में हल चलाना या जमीन की खुदाई करना भी प्रतिबंधित किया गया है।
घर में पूजा पाठ के साथ ही आमतौर पर नागपंचमी के दिन नागों को दूध पिलाया जाता है, लेकिन यह गलत है।धर्मग्रंथों के अनुसार तो नागपंचमी के दिन जीवित सांप की पूजा करने की बजाए नाग प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए. नागदेव की तस्वीर की भी पूजा कर सकते हैं या मिट्टी अथवा धातु की प्रतिमा की भी पूजा कर सकते हैं।
विद्वानों और विशेषज्ञों का कहना है कि नाग कभी दूध नहीं पीता। पंडितों, धर्मगुरुओं आदि का भी यही कहना है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन असल में नागों पर दूध का छिड़काव करने का विधान है, ताकि उन्हें शीतलता मिल सके.
इस संबंध में सर्प विशेषज्ञ मोहम्मद सलीम का कहना है कि सांप कभी दूध नहीं पीता है। यह गलत धारणा है और इसके कारण सांपों की कई प्रजातियां खत्म हो रही है। संपरे अपने स्वार्थ के लिए सांपों के दांत तोड़ देते हैं और जहर की पोटली निकाल लेते हैं। फिर कई दिनों तक उन्हें भूखा रखने के बाद दूध देते हैं। भूखा सांप दूध को पानी समझकर पी लेता है।
दूध पीने से उसके मुंह में मवाद बनता है और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो जाती है। इसलिए सांप को दूध न पिलाएं। हालांकि अब प्रतिबंध के कारण संपेरे प्राय: नहीं आते पर नागपंचमी पर नाग देव की पूजा करते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें. नाग देव पर दूध छिड़क दें, संपेरे को दान—दक्षिणा भी दें पर नाग को दूध कदापि न पिलाएं।
इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग या नाग देव को पीतल के पात्र या लोटे से दूध चढ़ाएं. जल चढ़ाने के लिए तांबे के पात्र या लोटे का इस्तेमाल कर सकते हैं।
Updated on:
13 Aug 2021 12:00 pm
Published on:
13 Aug 2021 09:30 am
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