
"रद्दी के मोल" बढ़े
भोपाल. अखबार की रद्दी के दाम मानो आसमान पर पहुंच गए हैं. महज 10, 12 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकने वाली रद्दी की कीमत एकाएक तीन गुना तक बढ़ गई है. इतना ही नहीं, बाजार विशेषज्ञों के अनुसार रद्दी के दामों में अभी और इजाफा होना तय सा है. दरअसल केंद्र सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक बैन कर दिए जाने के कारण रद्दी की पूछपरख बढ़ी है। अखबारी कागज और अन्य कागजों से बने लिफाफों को प्लास्टिक थैलियों के सबसे बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. इसी के साथ कागज से बने लिफाफों की मांग भी बढ़ गई है।
प्रदेश के कई शहरों में रद्दी 30 से 35 रुपए प्रति किलो के भाव में बिक रही है। केंद्र सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगने के बाद इसकी कीमतों में ये इजाफा हुआ है. इससे पहले पुराने अखबारी कागज महज 10, 12 रुपए प्रति किलो के भाव में खरीदे जा रहे थे. सिंगल यूज प्लास्टिक से बने 19 तरह के आइटमों पर बैन के बाद दुकानदार इनके विकल्प तलाशने में लग गए हैं। अखबारी कागज से बने लिफाफों को प्लास्टिक थैलियों के सबसे अच्छे विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. बाजार मेें कागज से बने लिफाफों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। यही कारण है कि अब कागज की रद्दी के भाव भी रिकार्ड तोड़ रहे हैं।
इस समय कागज की रद्दी की कीमत औसतन 30 रुपए प्रति किलो हो गई है, लेकिन इससे बनने वाले लिफाफों की जबर्दस्त डिमांड होने से रद्दी की कीमत और बढ़ने की संभावना है। मांग बढ़ते ही कई घरों में अखबारी कागज के लिफाफे बनाने का काम एक बार फिर चल निकला है। कई स्व सहायता समूहों ने फिर से ये लिफाफे बनाने का काम शुरू कर दिया है। समोसे-कचौड़ी के कारोबार सहित किराना की दुकानों में इनकी सबसे ज्यादा मांग है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कई लोग फिर से लिफाफा निर्माण के काम में लौटे हैं। लिफाफों की मांग बढ़ने से अखबारी कागज ही नहीं, अन्य कागजों की रद्दी की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
Published on:
13 Jul 2022 08:24 pm
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