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पत्रिका टॉक शो: भोपाल की बेहतरी के लिए शहर के चर्चित इनफ्लूएंसर करेंगे इन्स्पायर

- सोशल मीडिया के सहारे अपने शहर की फ्रिक करते हैं और जरूरतमंद लोगों की हरसंभवर मदद भी। खास बात ये है कि इन युवाओं को अपने चाहने वालों का एक लंबा कारवां भी है। इसलिए पत्रिका ने प्रदेश मुख्यालय में शहर के युवा इनफ्लूएंसर के साथ ब्रांड भोपाल 'चैलेंजेस' विषय पर एक टॉक शो का आयोजन किया।

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भोपाल@ जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है...ये मशहूर पक्तियां भोपाल शहर के उन युवाओं पर बेहद सटीक बैठती है, जो सोशल मीडिया के सहारे अपने शहर की फ्रिक करते हैं और जरूरतमंद लोगों की हरसंभवर मदद भी। खास बात ये है कि इन युवाओं को अपने चाहने वालों का एक लंबा कारवां भी है। इसलिए पत्रिका ने प्रदेश मुख्यालय में शहर के युवा इनफ्लूएंसर के साथ ब्रांड भोपाल 'चैलेंजेस' विषय पर एक टॉक शो का आयोजन किया। जिसमें शहर के चर्चित इन्फ्लूएंसर ने शिकरत कर बताया कि हमारे शहर में क्या खास है और क्या खास करने की जरूरत है। टॉक- शो में पत्रिका के राज्य संपादक विजय चौधरी व स्थानीय संपादक महेंद्र प्रताप सिंह बिन्दुओं पर ध्यान आकर्षित किया।

पढ़िए युवा राजधानी भोपाल को लेकर युवा इन्फ्लूएंसर की राय...


आर्ट और कल्चर के मामले में हमारा प्रदेश हमेशा से समृद्ध रहा है। लेकिन पिछले कुछ सालों से इन गतिविधियों में बेहद गिरावट आई है। जैसे भारत भवन में ऐसे प्रोग्राम पहले खूब होते थे। लेकिन अब कोरोना के बाद से सब बंद है। साथ ही गोंड आर्ट जिसकी कितनी महत्ता है। ऐसी विधायों से युवाओं को परिचित कराने का कोई सशक्त माध्यम ही नहीं बचा है।
- दिव्या सिंह, फैशन ब्लॉगर

शहर में इतनी फिल्मों की सलाना शूटिंग होती है लेकिन लोकल युवाओं को मौका नहीं मिलता है। क्योंकि यहां कास्टिंग डायरेक्टर का अभाव है। और यदि कहीं ऑडिशन होता भी है तो वहां पारदर्शिता नहीं बरती जाती है। ऐसे में लोकल टैलेंट को सही मंच नहीं मिल पाता है।
प्रबल भट्ट, कंटेट क्रिएटर


लोगों को जागरूक करना सबसे ज्यादा जरूरी है। जब लोग जागरूक होंगे तभी समाज, शहर और प्रदेश का विकास संभव है। साथ ही इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि सरकार पॉलिसी तो बना देती है लेकिन उसका क्रियान्वयन समय पर नहीं होता। इस दिशा में कैसे प्रभावी कदम उठाए जाए इस पर मिलकर विचार करना होगा।

सुशांत कौशल, कंटेट क्रिएटर


हमारा शहर कई मायनों में बेहद खूबसूरत है। लेकिन छोटी- छोटी लापरवाही इस पर दाग लगाती है। ज्यादातर लोग भोपाल और नागपुर को एक शहर के जैसे देखते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में मैंने देखा कि नागपुर में साफ- सफाई और लोगों में अनुशासन बढ़ा है। लेकिन भोपाल में ये बदलाव कम देखने को मिला है। स्ट्रीट लाइटे जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी कई जगह अभाव है।

