
Kashmir to Kanyakumari
भोपाल। भगवान श्रीराम की पहचान एक राजकुमार या केवल अयोध्यापति के रूप में होती तो वाल्मीकि कभी भी राम की जीवन यात्रा "रामायण" जैसा महान ग्रंथ नहीं रचते... सृजन करते भी यह एक राजा का आख्यान होता। तुलसीदास ने मनुष्य के रूप में राम का चरित्र "रामचरित मानस" लिखा क्योंकि राम की जीवन यात्रा आदर्श व्यक्ति के चरित्र का अभिलेख है। जब देश राम की प्राण-प्रतिष्ठा में श्रद्धा से जुटा था तब भोपाल और मुंबई के दो युवा 24 वर्षीय निखिल जाधव और 21 वर्षीय सुदीप दास हिमाचल से कन्याकुमारी तक साढ़े तीन हजार किमी की साइकिल यात्रा कर रहे थे।
इस दौरान वे पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक उन्मूलन और राम की जीवन यात्रा का महत्व समझाते हुए आगे बढ़ते रहे। इनका मानना है कि यात्रा ही थी जिसने राम को अनुभव भी दिया और उपलब्धि भी। मालूम हो कि पहले चरण में इनकी हिमाचल के कसौल से भोपाल तक 1300 किमी की सौद्देश्य साइकिल यात्रा पूरी हो चुकी है। अब भोपाल से कन्याकुमारी तक 1200 किमी शेष है।
स्टार्टअप से की शुरुआत
निखिल के इलेक्ट्रिक साइकिल का मॉडल वर्ष 2016 में स्टार्टअप प्रतियोगिता में शामिल था। इंक्यूबेशन सेंटर से निखिल के स्टार्टअप की शुरुआत वर्ष 2018 में बाइकर्स प्राइड में तब्दील हुई। इससे पहले निखिल पुणे से मुंबई और मुंबई से गोवा की 1000 किमी की यात्रा कर चुके हैं। सुदीप मुंबई में सेकंड इयर के छात्र हैं, जिनकी ये पहली साइकिल यात्रा है। 1 जनवरी को वे हिमाचल, हरियाणा, चंडीगढ़, फिर से दिल्ली और वहां से ग्वालियर होते हुए भोपाल पहुंचे।
भारत दर्शन से जीवन को मिलेगा नया मुकाम
निखिल और सुदीप बताते हैं कि साइकिल पर 20 किलो वजनी बैग है, जिसमें भोजन बनाने से लेकर पहनने, ओढऩे तक पूरी गृहस्थी है। उनका कहना है कि ये दुनिया जितनी बड़ी है, उतनी ही सुंदर भी। अपने जीवन में एक बार भारत दर्शन जरूर करें। अपना दायरा बढ़ाएं। निश्चित ही यात्रा आपकी जीवन को नया मुकाम देगी। उन्होंने अपनी यात्रा के वृत्तांत साझा करते हुए बताया कि उन्हें जगह-जगह लोगों का स्नेह मिला।
Published on:
31 Jan 2024 08:34 am
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