
भोपाल। आयुर्वेद को लेकर लोगों में संशय की स्थिति रहती है। कई लोग अब भी यह मानते हैं कि आयुर्वेद जड़ी-बूटियों और ग्रामीण वैद्यों द्वारा किया जाने वाला उपचार है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। अब यह सोच बदल रही है। राजधानी का पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर आयुर्वेद के तमाम शोधों के आधार पर ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है। अब जब भी आयुर्वेद डॉक्टर उपचार करेंगे, तो उसके पीछे कई शोध निष्कर्ष का आधार होगा।
कोरोना के बाद बढ़ा भरोसा
आयुष मंत्रालय का भी मानना है कि कोरोना के बाद आयुष पैथी खासकर आयुर्वेद में लोगों का भरोसा बढ़ा है। यह एलोपैथी के समकक्ष खड़ा हो सकता है। जानकारी के मुताबिक प्रोटोकॉल में आमतौर पर होने वाली बीमारियों को शामिल किया गया है। इनमें अम्ल पित्त, आम वात, बाल शोष, मधुमेह, मूत्रश्मरी, पांडू रोग, प्रतिश्याय, रक्तप्रदर सहित अन्य बीमारियों का एविडेंस बेस्ट ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार किया गया है।
डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल आयुर्वेद महा.भोपाल का कहना है कि प्रोटोकॉल बनने से लोगों की भ्रांति खत्म होगी। हम जो उपचार कर रहे हैं, उसका हमारे पास वर्षों के शोध निष्कर्ष का सबूत है। देशभर में कई आयुर्वेद संस्थान हैं जो मॉडर्न मेडिसिन से भी ज्यादा उन्नत तरीके से शोध कर रहे हैं।
तैयार हो रहा ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल
आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश पांडे बताते हैं कि सुश्रुत संहिता में बीमारियों के उपचार की कई व्याख्या की गई हैं, लेकिन आम लोग इससे अनजान हैं। ऐसे में बीमारियों में किस तरह की दवाएं ज्यादा कारगर होती हैं, वो कहां मिलती हैं। दवा की कितनी मात्रा और कब देना है जैसे कई शोध करने के बाद ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार किया जा रहा है।
Published on:
22 Jun 2022 01:28 pm
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