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गांधी जयंती पर विशेष, बापू पर आधारित कविताएं जो कुछ ही पंक्तियों में उनका जीवन दर्शन कराती हैं

वैसे तो महात्मा गांधी के जीवन आदर्श और कर्म बहुत विशाल हैं, जिन्हें एक साथ संजोया जाना संभव नहीं है, लेकिन छात्रों द्वारा लिखी गई ये कविताएं बापू के जीवन कार्यों संजोने में कामयाब हो सकीं हैं। जानिए उन खास पंक्तियों के बारे में...।

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गांधी जयंती पर विशेष, बापू पर आधारित कविताएं जो कुछ ही पंक्तियों में उनका जीवन दर्शन कराती हैं

भोपाल/ भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी के जन्म दिवस की आज 150वीं वर्षगांठ है। उनके इस दुनिया से जाने के बावजूद आज भी देश उन्हें बापू या महात्मा गांधी के नाम पुकारता है। हर साल 02 अक्टूबर के दिन देशवासी उनके विचारों को याद करके उनके संकल्पित होने का प्रण लेते हैं। इस बार भी देशवासियों ने उनके विचार पर आधारित स्वच्छता का संकल्प लिया है। मध्य प्रदेश समेत देशभर में इसपर आयोजन भी किये जा रहे हैं। ताकि, लोगों को बापू के आदर्शों के अनुसार स्वच्छता के प्रति जागरुक किया जा सके।

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कविता से बापू का जीवन दर्शन

मध्य प्रदेश में भी जगह जगह गांधी जयंती के मौके पर राजनीतिक और सामाजिक आयोजन किये जा रहे हैं। सभी उन्हें अहिंसावादी आचरण और अपनी वचनबद्धता के लिए याद हर साल याद करते है। गांधी जयंती के मौके पर कई स्कूली छात्रों ने उनके जीवन दर्शन हेतु खास कविताएं हैं, वैसे तो महात्मा गांधी के जीवन आदर्श और कर्म बहुत विशाल हैं, जिन्हें एक साथ संजोया जाना संभव नहीं है, लेकिन छात्रों द्वारा लिखी गई ये कविताएं बापू के जीवन कार्यों संजोने में कामयाब हो सकीं हैं। जानिए उन खास पंक्तियों के बारे में...।

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महात्मा गांधी की खास कविताएं

थी, पराधीनता की बेड़ी, उनके पैरों से, चिपटी थी।

भारत मां के, पवित्र तन पर, गोरों की फौजें, पलती थीं।

उस घर में उनका जन्म हुआ, था चमन हमारा धन्य हुआ।

था सत्य, अहिंसा, देशप्रेम, उसकी रग-रग में, भिदा-सना।

सत्य-‍अहिंसा दो शब्दों के, अद्भुत अस्त्र उठाते थे।

रह लिए गुलाम, बहुत दिन तक, अब नहीं गुलाम रहेंगे हम।

डांडी‍, समुद्र तट पर आकर, सब अपना नमक बनाए थे।

भारत के, कोने-कोने से, गांधी का नाम, उछलता था।

मानवता के, अधिकारों की, थी बात, शांति से कही गई।

अपने सशस्त्र दुश्मन पर भी, बढ़कर आघात नहीं करना।

सच की ताकत के, आगे थी, गोरों की सत्ता, कांप रही।

अत्याचारों का, अंत हुआ, गांधी का भारत हर्षाया।