31 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एमपी के 8 शहरों में चलेंगी 972 ई-बसें ! करना पड़ेगा इंतजार

MP News: केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के आठ नगर निगमों में पीएम ई-बस सेवा के तहत 972 बसों के संचालन को मंजूरी दी है।

2 min read
Google source verification
e-bus services

e-bus services (Photo Source - Patrika)

MP News: मध्यप्रदेश के आठ शहरों में शुरू होने वाली पीएम ई-बस सेवा का इंतजार और लंबा हो गया है। डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है, वहीं टिकटिंग एजेंसी का चयन भी लंबित है। ऐसे में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, देवास और सतना में 972 ई-बसों का संचालन शुरू होने में अभी कम से कम दो से तीन माह और लगने की संभावना है। इस देरी ने तब और गंभीर रूप ले लिया है, जब कई शहरों में डीजल बसें चरणबद्ध तरीके से बंद होती जा रही हैं और आम यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के आठ नगर निगमों में पीएम ई-बस सेवा के तहत 972 बसों के संचालन को मंजूरी दी है। इन बसों के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन सहायक व्यवस्थाएं समय पर तैयार न होने से सेवा धरातल पर नहीं उतर पा रही है। सबसे बड़ी अड़चन चार्जिंग स्टेशन, डिपो और संबंधित आधारभूत ढांचे के निर्माण में सामने आई है। निकायों को इसके लिए 63 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है, बावजूद इसके अधिकांश शहरों में काम अधूरा है

इंदौर में 270, भोपाल में चलेंगी 195 ई-बसें

केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की मंजूरी दी है। इसमें सबसे ज्यादा 270 ई-बसें इंदौर को मिली हैं, जबकि राजधानी भोपाल को केवल 195 बसें मिली हैं। जबलपुर में 200, ग्वालियर में 100, उज्जैन में 100, सागर में 32, देवास में 55 और सतना में 20 ई-बसें संचालित की जाएंगी। लेकिन जमीनी तैयारियां अधूरी होने से यह परियोजना फिलहाल फाइलों और निर्माण स्थलों के बीच अटकी हुई है।

संचालन में लेट-लतीफी से यह नुकसान

-निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ने से यात्रा महंगी हो रही है

-प्रदूषण कम करने का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है

-सरकार की ई-मोबिलिटी योजना पर सवाल उठ रहे हैं।

-जारी राशि का समयबद्ध उपयोग न होने से लागत बढ़ सकती है

-कमजोर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से कामकाजी, छात्र और निम्न आय वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित, ट्रैफिक पर भी असर

टिकटिंग एजेंसी का चयन नहीं

परियोजना में बड़ी बाधा टिकिटिंग एजेंसी के चयन को लेकर हैं। नगर निकायों ने अब तक इसके लिए टेंडर तक जारी नहीं किए है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि टेंडरिंग, चयन और तकनीकी एकीकरण की प्रक्रिया में ही करीब दो माह लग सकते हैं।

जबलपुर-ग्वालियर आगे, छोटे शहर सुस्त

अधिकारियों के अनुसार जबलपुर में डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काम 85 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है, जिससे वह इस मामले में सबसे आगे है। ग्वालियर में भी प्रगति संतोषजनक है। इसके विपरीत राजधानी भोपाल, इंदौर और अन्य शहरों में काम अपेक्षाकृत धीमा है। भोपाल में बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में बनाए जा रहे चार्जिंग स्टेशनों में अभी करीब 30% काम शेष है। इंदौर में नायता मुंडला और देवास नाका स्थित चार्जिंग स्टेशन भी अभी पूरे नहीं हो पाए हैं। सतना, उज्जैन और कटनी जैसे शहरों में स्थिति और धीमी बताई जा रही है।

कंपनियां करेंगी संचालन

सरकार ने सुगम परिवहन सेवा के लिए प्रदेश स्तर पर एक राज्य स्तरीय और सात सहायक कंपनियां बनाई हैं। फिलहाल इंदौर और उज्जैन की ई-बसों का संचालन परिवहन विभाग ने अपने हाथ में ले लिया है। विभाग के अनुसार, आने वाले समय में अन्य शहरों के सार्वजनिक परिवहन संचालन की जिम्मेदारी भी चरणबद्ध तरीके से इन्हीं कंपनियों को सौंपी जाएगी।