6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इसी हफ्ते घोषित होगा कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष!, 4 नाम फाइनल, रेस में एक महिला नेता भी

मध्यप्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए दिग्विजय सिंह गुट भी सक्रिय हो गया है।

2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Pawan Tiwari

Aug 28, 2019

इसी हफ्ते घोषित होगा कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष!, 4 नाम फाइनल, रेस में एक महिला नेता भी

इसी हफ्ते घोषित होगा कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष!, 4 नाम फाइनल, रेस में एक महिला नेता भी

भोपाल. मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा इसी हफ्ते हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए चार नाम फाइनल कर लिए गए हैं, इन चार नामों में एक महिला नेता की भी नाम शामिल है। मुख्यमंत्री कमलनाथ अभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं और उन्होंने हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की थी।

इस हफ्ते हो सकती है घोषणा
सूत्रों का कहना है कि इस हफ्ते पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। मध्यप्रदेश के प्रभारी और कांग्रेस नेता दीपक बाबरिया के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में कमलनाथ सरकार के दो मौजूदा मंत्री और पार्टी के दो वरिष्ठ नेता शामिल हैं इनमें से एक महिला नेता भी है।

ये नाम तय
सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन, प्रदेश के वन मंत्री उमंग सिंघार, पूर्व मंत्री राम निवास रावत और महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्यप्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता शोभा ओझा का नाम शामिल है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम इस रेस में नहीं है।

प्रदेश प्रभारी ने की थी विधायकों से मुलाकात
दीपक बाबरिया ने पिछले सप्ताह मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेताओं और विधायकों के साथ मीटिंग की थी। बताया जा रहा है कि बाला बच्चन का दावा सबसे मजबूत है। बाला बच्चन बड़वानी जिले से आते हैं और प्रदेश के बड़े आदिवासी चेहरा हैं। सीएम कमल नाथ के करीबी नेताओं में से एक हैं। कांग्रेस नेता सत्यदेव कटारे के निधन के समय वो मध्यप्रदेश की विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।

कमलनाथ का समर्थन
सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष के लिए आदिवासी चेहरा चाहते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा आदिवासी इलाके में जीत दर्ज की थी। जबकि लोकसभा में पार्टी आदिवासी इलाकों में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। ऐसे में कमलनाथ आदिवासियों की नाराजगी दूर करने के लिए आदिवासी चेहरे पर दांव लगाना चाहते हैं।