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एमपी में कर्मचारियों के भत्तों व वेतन वृद्धि की राह खुली, हाईकोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील

Salary- Allowances- कोर्ट ने 9 अप्रेल को उनके मामले में दिए गए निर्णय को उचित ठहराते हुए प्रदेश सरकार की अपील निरस्त कर दी

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Rs 2547 Crore Deposited into Accounts of Wheat Farmers in MP

Rs 2547 Crore Deposited into Accounts of Wheat Farmers in MP

Salary- Allowances- मध्यप्रदेश में लाखों संविदा व आउटसोर्स कर्मियों के भत्तों व वेतन वृद्धि की राह खुल गई है। कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में मप्र हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील पर स्थगन देने से इनकार कर दिया, जिसमें सिंगल बेंच द्वारा संविदा कर्मियों के पक्ष में दिए गए निर्णय को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह बड़े वर्ग के भविष्य से जुड़ा मसला है, इसलिए इस पर स्थगन नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने का हाईकोर्ट द्वारा दिया गया आदेश प्रभावी बना रहेगा। इस संबंध में कोर्ट ने सरकार को सिंगल बेंच के निर्णय का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

सिंगल बेंच ने 9 अप्रेल को कहा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए

हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने 9 अप्रेल को कहा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की 7 अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए। जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगियों को विनियमित किया गया और उन्हें वेतनमान, भत्ते व वार्षिक वेतन वृद्धि दी गई, वही लाभ अब संविदा कर्मियों को भी दिया जाएगा।

जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील की थी। अधिवकता ओपी द्विवेदी ने बताया कि कोर्ट ने 9 अप्रेल को उनके मामले में दिए गए निर्णय को उचित ठहराते हुए प्रदेश सरकार की अपील निरस्त कर दी। जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश पर स्थगन देने से साफ इंकार कर दिया जिसमें संविदा कर्मचारियों को स्थायी कर्मी के रूप में वर्गीकृत किया गया था।

इसी के साथ 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स, अंशकालिक कर्मियों को वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ के लिए रास्ता क्लियर

हाईकोर्ट में मप्र सरकार की अपील खारिज हो जाने से मप्र के संविदा कर्मियों को खासी राहत मिली है। इसी के साथ 5 लाख से ज्यादा संविदा और आउटसोर्स, अंशकालिक कर्मियों को वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ के लिए रास्ता क्लियर हुआ है। हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सिंगल बेंच के समक्ष नए दस्तावेज पेश करने की छूट दी है लेकिन तब तक संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतनमान के संबंध में दिया गया पुराना आदेश प्रभावी रहेगा।