बुरहानुद्दीन, कंटेट क्रिएटर


हमारे समाज में अब एनफ्लूएंसर का भी एक बड़ा योगदान है। कुछ लोगों ने तो कोरोना के समय इतना बेहतरीन काम किया जिसे बताया नहीं जा सकता। वैसे भी जो मुद्दे सामने नहीं आ पते किसी कारण बस उन्हें भी सोशल मीडिया के माध्यम से उठाते हैं। जाहिर तौर पर ये बदलते वक्त के साथ एक बड़ा बदलाव है जिसे हमें स्वीकार करना होगा।
- जसकरण सिंह मनोचा, सोशल मीडिया एक्सपर्ट

शहर में बड़ा तालाब सबसे खूबसूरत लोकेशन में से एक है, लेकिन यहां गंदगी पसरी रहती है। इस क्षेत्र को प्लास्टिक फ्री जोन बनाना चाहिए। पिपलानी में सारंग पाणी झील किनारे बदबू के कारण कोई जा नहीं सकता। आम जनता सहयोग को तैयार है, प्रशासन को इसकी सफाई की पहल करना चाहिए। इसे टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित करना चाहिए।
- मयंक तिवारी, फोटोग्राफर एंड ब्लॉगर

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी है और हाईकोर्ट की बेंच भोपाल में होना अत्यंत आवश्यक है भोपाल में हाई कोर्ट ना होने के कारण अभी हाईकोर्ट केस के लिए शहर की जनता से लेकर ब्यूरोक्रेट्स एवं वकीलों को जबलपुर जाना पड़ता है।बेंच होगी तो जनता को भी भोपाल से जबलपुर मुकदमों के लिए चक्कर लगाने नही जाना पड़ेगा राजधानी के वकीलों को भी यही भोपाल में रहते हुए हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने का मौका मिलेगा।

आनंद शर्मा, एड़वोकेट

फाउंडर : भोपाल सिटी लाइव

भोपाल को ब्रान्ड की जरूरत है। शहर में रोजगार के साधन नहीं हैं। बौद्धिकों को बाहर जाना पड़ता है। इससे शहर का ही नुकसान हो रहा है। राजधानी को इंवेस्टमेंट सिटी के रूप में पहचान दिलाने की कोशिश होनी चाहिए। बड़े उद्योगपति निवेश करने आएं इसके लिए शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के होटल और इंफ्रा डेवलप करने की जरूरत है, तभी शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिलेगी।
- स्पर्श द्विवेदी, कंटेट क्रिएटर


फूड कल्चर तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन शहर में अभी मॉडर्न रेस्टोरेंट का कंसेप्ट नहीं है। अन्य शहरों की तरह लाइव किचन कॉन्सेप्ट पर फोकस करना चाहिए, हाइजीन मेंटेंन करना चाहिए। इस पर अभी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
ऊरूज जाहिद, फूड ब्लॉगर


शहर में एयर कनेक्टिविटी बड़ी समस्या है। बड़े शहरों के लिए या तो फ्लाइट नहीं है या जो हंै वह कुछ ही दिनों में यात्रियों के अभाव में बंद हो जाती हैं। लोगों को बस में दो गुना-तीन गुना किराया देकर अन्य शहरों की यात्रा करना पड़ती है। फ्लाइट शुरू होने से बस संचालकों की मनमानी रुकेगी तो समय भी बचेगा। अभी आइटी या अन्य इंडस्ट्री भी इसलिए नहीं आती क्योंकि एयर कनेक्टिविटी बहुत खराब है।
अर्पित शर्मा, इन्फ्लूएंसर

राजधानी होने बाद भी एजुकेशन की स्थिति अच्छी नहीं है। स्टूडेंट्स को बड़े कोर्स के लिए अन्य शहरों में जाना पड़ता है। यहां के यूथ अपने शहर के बारे में अच्छी तरह नहीं बता पाते। शहर की अलग पहचान स्थापित करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होंगे।

सिद्घार्थ जैन, एंकर एंड मेंटल हेल्थ इन्फ्लूएंसर


भोपाल में तालाब, पहाड़, झरने, जंगल सभी कुछ हैं। शहर के आसपास वन्य जीवों का भी बसेरा है। अलग-अलग तरह की टूरिस्ट डेस्टिनेशन की खूबी अकेले भोपाल शहर में ही है। फिर भी यह अंतराष्ट्रीय स्तर तो छोडि़ए राष्ट्रीय स्तर के टूरिज्म मैप पर जगह नहीं बना पा रहा।

