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भोपाल के नवाब की व्यवस्था- यहां ठहरने पर होती है 5 करोड़ की बचत

हजयात्रा पर जाने वालों के लिए सउदी अरब में इमारतें खरीदी गई थी। जिनमें हजयात्रियों के ठहरने पर करीब पांच करोड़ रुपए की बचत होती है।

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भोपाल के नवाब की व्यवस्था- यहां ठहरने पर होती है 5 करोड़ की बचत

भोपाल के नवाब की व्यवस्था- यहां ठहरने पर होती है 5 करोड़ की बचत

भोपाल. भोपाल के नवाब द्वारा हजयात्रियों के ठहरने के लिए सालों पहले सउदी अरब में इमारतें खरीदी थी, जिनमें मध्यप्रदेश से जानेवाले हजयात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होती रही है, यहां हजयात्रियों के ठहरने से करीब पांच करोड़ रुपए की बचत होती है। लेकिन यहां पिछली बार हजयात्रियों को जगह ही नहीं मिल पाई थी।

भोपाल से हजयात्रा पर जाने वालों के लिए सउदी अरब में रिहाइश की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोपाल नवाब के दौर मेें यहां पर इमारतें खरीदी गई थी। जिनमें बीते साल हज यात्रियों को जगह नहीं मिली। इस साल की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इनके कारण करीब पांच करोड़ रुपए की बचत होती है।


भोपाल नवाब के दौर में मक्का और मदीना में इमारतें खरीदी गई थीं। करीब सौ साल पहले हुई व्यवस्था बीते साल अवरूद्ध हुई। ऐसा हज कमेटी के एक प्रावधान के चलते हुआ था। इस बार पहले से ही इसके संंबंध में नजर रखी जा रही है। शाही औकाफ पर इसकी जिम्मेदारी है। मक्का की रुबात में करीब दो सौ लोगों के ठहरने की जगह है। जबकि मदीना में इन तीन जिलों से जाने वाले सभी को जगह मिल जाती है। संगठनों ने बताया कि पूरे प्रदेश के हाजियों के लिए इनमें जगह की मांग हो रही है।


प्रदेश से करीब पांच लोग जाते हैं यात्रा पर
हजयात्रा पर राजधानी सहित प्रदेश के अन्य जिलों से करीब पांच हजार लोग जाते हैं। हज 2023 के आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ये आवेदन ऑनलाइन लिए जा रहे हैं। प्रक्रिया मार्च तक चलेगी। इस बीच रुबात सहित अन्य मामलों पर भी चर्चा होनी है। केवल तीन जिलों को रुबात में ठहरने का मौका मिलता है।
क्या है रुबात
नवाब शासनकाल के दौरान बेगमात ने सउदी अरब के मक्का और मदीना में कुछ बहुमंजिला इमारतें बनवाई थीं। इनकी मंशा यह थी कि भोपाल रियासत (भोपाल, सीहोर और रायसेन जिले) के हाजियों को हज और उमराह के दौरान निशुल्क ठहरने की व्यवस्था मिल जाए। करीब 103 साल से यह व्यवस्था जारी है।


5 करोड़ रुपए की होती है बचत
जानकारी के अनुसार जिन हाजियों को रुबात में जगह मिलती है। उनका हज खर्च चालीस से पचास हजार रुपए कम हो जाता है। इन तीन जिलों से करीब एक हजार लोग हजयात्रा पर जाते हैं। पिछले साल यह संख्या 933 थी। इस आधार पर यह राशि करीब पांच करोड़ रुपए होती है।


3 जिलों को मिलती है यहां पर जगह
भोपाल, सीहोर और रायसेन से हजयात्रा पर जाने वालों के लिए यहां पर जगह मिलती है। यह इमारतें करीब सौ साल पहले भोपाल नवाब ने खरीदी थी। अब इनके इंतजाम शाही औकाफ के हवाले है। इन तीन जिलों से हजयात्रा पर जाने वालों के लिए यह इंतजाम करता है।

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इंतजाम शाही औकाफ देखता है। हज कमेटी की ओर से गाइड लाइन में इस संबंध में प्रावधान तो हुए हैं। उसी के आधार पर काम होगा।
-शाकिर जाफरी, सीईओ हज कमेटी