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उदयपुरः फ्रांस के दो दीवाने बांट रहे मुफ्त शिक्षा की सौगात

फ्रांस से करीब दो साल पहले पर्यटक बन उदयपुर आए आनंद व उर्वशी अपनी जिंदगी एेसे बच्चों के नाम कर चुके हैं जो गरीब व जरूरतमंद हैं। 

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फ्रांस से करीब दो साल पहले पर्यटक बन उदयपुर आए आनंद व उर्वशी अपनी जिंदगी एेसे बच्चों के नाम कर चुके हैं जो गरीब व जरूरतमंद हैं। वे पिछले काफी समय से शहर के आसपास व गांवों के स्कूलों में जाते हैं और वहां उन्हें किसी न किसी रूप में खुशियां देकर आते हैं। यहां वे बिना किसी की आर्थिक सहायता के मदद कर रहे हैं लेकिन अब इन्हें एेसे मददगारों की तलाश है जो इनकी मुहिम में उनका साथ दें। ताकि वे आगे इसी तरह मदद का कार्य जारी रख पाएं। आनंद व उर्वशी की जिंदगी का लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है।

भारतीय संस्कृति है पसंद
उर्वशी को कभी भारतीय साड़ी तो कभी राजपूती पोशाक में सड़कों पर घूमते देखा जा सकता है। वे हाथ में चूडिय़ां, मांग में सिंदूर, पांवों में पायजेब भी पहनती हैं, वहीं, इनके पति आनंद भी कुर्ता-पायजामा व लुंगी में नजर आते हैं। उन्हें भारतीय खाना भी पसंद है। वे पूरी तरह से भारतीय संस्कृति से प्रभावित हैं और यहीं रहकर अब शिक्षा की सौगात बांट रहे हैं।

पढ़ाई के साथ बांटते हैं गिफ्ट

वे हर महीने 5 स्कूल जाते हैं, बच्चों को उपहार बांटते हैं और उन्हें अंग्रेजी व फ्रेंच पढ़ाते हैं। आनंद व उर्वशी ने बताया कि वे बच्चों को स्टेशनरी, कपड़े, मिठाई-चॉकलेट, ब्रश और भी कई सारी चीजें बांटते हैं। हर स्कूल में नियमित रूप से 15 दिन तक जाकर शिक्षा के अलावा वे बच्चों को कैलिग्राफी, नृत्य, पेंटिंग, संगीत व शिल्पकारी का प्रशिक्षण भी देते हैं।


ananda and uravshi

वे स्कूलों की दीवारों पर पेंटिंग्स कर के उन्हें आकर्षक बनाते हैं और बच्चों को हाथ धोने, साफ-सफाई का पाठ भी पढ़ाते हैं। जब वे स्कूल जाते हैं तो बच्चे खुशी से उछल जाते हैं। उनका ये प्रेम देखकर ये भी खुशी से फूले नहीं समाते।

लगा दी पूरी कमाई
उर्वशी ने बताया कि उनके पास कोई साधन नहीं है। इसलिए वे कभी स्कूलों तक जाने के लिए पैदल ही चल पड़ते हैं तो कभी ऑटो आदि कर लेते हैं। अपनी पूरी कमाई लगा दी, अब मददगारों से आस है। उर्वशी (63) रिटायर्ड टीचर हैं जो अपनी कमाई इसी काम में लगा रही हैं।

मददगारों की तलाश
इसी तरह उनके पति आनंद (50) भी उनका पूरा साथ दे रहे हैं। उर्वशी ने बताया कि वे दो साल पहले उदयपुर आए थे। उन्हें भारतीय संस्कृति ने बहुत आकर्षित किया और यहां की खूबसूरती उन्हें भा गई। इसलिए वे हमेशा के लिए यहीं बस गए। आनंद ने बताया कि उन्होंने 3 माह पूर्व अपनी वेबसाइट भी बनाई है। इसका एक कारण यह है कि उनके पास अब इतने पैसे नहीं हैं इसलिए वे यहां दानदाता तलाश रहे हैं लेकिन कोई उनकी मदद नहीं कर रहा है। एेसे में यदि कोई भी इच्छुक हो तो वे http://www.vouesudr.comवेबसाइट के माध्यम से उनसे संपर्क कर सकते हैं और आसानी से मदद कर सकते हैं।