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घर की समस्याओं से जूझ रहा था अश्विनी, सुसाइड नोट पढ़कर खुल जाएंगी आपकी आंखें

वाइफ फेसबुक और व्हाट्सअप पर रहती है बिजी, परेशान होकर कर रहा हूं सुसाइड, जांबाज पुलिस ने बचाई युवक की जान

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कोर्ट सेे बना दिया था जेल वारंट, पुलिस को चकमा देकर भागा आरोपी

भोपाल। महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा के खिलाफ कई कानून है, पर पुरूष अगर घरेलू हिंसा से प्रताड़ित हो तो उसके लिए कोई कानून नहीं है। इसी बात से परेशान होकर तलैया थाना क्षेत्र के युवक अश्विनी सिंह ने आत्महत्या करने की कोशिश की। पुलिस को सूचना मिलते ही, मौके पर पहुंचे जांबाज सिपाही ने तालाब में कूदकर युवक की जान बचा ली।युवक ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि वाइफ फेसबुक और व्हाट्सअप पर रहती है बिजी रहती है, मम्मी पापा खाना बनाते है। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा हूं।

जांबाज सिपाही ने बचाई युवक की जान
राजधानी भोपाल के वीआईपी रोड स्थ्ति तालाब में युवक ने कूदकर जान देने की कोशिश की। आसपास के लोगों ने युवक की आत्महत्या को देखते हुए, मौके की सूचना पुलिस को दी। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे तलैया थाने में पदस्थ जांबाज सिपाही नेपाल सिंह चौहान ने तालाब में कूदकर युवक को सही सलामत बचा लिया।

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यह लिखा था सुसाइड नोट में
सुसाइड नोट में युवक ने लिखा सॉरी माय डियर फैमिली एंड फ्रेंड, मैं आज अपनी जिंदगी की लड़ाई हार गया हूं। एक समय था, जब मैं दूसरों को प्रेरित करता था। आज मैं पारिवारिक झगड़ों से परेशान हो गया हूं। मेरी वाइफ से रोज होने वाले झगड़ों की वजह से मैं तनाव में हूं। वह बहुत जिद्दी है और हमेशा अपनी मनमानी करती है। कई लोगों द्वारा समझाने के बाद भी उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ। मेरे बूढ़े मां बाप भी उसके सनकीपन से परेशान हैं। मम्मी की तबियत खराब रहती है, फिर भी उनको खाना बनाना पड़ता है। मेरी वाइफ फेसबुक और व्हाट्सअप में बिजी रहती है। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा हूं। मेरे सास ससुर भी उसे समझाने के बजाय मेरी पत्नी का ही साइड लेते हैं।

परेशान होकर मैं कई बार थाने गया, तो बोला लेडिज के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं होती है। पत्नी अगर झूठी एफआईआर भी करें, तो तुरंत कार्रवाई होती है। लेकिन कानून प्रताड़ित पति का साथ नहीं देता है। पति के पक्ष में घरेलू हिंसा का कानून नहीं है। चाहे पत्नी, पति के साथ मारपीट करें, पर कोर्इ एफआईआर नहीं होती है। मेरा बेटा बहुत इंटीजेंट है, पर घर में रोज लड़ाई देखकर वह भी तनाव में रहता है।

मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूं। डेली की चिक चिक से परेशान होकर, अब मैैं अपनी जिंदगी खत्म कर रहा हूं। भैया, मम्मी—पापा का ख्याल रखना। हो सके तो मुझे माफ कर देना। मैं अपने मम्मी पापा की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया।