ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से दो कोरोना पेशेंट की मौत, कांग्रेस बोली- जारी है 'शवराज'

भोपाल के जेपी अस्पताल में कोरोना पेशेंट की मौत पर परिजनों ने लगाया आरोप...।

By: Manish Gite

Published: 02 Apr 2021, 10:59 AM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी में एक बार फिर लापरवाही सामने आई है। इस बार यह लापरवाही जिला अस्पताल जेपी अस्पताल की है। एक घंटे में अस्पताल में एक महिला समेत दो मरीजों की मौत हो गई। इनमें एक मरीज कोरोना संदिग्ध था और महिला पाजिटिव थी। बताया जा रहा है कि आक्सीजन खत्म होने पर यह स्थिति सामने आई है। इधर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को शिवराज सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि कोरोना से बचोगे तो 'शिवराज' आपकी जान ले लेगा।

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कांग्रेस ने कसा तंज

जेपी अस्पताल में हुई लापरवाही से दो कोरोना पेशेंट की मौत के मामले में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शिवराज सरकार पर तंज कसते हुए इस लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया है। प्रदेश कांग्रेस ने इस लापरवाही से शिवराज सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि लापरवाही ने फिर ली 2 मरीज़ों की जान, कोविड से बचोगे तो शिवराज आपकी जान ले लेगा। “शवराज चरम पर है”

 

यह है मामला

राजधानी के जेपी अस्पताल में 50 साल की रामरती और सीबी मेश्राम कोरोना संदिग्ध वार्ड में भर्ती थे। दोनों की मौत ऑक्सीजन सप्लाई नहीं मिलने के कारण होना बताया जा रहा है। बुधवार-गुरुवार की रात को कर्मचारी सिलेंडर यहां-वहां खोजते रहे। डॉक्टर भी गायब थे। इन आरोपों पर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राजेश श्रीवास्तव कहते हैं कि ऑक्सीजन सप्लाई नहीं रुकी, दोनों ही मरीजों की हालत गंभीर थी।

 

भानपुर निवासी 50 साल की रामरती को एक सप्ताह पहले से बुखार आने पर 28 मार्च को भर्ती किया गया था। परिजनों का आरोप है कि रामरती की तबीयत बुधवार रात को पहले से बेहतर थी। खाना खाया और सो गई। उनके बेटे ने बताया कि वह वार्ड के बाहर ही सो रहा था। रात करीब ढाई बजे उन्हें वार्ड में से किसी के चिल्लाने की आवाज आई तो उनकी नींद खुल गई। वे भीतर गए तो गार्ड ने जाने से मना कर दिया। गुरुवार सुबह रात बजे डाक्टर ने फोन करके कहा कि मां की हालत खराब है। भीतर गया तो मां बेहोश थीं। हाथ में लगी निडिल से खून बह रहा था। आक्सीजन मास्क भी निकला हुआ था। बेटे का आरोप है कि डाक्टरों ने उन्हें मां को दूसरे अस्पताल ले जाने से मना किया था। हमने गाड़ी में रखा तो पुलिस ने आकर रोक दिया।

यह भी है आरोप
प्रत्यक्षदर्शी राकेश (परिवर्तित नाम) की मां भी उसी वार्ड में भर्ती थी। राकेश का कहना है कि वार्ड में भर्ती एक मरीज अजीब आवाजें निकाल रहा था, वह तड़प रहा था। मेरी मां वार्ड से बाहर मेरे पास आ गई, मैंने पूछा तो बताया कि ऑक्सीजन कम आने से घबराहट हो रही है।

बेटा संदग्ध फिर भी वार्ड में रहा
रामरती का बेटा भी उसकी देखभाल के दौरान सक्रमण की चपेट में आ गया है। बुधवार शाम से उसे भी बुखार आ रहा था। इसके बावजूद बिना किसी रोकटोक कोविड वार्ड में परिजनों की बिना पीपीई किट के आवाजाही अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है।

दूसरे मृतक सीबी मेश्राम को दो दिन पहले ही यहां भर्ती किया गया था। उन्हें निमोनिया था। अस्पताल प्रबंधन की मांने तो उनकी कोरोना जांच कराई गई, लेकिन एंटीजन टेस्ट निगेटिव थी। ऐसे में आरटीपीसीआर सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया। रिपोर्ट नहीं आने की स्थिति में उनको कोरोना संदिग्ध वार्ड में रख दिया गया। जहां गुरुवार को सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।


अस्पताल का तर्क

अस्पताल के जिम्मेदारों का कहना है कि आक्सीजन की कोई कमी नहीं है। बुधवार को ही 50 सिलेंडर भरे हुए आए हैं। परिजन खुद डेड बाडी ले जा रहे थे, जब उन पर एफआइआर करने को कहा तो वे ऐसी बातें बोल रहे हैं।

सिविल सर्जन राकेश श्रीवास्तव कहते हैं कि रामरती की हालत गंभीर थी। परिजनों को पहले ही बता दिया था कि उनकी स्थिति ठीक नहीं है। मरीज की मौत के बाद परिजन शव को घर ले जाने के लिए अड़े हुए थे। रामरती कोरोना पाजिटिव थी और उनका शव परिजनों को नहीं दिया जा सकता था, इसलिए पुलिस बुलानी पड़ी।

 

हमीदिया में हुई थी लापरवाही

इससे पहले 11 दिसंबर 2020 को भी राजधानी के हमीदिया अस्पताल में कोरोना वार्ड में दो घंटे बिजली गुल हो जाने से आक्सीजन सप्लाई बंद हो गई थी। इस दौरान वहां आक्सीजन सपोर्ट पर तीन मरीज थे, जिनकी मौत हो गई थी।

 

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