
भोपाल। आइसीएमआर के रेफरेंस इंटरवेल प्रोजेक्ट के तहत एम्स, भोपाल समेत देश के 14 केंद्र भारतीयों के लिए डायबिटीज, बीपी और थायराइड जैसी कई बीमारियों के लिए नया बेंचमार्क तय कर रहे हैं। ताकि लोग बेवजह दवा खाने और इलाज कराने से बच सकें। अभी अमरीका व यूके जैसे देशों के बेंचमार्क के आधार पर इन बीमारियों का इलाज किया जाता है। जो इन देशों के क्लाइमेंट के आधार पर तय किए गए हैं।
एशिया में 48 देश हैं। भारतीय रिसर्च से श्रीलंका, मलेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान समेत अन्य को भी लाभ होगा।
अभी बीपी या शुगर रोगी के लिए तय बेंचमार्क यूएसए और यूरोपीयन रेफरेंस रेंज (रोगों के पैमाने) के हिसाब से तय है। यानी बीपी के तय बेंचमार्क 120-80 से कम या ज्यादा है तो उसे बीपी रोगी मान लिया जाता है। जबकि, विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय मूल के निवासियों के खान पान अलग हैं। वातावरण और शारीरिक बनावट भी अलग है। ऐसे में जो बीपी मानक अमेरिकी व्यक्ति के लिए तय है वो हिंदुस्तानी के लिए भी हो यह उपयुक्त नहीं।
रेफरेंस इंटरवेल प्रोजेक्ट के तहत सबसे पहले थायराइड, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह की नई रेंज तय की जाएंगी। इसके लिए भारत में जापान का मॉडल अपनाया जा रहा है। जिसके तहत मिड एज ग्रुप (20 से 50 साल) के लोगों की 12 पैरामीटर पर जांच होगी। इससे निकलने वाले रिजल्ट को नई रेंज माना जाएगा। इसके लिए 5 साल का समय तय किया है। यही स्टडी बच्चों व बुजुर्गों पर भी होगी। इसमें नॉन वेज और वेज खाने वाले दो ग्रुप बनाए जाएंगें।
रिसर्च से नई रेंज के तहत रोगियों की सही पहचान और इलाज में मदद मिलेगी। लोग बेवजह दवा खाने से बचेंगे। शरीर में टॉक्सीसिटी नहीं बढ़ेगी। बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिलेगी।- डॉ.सुखेश मुखर्जी, अतिरिक्त प्रोफेसर, जैव रसायन विभाग, एम्स भोपाल
Published on:
20 Apr 2024 12:37 pm
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