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विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रक नियुक्त करने की तैयारी

- विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रक नियुक्त करने की तैयारी- परीक्षा परिणाम देरी हुई तो जिम्मेदार होंगे परीक्षा नियंत्रक- विश्वविद्यालयों में ३ से ४ माह देरी से घोषित हो रहे हैं परीक्षा परिणाम

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भोपाल

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Ashok Gautam

Aug 10, 2019

university

भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग परीक्षा और परीक्षा परिणामों के ढर्रे सुधारने के लिए विश्वविद्यालयों में एक अलग से परीक्षा नियंत्रक नियुक्त करने की तैयारी कर रहा है। उन्हें परीक्षा के अलावा कोई अन्य कार्य विश्वविद्यालय नहीं दे सकेंगे।

ये कॉलेजों से लेकर विश्वविद्यालयों तक की परीक्षाएं आयोजित कराएंगे और कलेंडर के अनुसार परिणाम जारी करेंगे। देरी से परीक्षा कराने और परिणाम में लेट लतीफी करने पर परीक्षा नियंत्रत जिम्मेदार होंगे। ये परीक्षा में गुणवत्ता सुधार के साथ ही उसमें समय-समय पर नवाचार भी करेंगे।

उच्च शिक्षा विभाग विश्वविद्यालयों में 28 सहायक रजिस्ट्रारों की नियुक्ति के बाद अब वहां परीक्षा नियंत्रक के पद निर्मित करने जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक की पदस्थापना के बाद सरकार पर प्रति वर्ष आने वाले वित्तीय भार का भी परीक्षण किया जा रहा है।

प्रस्ताव तैयार होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग इसे कैबिनेट की बैठक में रखेगा। विभाग विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रकों के पद इसलिए निर्मित करना चाह रहा है क्योंकि सभी विश्विविद्यालयों में परीक्षा और परिणाम घोषित करने का कार्यक्रम 3 से लेकर 4 माह पीछे चल रहा है। विश्वविद्यालयों में फुलफिल परीक्षा नियंत्रक होने से परीक्षाएं समय पर होंगी और परिणाम भी समय पर जारी किए जा सकेंगे।

परीक्षा नियंत्रक विश्वविद्यालयों में सिर्फ परीक्षा फार्म भरवाने से लेकर परीक्षा परिणाम जारी करने का काम करेंगे, उन्हें कोई दूसरे काम नहीं दिए जाएंगे। वह परीक्षा प्रणाली में सुधार, प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और परीक्षा से जुड़ी सिफारिशें भी समय-समय पर उच्च शिक्षा विभाग को देने का काम करेंगे।

प्रभारी रजिस्ट्रारों के भरोसे कई विश्वविद्यालय
प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालय प्रभारी रजिस्ट्रारों के भरोसे चल रहे हैं। राजधानी के बरकतउत्ला विश्वविद्यालय सहित करीब 7 विश्वविद्यालयों में फुलफिल रजिस्ट्रार नहीं हैं। प्रभारी रजिस्ट्रारों के चलते विश्वविद्यालय में कई कार्य प्रभावित होते हैं।

कई एेसे निर्णय जो प्रभारी रजिस्ट्रारों को खुद लेना चाहिए, वे यह निर्णय उच्च शिक्षा विभाग और कुलपतियों के भरोसे छोड़ देते हैं। इससे विश्वविद्यालयों के कई काम प्रभावित होता है। दरअसल बैंक लॉक के चलते रजिस्ट्रारों की पदोन्नति वर्षों से रुकी हुई है।