किताब का विमोचन : भोपाल के सैन्य इतिहास को बताती है किताब 'निजाम-ए-भोपाल'

भोपाल के इतिहास पर आधारित किताब 'निजाम-ए-भोपाल'का विमोचन।

By: Faiz

Published: 24 Jul 2021, 07:48 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित द्रोणांचल के पांचजन्य ऑडिटोरियम में शनिवार को भोपाल के सैन्य इतिहास पर आधारित 'निजाम-ए-भोपाल' नामक किताब का विमोचन हुआ। इस किताब का विमोचन वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल सीपी मोहंती द्वारा किया गया। किताब का विमोचन करते हुए मोहंती ने कहा कि, लेफ्टिनेंट जनरल मिलन नायडू द्वारा भोपाल के सैन्य इतिहास पर लिखी गई किताब भोपालवासियों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसके माध्यम से भोपाल नवाब, बेगम और उनकी आर्मी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी।

 

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मुझे भी मिली प्रेरणा- सीपी मोहंती

जनरल सीपी मोहंती ने आगे कहा कि, 'नायडू द्वारा लिखित इस किताब को देखकर मैं भी किताब के लिए प्रेरित हुआ हूं और भविष्य में कलिंग और उत्कल के इतिहास पर किताब लिखूंगा। 'निजाम-ए-भोपाल मिलेट्रीज ऑफ भोपाल स्टेट, ए हिस्टॉरिकल पर्सपेक्टिव' नामक ये किताब भोपालियों के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी।


भोपाल पर बेगमों ने 170 साल किया शासन

'निजाम-ए-भोपाल' किताब का विमोचन करते हुए जनरल नायडू ने बताया कि, इस किताब में भोपाल रियासत का ऐतिहासिक विश्लेषण किया गया है। किताब लिखने के लिए जब दस्तावेजों की जरूरत पड़ी, तो पता लगा कि भोपाल नवाब से संबंधित अंग्रेजी में लिखा गया रिकॉर्ड ब्रिटेन के अभिलेखागार में है और पौंड देकर उन्हें हासिल किया जा सकता है, जो मेरे बस की बात नहीं थी। भोपाल स्थित अभिलेखागार में मौजूद दस्तावेज परशियन और क्लासिक उर्दू में थे, जिन्हें मैंने कलीम अख्तर की मदद से पढ़कर किताब में दर्ज किया। उन्होंने बताया कि भोपाल पर 170 साल तक बेगमों का शासन रहा, जो बड़ी ही स्वप्नदर्शी और शिक्षित थीं। उनके नेतृत्व में प्रशासकीय दक्षता के साथ कूटनीतिक चातुर्य भी मौजूद था।


बेगम शासन काल में हुई भोपाल बटालियन की स्थापना

बेगमों के बारे में आगे बताते हुए उन्होंने कहा कि, वो युद्ध कला जैसे घुड़सवारी और हथियार चलाने में बहुत माहिर थीं। बेगम शासकों ने अपनी सेना का मनोबल बढ़ाकर उसका प्रारंभिक स्वरूप निर्धारित किया। उन्होंने भोपाल बटालियन की स्थापना की जो पहली गैर योरपीय सेना थी, जो युद्ध लड़ने फ्रांस तक गई थी। इस बटालियन को प्रथम विश्वयुद्ध में विक्टोरिया क्रॉस और स्वतंत्रता के बाद के काल में निशान-ए-हैदर का सम्मान हासिल हुआ।


पद्श्री से सम्मानित लेखक ने दी किताब को भूमिका

किताब की भूमिका मेरे दोस्त पद्श्री से सम्मानित लेखक मंजूर ऐहतेशाम ने लिखी है। हालांकि, दुर्भाग्य ये भी है कि, अब वो इस दुनिया में नहीं है। अंत में आभार निहारिक नायडू ने व्यक्त किया।

 

कौन है लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती?

 

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लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती ने 1 फरवरी 2021 को आर्मी स्टाफ के नए वाइस चीफ की कमान संभाली थी। सीपी मोहंती इससे पहले सदर्न आर्मी कमांडर रहे हैं। वो सेना के 42वें वाइस चीफ हैं। महंती को पाकिस्तान और चीन के साथ सीमाओं और असम में सक्रिय आतंकवाद रोधी अभियानों का अच्छा खासा अनुभव है। मोहंती राष्ट्रीय भारतीय अकादमी देहरादून, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खडकवासला और भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के छात्र रह चुके है।


कौन हैं मिलन नाइडू?

उल्लेखनीय है कि लेफ्टिनेंट जनरल मिलन ललितकुमार 1967 में राजपूत रेजीमेंट में कमीशंड हुए थे। वे वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ रहे। जनरल मिलन की पढ़ाई भोपाल में ही हुई है। सेवानिवृत्त के बाद वे भोपाल में ही बस गए। लेफ्टिनेंट जनरल मिलन नायडू ने ने 18वीं शताब्दी की शुरुआत से लेकर आधुनिक सेना तक, रियासत के रैग-टैग बलों की परिवर्तन कहानी को चित्रित किया है। उन्होंने उस समय मौजूद सामाजिक-आर्थिक राजनीतिक वातावरण का स्पष्ट रूप से वर्णन किया है और भोपाल राज्य के विशेष संदर्भ में राज्य बलों द्वारा लड़े गए विकास, नियमों, सेवा शर्तों, समारोहों और लड़ाइयों का विश्लेषण भी किया।


पुस्तक विमोचन में शामिल हुए ये लोग

इस अवसर पर सेवानिवृत्त आइएएस अफसर एवं इंटेक के मध्य प्रदेश चेप्टर के संयोजक एमएम उपाध्याय, क्लब रिटराटी की अध्यक्ष सीमा रायजादा, हिस्टोरियन और रिसर्चर सलीम अख्तर मौजूद थे।

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