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भोपाल। इस घर में छोटे बेटे की शादी की तैयारी चल रही थी। माता-पिता इंतजार कर रहे थे कि बेटा सेहरा बांधे बहू को लेकर घर आएगा, लेकिन यह किसी ने नहीं सोचा था कि थोड़े दिन बाद ही बेटा सेहरे में नहीं, तिरंगे में लिपटा आएगा। हर आंखें नम थीं। अश्वनी कुमार काछी पुलवामा अटैक में शहीद होने वाले 40 जवानों में शामिल थे। जिस गांव में अश्वनी पले-बढ़े वो गांव 'वीरों का गांव' कहलाता है।
14 फरवरी का वो दिन कोई नहीं भूल सकता, जिस दिन जम्मू-कश्मीर में भारत के 40 जवानों की मौत आत्मघाती धमाके में हो गई थी। इसी हमले में मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के एक छोटे से गांव खुड़ावल के अश्वनी कुमार काछी (Constable Ashvni Kumar Kaochi ) भी शहीद हो गए थे। पिता मजदूरी और मां बीड़ी बनाने का काम करती थी। चार भाई बहनों में छोटे बेटे की शादी की बातें चल रही थीं, लेकिन थोड़े ही दिन में बेटा तिरंगे में लिपटा घर आया। अश्वनी जिस गांव से ताल्लुक रखते हैं, वह गांव 'वीरों का गांव' कहलाता है।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए जवान अश्वनी कुमार काछी की खबर जब पिता को मिली तो उन्होंने अपने आप को संभाला। पिता ने कहा कि हम तो अश्वनी की शादी की तैयारियों में लगे थे। पिता सुकरू काछी ने कहा था कि घर में बहू लाने की बातें कर रहे थे, लेकिन बेटा तो अब तिरंगे में लिपट कर आ रहा है।
अटैक से 7 दिन पहले हुई थी बात
पिता सुकरू काछी बताते हैं कि महाराष्ट्र में ट्रेनिंग के बाद कश्मीर में पोस्टिंग मिलीं। 7 फरवरी को अंतिम बार बात हुई। इस दौरान अश्वनी ने कहा था- कश्मीर जा रहा हूं, पता नहीं कब लौटूंगा। अपना ख्याल रखना।
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गुस्से में बोले थे पिता
आतंकियों की कायराना हरकत पर काछी के पिता बेहद गुस्से में थे। अश्विनी के पिता ने कहा था कि अब सरकार को पुलवामा घटना का जवाब देना होगा। उन्होंने कहा था कि खून का बदला अब खून से लिया जाए, क्योंकि मेरे बेटे से पहले देश आता है।
बाद में पिता को मिला सकून
बाद में जब पुलवामा अटैक का बदला एयर स्टाइक के जरिए लिया गया तो सुकरू काछी ने कहा कि इसी दिन का इंतजार था। अब जाक कलेजे को ठंडक मिली। मेरा बेटा तो वापस नही आएगा, लेकिन देश और सेना के जवानों का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।
35 बटालियन में पदस्थ थे अश्वनी
जबलपुर जिले के खुड़ावल सिहोरा गांव के रहने वाले शहीद अश्विनी अपने परिवार में सबसे छोटे थे। अश्विनी के घर में माता-पिता के अलावा पांच भाई-बहन हैं। अश्वनी सीआरपीएफ की 35 बटालियन में पदस्थ थे। 2017 में उनकी पहली पोस्टिंग श्रीनगर में हुई थी।
शहीदों का गांव
मप्र के जिस गांव में सीआरपीएफ का जवान अश्वनी कुमार काछी शहीद हुआ। वह गांव बहुत ही खास है। शहीद अश्विनी जिस गांव खुड़ावल से संबंध रखता है, वह वीरों और शहीदों का गांव कहा जाता है। इस गांव में सबसे ज्यादा युवा सेना के विभिन्न अंगों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
- 30 जून 2005 को बालाघाट में हुए नक्सली हमले में राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय शहीद हुए ।
- 19 जून 2016 को उप वाडा में आतंकियों से लोहा लेते हुए रामेश्वर प्रसाद लोधी शहीद हुए।
- 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 35 वीं बटालियन के कांस्टेबल अश्विनी कुमार काछी वीरगति को प्राप्त हुए।
खुडावल गांव
सीआरपीएफ में 6
भारतीय सेना में 19
एमपी पुलिस में 3
बीएसएफ में 8
पुलिस और सेना से एक-एक सेवानिवृत्त।
पीएम और सीएम ने किया शहीदों को नमन
14 फरवरी को पुलवामा अटैक हमले की बरसी है, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी शहीदों को नमन किया है।
Updated on:
14 Feb 2022 03:13 pm
Published on:
14 Feb 2022 03:08 pm
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