
भोपाल। 14 हजार 500 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोपी नीरव मोदी को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है। ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण (Nirav Modi Extradition) को हरी झंडी दिखा दी है। कोर्ट ने कह दिया है कि अब भारत वापस जाओ। गौरतलब है कि नीरव मोदी का मध्यप्रदेश से भी कनेक्शन है। उसकी सहयोगी कंपनी मध्यप्रदेश से भी अरबों रुपयों के हीरे लेकर फरार हो चुकी है।
ब्रिटेन की वेस्टमिस्टर कोर्ट ने भगोड़े नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि नीरव मोदी का प्रत्यर्पण किसी भी नजरिए से अन्यायपूर्ण या दमनकारी नहीं होगा। पंजाब नेशनल बैंक में धोखाधड़ी का मामला पहली बार 29 जनवरी 2018 को दुनिया के सामने आया था। इसके बाद वो भारत छोड़कर ब्रिटेन भाग गया था। तभी से वो ब्रिटेन में रह रहा था। फिलहाल वो ब्रिटेन की जेल में है।
उल्लेखनीय है कि नीरव दीपक मोदी (Nirav Deepak Modi) सात हजार करोड़ के घोटाले का आरोपी है। उसने पीएनबी से करीब 7 हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया था और वो लंदन भाग गया था। इसके बाद से वह लंदन की एक जेल में है। भारत सरकार उसे लाने के काफी प्रयास कर रही थी। नीरव मोदी ने 2017 में अपनी कंपनी फायर स्टार डायमंड के जरिए प्रतिष्ठित रिदम हाउस बिल्डिंग खरीदी थी। उसका प्लान इसे हेरिटेड प्रापर्टी में बदलने का था। माना जाता है कि नीरव मोदी ने ज्यादातर संपत्तियां पीएनबी घोटाले से हासिल रकम से खरीदी गई थी।
मध्यप्रदेश से अरबों के हीरे ले जा चुका है नीरव मोदी
कम ही लोग जानते हैं कि गुजरात (gujrat) का रहने वाला नीरव मोदी का मध्यप्रदेश (madhya pradesh) से काफी हीरे लेकर चंपत हो चुका है। नीरव मोदी से संबंधित एक कंपनी छतरपुर जिले (chhatarpur district) से अरबों रुपए के हीरे ले जा चुकी है। इसके अलावा भोपाल स्थित उनके शोरूम पर भी छापा मारकर हीरे-जवाहरात जब्त किए गए थे।
नीरव की सहयोगी कंपनी को मिला था टेंडर
एमपी के छतरपुर जिले की बक्सवाहा, बंदर डायमंड प्रोजेक्ट में रियो टिंटो (rio tinto india) नामक आस्ट्रेलियाई कंपनी को हीरे का भंडार खोजने का काम मिला था। यह नीरव मोदी की कंपनी फायर स्टोन कंपनी की ही सहयोगी कंपनी थी। यह दोनों मिलकर काम कर रहे थे। यहां से निकलने वाले बेशकीमती हीरों की प्रदर्शनी मुंबई से लेकर विदेशों तक लगाई जाती थी। 2004 में रियो टिंटो ने मध्यप्रदेश के छतरपुर के बक्सवाहा, बंदर डायमंड प्रोजेक्ट में काम करना शुरू किया था। यह प्रोजेक्ट 2200 करोड़ की लागत वाला था। यहां से वो हीरे का बड़ा भंडार ले जाने में सफल हो गया और मध्यप्रदेश सरकार को भारी मात्रा में रायल्टी का नुकसान कर गया था।
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Updated on:
09 Nov 2022 05:15 pm
Published on:
09 Nov 2022 05:10 pm
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