आमीर खान, कंटेट क्रिएटर

शहर को टूरिस्ट डेस्टिनेशन की लिस्ट में शामिल होने से रोकने का एक प्रमुख कारण यहां टूरिस्ट गाइड का न होना भी है। पर्यटकों के लिए पर्याप्त सुविधाए भी नहीं हैं। यात्रियों के लिए जो बस चलती है, उसमें गाइड तक नहीं होता। न ही टूरिस्ट स्पॉट पर गाइड या ऑडियो-विजुअल गाइड हैं। शहर में स्मारक, महल, ऐतिहासिक गेट हैं, फिर भी ये शहर की शान नहीं बन पाए।

चिन्मय गोधा, सोशल मीडिया एक्सपर्ट


देश में स्टैंडअप कॉमेडी शो का क्रेज बढ़ा है। युवा कवि-कॉमेडियन सहित इस तरह की फील्ड से जुड़े लोगों के लिए शो करने की कोई जगह नहीं है। जो ऑडिटोरियम हैं, वे बड़े और महंगे हैं कि एक स्ट्रग्लिंग आर्टिस्ट उनका किराया अफोर्ड नहीं कर सकते। इसके बाद इनकी अनुमति मिलने की प्रक्रिया इतनी लंबी है कि लोग इससे बचते हैं।
- सुमित, स्टेंडअप कॉमेडिन

आर्टिस्ट को अपनी वैल्यू समझनी होगी। अभी शहर में जो आर्टिस्ट शो करते हैं, लोग ये उम्मीद करते हैं कि उन्हें फ्री में देखने का मौका मिले। शहर में अभी कल्चरल गतिविधियां होती हैं, ज्यादातर में आर्टिस्ट को कुछ नहीं मिलता। ये प्रथा अब बंद होना चाहिए।
- आशीर्वाद (एडी), मैजिशियन


सभी को मिलकर शहर के बदलाव के लिए छोटी-छोटी पहल करनी होगी। सिर्फ सरकार के भरोसे रहकर बदलाव मुमकिन नहीं। शहर की समस्याओं के लिए भी हमें आगे आना होगा। जैसे कई शहरों में प्लॉगिंग रन होने लगी है, यहां भी हर सप्ताह या हर माह एक रन होना चाहिए। इससे लोग आपस में मिल भी सकेंगे और शहर साफ भी हो जाएगा।

- सौम्या गुप्ता, फूड ब्लॉगर

भोपाल में पिछले 5-7 सालों में फिल्म शूटिंग बढ़ी है, लेकिन फिल्मों में भी इसे एक स्मॉल टाउन के रूप में ही दिखाया जाता है। फिल्म डायरेक्टर्स के मन में भी यही छवि है कि यहां शूटिंग करना सस्ता है। गांवों की झलक भी दिखाई जा सकती है। आर्टिस्ट भी सस्ते हैं। इस मानसिकता से निकलने की जरूरत है।

- धनंजय शर्मा, कंटेट क्रिएटर

शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करते समय ध्यान नहीं दिया, विकास के नाम पर डेंजर जोन बना दिए गए। इससे एक्सीडेंट बढ़े हैं। नगर निगम को इस पर ध्यान देना होगा।
- साईम खान, फूड ब्लॉगर

- शहर में आइटी पार्क तो हैं, लेकिन बड़ी कंपनियां नहीं आईं। यह आती तो रोजगार बढ़ता। राजधानी में इंटरनेशनल लेवल का एक क्रिकेट स्टेडियम तक नहीं है।
- डॉ. मुमित शाह, डेंटिस्ट एंड फूड ब्लॉगर

शहर में अतिक्रमण बड़ी समस्या है। लालघाटी क्षेत्र हो या कोई अन्य। फ्लाई ओवर के नीचे अतिक्रमण तेजी से फैल रहा है। इन जगहों को पार्क या प्ले एरिया के रूप में विकसित किया जा सकता है। नगर निगम को ध्यान देना चाहिए।
- झलक, लाइफस्टाइल इन्फ्लूएंसर