
भोपाल। जिस साइको किलर ने अपने मां-बाप को बेरहमी से मौत के घाट उतारकर उन्हें अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं होने दिया। वहीं दरिंदा अब उन्हें मोक्ष दिलाने की बात करता है। जीहां हम बात कर रहे हैं साइको किलर उदयन दास की। जिसने भोपाल में अपनी गर्ल फ्रेंड का कत्ल कर उसे सीमेंट के चबूतरे में दफन कर दिया था। जिसके बाद सामने आया था कि सिर्फ डांटने की वजह से उसने अपने मां-बाप का भी कत्ल कर दिया था। वहीं उदयन दास पश्चिम बंगाल की कोर्ट में अपने मां-बाप को मोक्ष दिलाने की अर्जी लेकर पहुंचा है।
पश्चिम बंगाल की बांकुरा कोर्ट में इस साइको किलर ने आवेदन देकर श्राद्ध पक्ष में अपने माता पिता का तर्पण करने की बात कही है। इसके साथ ही उसने रायपुर में जहां माता-पिता को जमीन में गाड़ दिया था, वहां उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करने की भी इच्छा जताई है। फिलहाल कोर्ट ने उदयन दास के आवेदन पर कोई निर्णय नहीं सुनाया है।
देशभर में चर्चा का विषय रहा आकांक्षा मर्डर केस
भोपाल में पला-बढ़ा सीरियल किलर उदयन दास की मुलाकात पश्चिम बंगाल की ही लड़की आकांक्षा से फेसबुक पर हुई थी। इसके बाद वह उदयन से प्यार करने लगी। इसके बाद वह घर से भागकर उदयन के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी थी। उसने आकांक्षा का गला दबाकर हत्या कर दी थी और उसे घर की पहली मंजिल पर ही चबूतरे में चुनवा दिया था।
कैसे किया मर्डर
- 14 जुलाई 2016 को रात में जब आकांक्षा से उदयन की बहस हुई तो आकांक्षा सो गई, लेकिन उदयन रादभर जागता रहा और मर्डर के प्लानिंग करने लगा।
- अगले दिन सुबह वह आकांक्षा की छाती पर बैठ गया और तकिए से उसके तब तक मुंह दबाए रखा जब तक कि उसकी सांसे थम नहीं गई। इसके बाद भी वह शांत नहीं हुआ और उसने हाथों से भी उसका गला दबा दिया।
- आकांक्षा का गला दबाने के बाद वह उसकी बाडी को घीटकर दूसरे कमरे में ले गया और घर में पड़ा पुराना बॉक्स खालीकर उसमें शव को बंद कर दिया। थोड़ी देर बाद उसने बाक्स में सीमेंट का घोल भी भर दिया।
- उस बॉक्स में में घोल भरने और चबूतरा बनाने में उसने कुल 14-15 बोरी सीमेंट का उपयोग किया।
क्यों किया ऐसा
- उदयन को इतना गुस्सा इसलिए आया कि उसके साथ पत्नी की तरह लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रही आकांक्षा अपने दोस्त से फोन पर अक्सर बात करती थी और उसे यह पसंद नहीं था। इसके बाद मामला उजागर होने के बाद पता चला कि उदयन ने तो कई सालों पहले अपने माता पिता की भी हत्या करके उन्हें भी रायपुर स्थित घर के परिसर में दफन कर दिया था।
पेंशन और मकान किराए के पैसों पर करता था ऐश
-आइटियन बताने वाला उदयन मात्र 12 तक पढ़ा-लिखा है। उसके अब तक सभी को IITian होने वाली बात बताई थी।
- उदयन के पिता वीके दास बीएचईएल में फोरमैन थे। कुछ साल पहले उनकी डेथ हो चुकी है।
-उदयन की मां भोपाल के विध्यांचल भवन में एनालिस्ट के पद से रिटायर हुई थीं। उनकी पेंशन करीब 30 हजार रुपए है। फेडरल बैंक में पिता पीके दास के साथ ज्वाइंट अकाउंट है।
- इस अकाउंट में साढ़े आठ लाख रुपए की FD है। उदयन आकांक्षा से के खाते से सवा लाख रुपए निकाल चुका है। 8 नवंबर को नोटबंदी से पहले आकांक्षा के अकाउंट से दो दिन में 72 हजार रुपए निकाले गए थे। इसी से उसका खर्च अब तक चल रहा था।
सीरियल देखकर आया आइडिया
अंग्रेजी के 'वाकिंग डेथ' सीरियल से लाश को चबूतरे में छुपाने का उसे आइडिया आया था। पुलिस ने जब उससे पूछा कि उसने चबूतरे के ऊपर फांसी का फंदा क्यों लटका रखा है तो उसने बताया कि वह खुद भी फंदे पर झूलना चाहता था। लेकिन, जान देने की उसकी हिम्मत नहीं हुई। उदयन ने पुलिस को बताया कि शव को बॉक्स में दफनाने का आइडिया उसे अंग्रेजी के सीरियल वॉकिंग डेथ से आया। उसने ऐसी ही मर्डर मिस्ट्री उस सीरियल में देखी थी।
यहां से मिलता था पैसा
10000 दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी के मकान का किराया
5000 भोपाल के साकेत का ग्राउंड फ्लोर किराए पर
7000 रायपुर का किराया मकान
80 हजार रुपए कुल आमदनी
Published on:
11 Sept 2017 12:02 pm
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