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NEET 2018 toppers: बनना चाहते है ऐसा डॉक्टर, निचले तबके के लोगों को मिले इलाज की सारी सुविधाएं

NEET 2018 toppers: बनना चाहते है ऐसा डॉक्टर, निचले तबके के लोगों को मिले इलाज की सारी सुविधाएं

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NEET 2018 toppers: बनना चाहते है ऐसा डॉक्टर, निचले तबके के लोगों को मिले इलाज की सारी सुविधाएं

भोपाल। सोमवार को सीबीएसई नीट परीक्षा 2018 का रिजल्ट जारी कर दिया। इस परीक्षा में भोपाल के दो परीक्षार्थियों ने आॅल इंडिया रैंकिंग की टॉप 50 में अपनी जगह बनाई। जहां शबिस्ता खान ने 720 में से 671 अंक हासिल कर 29वीं रैंक हासिल की। वहीं, संकल्प केसरी ने 720 में 668 अंक हासिल कर 43वीं रैंक हासिल की। दोनों का कहना है कि हमने मन लगाकर पढ़ाई की थी। खुद पर भरोसा रखकर एग्जाम दिया। यही कारण था कि रिजल्ट तो अच्छा आना ही था।

नीट परीक्षा में आॅल इंडिया रैंक 29वीं लाने वाली शाबिस्ता खान का कहना है कि पढ़ाई के दौरान सेल्फ मोटिवेशन बहुत जरूरी है। परीक्षा के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि आपको एग्जाम फोबिया न हो। शाबिस्ता खान ने इसी साल सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 88 फीसदी अंक हासिल किए। शाबिस्ता के पिता पेशे से बिजनेस मैन है और मॉ ताहिर खान हाउस वाइफ है।

जब शाबिस्ता से यह पूछा गया कि उन्होंने एग्जाम में सफलता कैसे हासिल की। इस पर शाबिस्ता ने बताया कि उन्होंने मॉक टेस्ट में पिछले साल के सवालों को हल किया। साथ ही टीचर्स की हर एक बात सुनी और टॉपिक पर उनसे सलाह ली। शाबिस्ता ने बताया कि जब वह एग्जाम हाल में थी तो पूरी तरह कॉन्फिडेंट थी। किसी भी तरह का कोई स्ट्रेस उन पर नहीं था। शाबिस्ता ने हर सवाल को अहमियत दी और हल करने पर जोर दिया।

तैयारी के दौरान ऐसे किया स्ट्रेस कम
शाबिस्ता ने बताया कि एग्जाम की तैयारी के दौरान कई बार ऐसा लगता है कि अब नहीं पढ़ना। ऐसे में जरूरी है सेल्फ मोटिवेशन। उसके अलावा मुझे संगीत सुनना बहुत पसंद है। जब भी मैं पढ़ाई से बोर हो जाती, संगीत सुनने लगती। साथ ही माता पिता के साथ बैठकर देश दुनिया की चर्चा करती। जिससे मूड भी ठीक हो जाएं और नालेज भी मिल जाएं।

एग्जाम ने 29वीं रैंक लाने वाली शाबिस्ता का कहना है कि वह एक ऐसा डॉक्टर बनना चाहती है। जो लोगों के लिए इलाज को आसान बना दे। हर किसी को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा सके।

वही दूसरी और नीट एग्जाम में आॅल इंडिया 43 रैंक लाने वाले संकल्प केसरी का कहना है कि यदि आपने अपनी तरफ से 100 प्रतिशत मेहनत की हैै तो आपको, अपने लक्ष्य पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। संकल्प ने बताया कि मुझे पता था कि एआईआर रैंक लग सकती है। क्योंकि मुझे दिल्ली का मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज चाहिए था। मैंने तैयारी भी उसी हिसाब से की थी। संकल्प के पिता पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रोफेसर हैं और मॉ हाउस वाइफ है।

टीचर्स ने की मदद
संकल्प ने बताया कि परिवार के लोगों ने और टीचर्स ने उनकी बहुत मदद की। कोचिंग के टीचर्स ने लगातार सपोर्ट किया। साथ ही टेस्ट सीरिज को एनालिसिस किया। जिसके चलते मैंने 43वीं रैंक हासिल की।

संकल्प ने आगे बताया कि उन्होंने कभी भी पढ़ाई का लोड नहीं लिया। सभी लोग कहते थे कि इतने घंटे पढ़ना जरूरी है। पर मैंने कभी भी पढ़ाई घंटे के हिसाब से नहीं की। हॉ इतना जरूर किया कि कम से कम समय में, ज्यादा से ज्यादा पढ़ने की कोशिश की। टीचर्स और माता पिता के सपोर्ट से ही ऐसा संभव हो पाया।

पढ़ाई के लिए बनाई सोशल मीडिया से दूरी
संकल्प ने बताया कि जब वह पढ़ाई से बोर हो जाते थे तो रेडियों पर गाने सुनने लगते थे या फिर मैगजीन पढ़ते थे। संकल्प ने एग्जाम के लिए सोशल मीडिया से दूरी भी बना ली थी। उन्होंने किसी भी सोशल साइट पर एकांउट ही नहीं बनाया।

नीट में 43वीं रैंक हासिल करने वाले संकल्प का कहना है कि मैं एक ऐसा डॉक्टर बनना चाहता हूं। जिससे गरीबो का भला हो सके। निचले तबके के लोगों को इलाज की सारी सुविधाएं मिल सकें। सेवा भाव हमेशा मन में रहे। क्योंकि दूसरों की सेवा करने से ही पेशा बड़ा बनता है।