
भोपालः पैनिक अटैक अचानक डर लगना, कंपन, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, दिल की धड़कने कम होना, साथ ही अचानक चिंता होने लगना पैनिक अटैक हो सकता है। पैनिक अटैक किसी भी व्यक्ति को कुछ ही सेकंड में होना शुरु हो सकता है। एक नॉर्मल पैनिक अटैक कुछ सेकंड से लेकर घंटों तक के लिए भी रह सकता है। पैनिक अटैक में होने वाली संबंधित पीड़ा असहनीय हो जाती है, जिसपर कुछ देर के लिए तो, कोई भी दवा असर नहीं करती। हां, अगर इसमें कुछ सावधानी बरती जाएं तो इसे आने से रोका जा सकता है। पैनिक अटैक में मुख्य रूप से व्यक्ति का दिल काफी कमजोर हो जता है, जिसके कारण उसपर कोई छोटी से छोटी चीज भी भारी पीड़ा का करण बन लकती है।पीड़ित व्यक्ति को अपने दिल को तंदुरुस्त रखने के लिए हर 30 में कम से कम 2 मिनट के लिए शांत रखना चाहिए। इससे दिल स्वस्थ होगा और पैनिक अटैक की समस्या कम होगी।
दो तरह के होते हैं पैनिक अटैक
1-अपेक्षित अटैक
इस तरह के अटैक में व्यक्ति को अटैक आने से पहले ही अहसास होने लगता है। उदाहरण स्वरूप अगर किसी व्यक्ति को भीड़-भाड़ वाले इलाके से घबराहट होती है। ऐसे में अगर उस व्यक्ति को किसी भीड़भाड़ वाले इलाके में भेज दिया जाए तो उसे घबराहट होना स्वभाविक है। इस तरह के लोगों को क्लॉस्ट्रोफोबिक के रूप में जाना जाता है।
2-अप्रत्याशित अटैक
इस तरह का अटैक बिना किसी संकेत के अचानक आ जाता है। आमतौर पर ये व्यक्ति के आराम के समय आता है या किसी गंभीर काम के समय, जिसमें किसी और किसी चीज का ध्यान ही ना रहे। ऐसी स्थिति में व्यक्ति समझ भी नहीं पाता कि, ये स्थिति उसपर कब से बनी हुई है। आमतौर पर, पैनिक अटैक अक्सर युवावस्था के दौरान ही शुरू हो जाते हैं। एक सर्वे के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पैनिक अटैक अधिक आते हैं। वैसे तो ये किसी भी तरह के मानसिक तनाव के दौरान आ सकता है। हालांकि, अब तक पैनिक अटैक के स्पष्ट कारणों का पूरी तरह से पता नहीं लग सका है।
Published on:
16 May 2019 03:48 pm
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