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तीन हजार साल पुरानी पद्धति से एक मिनट में पानी साफ किया तो सब रह गए हैरान

पीएचई के त्रिलंगा स्थित फिल्टर प्लांट पर चेन्नई की टीम ने दिया डेमो

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natural ways of sewage water treatment

तीन हजार साल पुरानी पद्धति से एक मिनट में पानी साफ किया तो सब रह गए हैरान

भोपाल. सीवेज के गंदे पानी से भरे गिलास में हर्बल पेस्ट की कुछ बूंदें डालते ही एक मिनट में पानी साफ हो गया। सोमवार को त्रिलंगा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर पीएचई अफसरों के बीच पहुंची चेन्नई की टीम ने नीम, मुनगा फली और तुलसी से बनाए पेस्ट का डिमोस्ट्रेशन दिया। दावा है कि इससे सात पीएच के पानी को भी शुद्ध किया जा सकता है। ये टीम मंगलवार को नई जेल के सामने स्थित प्लांट पर निगम व अन्य सरकारी महकमों के इंजीनियरों और अफसरों के बीच पानी को शुद्ध करने वाली इस हर्बल तकनीक का प्रदर्शन देगी।

हर्बल से पानी साफ करने की कवायद
दरअसल, पीएचई सीवेज के पानी को साफ करने के लिए पुराने एवं हर्बल तरीकों को आजमाना चाहती है। इसके तहत चेन्नई की टीम को बुलाया गया। इस तकनीक में औषधीय गुण वाले पौधों से पानी को साफ किया जाता है। पीएचई कार्यपालन यंत्री आरके त्रिवेदी बताते हैं कि इस हर्बल तकनीक का उपयोग बड़े स्तर पर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि ये कारगर हुई तो तालाब, झील के साथ ही कॉलोनी के सीवेज को ट्रीट करना आसान हो जाएगा।

तीन हजार साल पुरानी पद्धति
चेन्नई से आए टीम के सदस्य जेए राज ने बताया कि पानी साफ करने की ये तकनीक तीन हजार साल पुरानी है। इसमें रसायन का उपयोग नहीं होता। ये पेस्ट पानी में मिलाते ही हानिकारक तत्व तल में बैठ जाते हैं। ये तत्व जलीय जंतुओं का भोजन बनते हैं। एक गिलास पानी में एक बूंद पेस्ट मिलाते ही पानी साफ हो जाता है। उन्होंने बताया कि एक हजार लीटर पानी में 30 मिग्रा तक पेस्ट मिलाया जाता है। इसका खर्च डेढ़ पैसा प्रति लीटर है।