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राजधानी में डेढ़ लाख परिवारों के पास खुद का घर नहीं

पीएम आवास में 33 हजार बनाने का लक्ष्य, लेकिन अभी तक सात हजार भी तैयार नहीं

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राजधानी में डेढ़ लाख परिवारों के पास खुद का घर नहीं

शहरी आवास समस्या खत्म करने ठोस काम करने वाली योजना की जरूरत

भोपाल. शहर में डेढ़ लाख परिवारों के पास खुद का आवास नहीं है। वे किराए के मकान में गुजर बसर कर रहे हैं। मास्टर प्लान को लेकर तैयार रिपोर्ट में ये तथ्य जाहिर हुए। विश्व आवास दिवस पर जब शहर में आवास की स्थिति पड़ताल की तो नगर निगम ने शहर में 33 हजार नए आवास तैयार करने के लक्ष्य के साथ 2020 में काम शुरू किया था, लेकिन महज सात हजार आवास ही बना पाया। ऐसे में शहरी आवास समस्या खत्म करने के लिए ठोस और तेज गति से काम पूरा करने वाली योजना बनाने की जरूरत है।
सबसे ज्यादा बेघर स्लम में
सबसे ज्यादा बेघर आबादी स्लम में है। नगर निगम 14 हजार स्लम ईडब्ल्यूएस आवास बनाने की योजना बनाकर बैठा हुआ है, लेकिन सबसे पहले एमआइजी, एलआइजी को बनाने पर जोर दे रहा है। स्लम में रहने वाली 1.12 लाख आबादी बेघर है। इसी तरह नॉन स्लम में ये आंकड़ा 40 हजार से ज्यादा है।
नौ लाख घरों की जरूरत होगी 2031 में
शहर में आवास को लेकर तैयार सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 2031 तक शहर की आबादी 36 लाख होगी। तब 9 लाख घरों की जरूरत होगी। ऐसे में आगामी आठ साल में प्रति वर्ष 50 हजार नए घर के औसत से काम करना होगा। साढ़े तीन से चार लाख नए घर बनाने होंगे।

नए आवास के लिए नगर निगम काम कर रहा है। नए प्रोजेक्ट्स लांच किए जा रहे हैं और आवास आवंटन हो रहा है। काम अब तेजी से चल रहा।
- मालती राय, महापौर
प्रधानमंत्री आवास योजना में घर बुक किया है, लेकिन आवंटन नहीं किया जा रहा। किराए के घर में दिक्कत बढ़ रही है।
- लोकेंद्र श्रीवास्तव, नौकरीपेशा