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#Recall: वो मंजर याद आते ही कांप जाती है रूह, बाढ़ में डूब गए थे दो ट्रेनों के कई डिब्बे

Harda twin train derailment- मध्यप्रदेश के हरदा जिले में भी हुआ था भीषण ट्रेन हादसा...। बाढ़ में डूब गए थे दो ट्रेनों को डिब्बे...।

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भोपाल

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Manish Geete

Jun 03, 2023

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उड़ीसा में हुए रेल हादसे ने देशभर को हिला दिया। यह हादसा अपने आप में इतना बढ़ा है कि शायद ही इस हादसे को कोई भूल पाए। मध्यप्रदेश में भी पिछले कुछ सालों में ऐसे ही एक हादसे ने सभी को झंकझोर दिया था। मध्यप्रदेश के हरदा जिले में 4 अगस्त 2015 की रात कभी नहीं भूलने वाली रात बन गई थी। जिसने भी यह नजारा देखा या सुना वो आज भी सिहर जाता है। बच्चे, महिलाएं और कई परिवारों के लिए ट्रेन का यह सफर आखरी साबित हुआ।

हरदा जिले के इटारसी-खंडवा रेल खंड के भिरंगी-कुड़ावा रेलवे स्टेशन के बीच कामायनी और जनता एक्सप्रेस की बोगियां माचक नदी पार करते समय रात 11.20 बजे पानी में समा गई थीं। उस दिन माचक नदी में बाढ़ आ गई थी। दुर्भाग्य की बात है कि दोनों ही ट्रेनें एक समय पर उसी स्थान से गुजर रही थी। बाढ़ में ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह गई और ट्रैक कमजोर पड़ गया था। दोनों ही ट्रेनों का उसी स्थान से एक साथ गुजरना हुआ और ब्रिज वजन नहीं सह सका। दोनों ही ट्रेन पानी में समा गई। दोनों ही ट्रेनों के कई डिब्बे पानी में डूब गए थे। जो डिब्बे बाहर रह गए थे, उसमें सवार लोगों को मामूली चोटें आई थीं।

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एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत

कामायानी की अधिकांश बोगियां रेलवे लाइन से नीचे पलट गई थी। वही जनता एक्सप्रेस की एक बोगी पुलिया में बैठ गई थी। दुर्घटना में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत हो गई थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि घटना कितनी हृदय विदारक थी। राजेन्द्र नगर जनता एक्सप्रेस से गाडरवारा से शिरडी जा रहे एक ही परिवार के 13 में से 11 सदस्यों की घटना स्थल पर मौत हो गई थी। दो सदस्यों को बचाव दल द्वारा बमुश्किल बचाया जा सका था। रेलवे के रिकार्ड में मृतकों की संख्या 29 से 30 ही रही। जबकि प्रत्यक्षदर्शी मरने और लापता हुए लोगों की संख्या ज्यादा बता रहे थे।

इन डिब्बों में सवार थे यात्री

कामायानी की s-4 से s-11, एक जनरल बोगी और ए एसएलआर बोगी सहित 10 बोगियां दुर्घटनाग्रस्त हुईं थीं। जबकि जनता एक्सप्रेस की s-1 से लेकर S-6 और 3 जनरल बोगी, एक इंजन, एक एसएलआर दुघर्टनाग्रस्त हुआ था।


नदी का बहाल तेज था

संभवत: पहली बार इतनी तेज बाढ़ ने नदी के दोनों किनारों को लबालब कर दिया था। बहाव इतना तेज था कि नदी पर बने रेलवे पुल व समीप की पुलिया के आसपास काफी पानी जमा हो गया था। देखते ही देखते बहाव तेज होता गया और ट्रैक क्षतिग्रस्त कर दिया। इसी दौरान रात 11 बजकर 20 मिनिट पर मुंबई से इलाहाबाद जा रही 11071 कामायनी एक्सप्रेस और पटना से मुंबई की जा रही 13201 लोकमान्य तिलक राजेन्द्र नगर जनता एक्सप्रेस यहां से गुजरती है। खंभा नंबर 108 से 109 के बीच माचक नदी से कुछ दूरी पर स्थित रेलवे पुलिया नंबर 645 की साइड की मिट्टी धंसने के कारण ट्रैक क्षतिग्रस्त हुआ था। दोनों ट्रेनों की बोगियां पानी में डूब गई थीं।


15 दिन बंद रहा था यह रेलवे ट्रैक

15 दिन तक रेलवे का यातायात सामान्य नहीं हो पाया था। 6ठे दिन अप रूट को चालू किया जा सका था। इस पर से पहले ट्रायल मालगाड़ी और एक गरीब रथ एक्सप्रेस निकाली गई थी। इसके बावजूद ट्रेक के बगल में लगा ओएचई का खंबा दोबारा क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे फिर से आवाजाही बंद हो गई थी। अब रेलवे को पूरा यातायात सामान्य करने में करीब 15 दिन लग गए थे।