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National Mango Day 2023: भारत ही नहीं इन 2 देशो का राष्ट्रीय फल भी है MANGO

National Mango Day 2023: फलों के राजा आम की पैदावार में भारत सबसे आगे है। यहां आमों की कई किस्में पाई जाती हैं। हमारे देश से आम विश्व के कई देशों में निर्यात किए जाते हैं। यहां पढ़ें, आम की आत्मकथा...

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National Mango Day 2023: भारत मेरे पैदावार के मामले में दुनिया में सबसे आगे है। इस देश के बाद चीन, मैक्सिको, थाइलैंड और पाकिस्तान का स्थान है। यूरोप में स्पेन में सबसे अधिक आम होता है। मैं भारत ही नहीं, पाकिस्तान और फिलीपीन्स का भी राष्ट्रीय फल हूं। इन दिनों बाजारों में हर तरफ मेरी खुशबू फैली हुई है। मैं इस देश का राष्ट्रीय फल हूं और फलों का राजा भी हूं। मेरा साइंटिफिक नाम है मैंगीफेरा इंडिका। मेरे बहुत सारे रूप हैं। कोई लंगड़ा है, तो कोई चौसा, कोई बंबइया, तो कोई दशहरी, अलफासो, चौसा, सफेदा, तोतापरी, सिंदूरी, फजली, जर्दालु। सभी का स्वाद लाजवाब है। ‘मंगा’ सुनकर हंसो मत। यह मलयालम शब्द है। इससे अंग्रेजी का मैंगो शब्द बना। दरअसल, पुर्तगालियों ने इस शब्द को अपनाया और वर्ष 1510 में पहली बार पुर्तगीज ने मैंगा शब्द लिखा, जो बाद में अंग्रेजी में मैंगो हो गया।

मैं मूलत: भारत का हूं, लेकिन अब मैं दुनिया भर के आम-प्रेमियों के लिए उपलब्ध हूं। चौथी-पांचवीं सदी में बौद्ध धर्म प्रचारकों के साथ मैं मलेशिया और पूर्वी एशिया के देशों तक पहुंचा। पारसी लोग 10वीं सदी में मुझे पूर्वी अफ्रीका ले गए और पुर्तगाली 16वीं सदी में ब्राजील। वहीं से मैं वेस्टइंडीज और मैक्सिको पहुंचा। अमरीका में सन् 1861 में मुझे पहली बार उगाया गया। रामायण-महाभारत जैसे पौराणिक ग्रंथों में भी आम का उल्लेख मिलता है। मुगल बादशाहों को भी मैं बहुत प्रिय रहा हूं। मुगल बादशाह अकबर ने बिहार के दरभंगा में एक लाख से अधिक आम के पौधे रोपवाए थे, जिसे अब ‘लाखी बाग’ के नाम से जाना जाता है।

भारत के लोकगीतों और धार्मिक पूजा-अनुष्ठानों से भी जुड़ा हुआ हूं मैं। कवि कालिदास ने मेरी प्रशंसा में गीत लिखे हैं। अलेक्जेंडर और चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी मेरा स्वाद चखा है। मिया मिर्जा गालिब तो मेरे विशेषज्ञ बन गए थे। अपने दोस्तों को लिखी चिट्ठियों में उन्होंने 68 तरह के आमों का जिक्र किया था। रवींद्रनाथ टैगोर भी आम के खासे शौकीन थे। उन्होंने आम के फूलों पर कविता लिखी, ‘आमेर मजरी’। भारत मेरे पैदावार के मामले में दुनिया में सबसे आगे है। भारत के बाद चीन, मैक्सिको, थाइलैंड और पाकिस्तान का स्थान है। यूरोप में स्पेन में सबसे अधिक आम होता है। मुझे निर्यात करने वाले मुख्य देश भारत, पाकिस्तान, मैक्सिको, प्यूटोरिको, मैक्सिको, ब्राजील, इजराइल, साउथ अफ्रीका और पेरू हैं। मैं भारत ही नहीं, पाकिस्तान और फिलीपीन्स का भी राष्ट्रीय फल हूं।

अलग-अलग किस्मों के होते हैं आम

आम को फलों का राजा कहा जाता है। आम सर्वाधिक भारत में ही पाए जाते हैं। हमारे देश में आमों की सैकड़ों किस्में हैं। यहां से आम अन्य देशों निर्यात भी किए जाते हैं।

हाफूस - हाफूस को आमों का राजा कहा जाता है। यह सभी आमों से महंगा होता है। महाराष्ट्र गुजरात और कर्नाटक में सबसे ज्यादा होते हैं।

दशहरी- मुख्य रूप से यह उत्तर प्रदेश में होते हैं। लखनऊ इनका गढ़ है। इसकी खोज 18 वीं शताब्दी में हुई थी।

चौसा- यह आम उत्तर भारत में सबसे ज्यादा होता है। इसको चौसा नाम सूरी शासक शेरशाह सूरी ने दिया था। उत्तर प्रदेश में इसकी सबसे ज्यादा पैदावार होती है।

केसर- यह आम पीला होता है। इसको कच्चा भी इस्तेमाल किया जाता है। गुजरात में यह सर्वाधिक होता है।

नीलम- यह सभी आमों में सबसे जल्दी बाजार में आ जाता है और लम्बे टाइम तक मिलता है।

तोतापुरी- इसे संदेर्शा भी कहते हैं। ये दक्षिण भारत में अधिक होता है।

सफेदा- यह देखने में सुन्दर और पीले रंग का होता है। इसे बेगन फली और बंगनपल्ली भी कहते हैं। यह आंध्रप्रदेश में मुख्यरूप से होता है।

लंगड़ा- इसका ताल्लुक वाराणसी से है। बताया जाता है कि इस आम के पेड़ का मालिक लंगड़ा था। इसी कारण इसका नाम लंगड़ा पड़ा।

लाखों रुपए किलो बिकता है यह आम

मियाजाकी आम को दुनिया के सबसे महंगे फलों में से एक में गिना जाता है। इनके पौधों को पूर्णत: विकसित होने के लिए अत्यधिक धूप की आवश्यकता होती है, यह मूलत: जापानी आम है। इसे जापान के मियाजाकी में ताइयो-नो-तमागो के नाम से भी जाना जाता है। यह आम पकने पर बैंगनी से लाल हो जाता है। इसे एग्स ऑफ सन के नाम से भी जाना जाता है। मियाजाकी आम अन्य किस्मों की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक मीठा होता है। इस आम का वजन 900 ग्राम तक हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मियाजाकी आम की कीमत करीब 2.70 लाख रुपए प्रति किलो है। यह आम जापान के दक्षिण में क्यूशू द्वीप पर उगाए जाते हैं, यहां पर इन आमों के लिए अनुकूल जलवायु है।