scriptQawwals of Bhopal decorated the gathering with Sufiana Kalams | भोपाल के कव्वालों ने सूफियाना कलामों से सजाई महफिल | Patrika News

भोपाल के कव्वालों ने सूफियाना कलामों से सजाई महफिल

गमक श्रृंखला के अंतर्गत सूफियाना कव्वाली का आयोजन

भोपाल

Published: September 24, 2021 12:07:28 am

भोपाल। मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी की ओर से सूफियाना कव्वाली का आयोजन किया गया। अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने कहा कि कव्वाली एक प्राचीन कला है। अकादमी का हमेशा ये प्रयास रहता है कि इस तरह की प्राचीन सांस्कृतिक कलाओं को बढ़ावा दे। कार्यक्रम में ग्वालियर के कव्वाल सलीम झंकार और उज्जैजन के लोकेश जीवन साबरी ने प्रस्तुतियां दीं। लोकेश ने फूल हर इक जुदा है चमन एक है... की प्रस्तुति दी। इसके बाद तुम हो सबसे जुदा गरीब नवाज... और दिखा कर झलक अब न कर मुझसे पर्दा... कलाम पेश की अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। इसके बाद सलीम ने छाप तिलक सब छीनी रे मो से नैना मिलाईके... पेशकर प्रस्तुति का आगाज किया। इसके बाद दिल वो आबाद नहीं जिसमें तेरी याद नहीं..., इस तरफ भी करम ऐ रश्के मसीहा करना... जैसे कलाम पेश किए।

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आधुनिक विषयों के अन्तर्सम्बन्धों पर भी शोध होना चाहिए

भोपाल। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के आधुनिक विषय विभाग द्वारा 'वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संत साहित्य की उपादेयता' विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रो नन्दकिशोर पाण्डेय, अधिष्ठाता, कला संकाय तथा निदेशक, शोध राजस्थान विवि जयपुर थे। वेविनार में बिहार, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि के विद्वानों व शोधकर्ताओं ने अपने-अपने शोधपत्रों का वाचन किया। कुल 170 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। मुख्य अतिथि प्रो पाण्डेय ने वर्तमान समय में साहित्य को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की। उनका मानना था कि सभी बच्चों को पुस्तकों का सानिध्य मिलना ही चाहिए। सारस्वत अतिथि प्रो शिशिर कुमार पाण्डेय ने कहा कि आधुनिक विषयों के अन्तर्सम्बन्धों पर भी शोध होना चाहिए। हम किसी भी एक काल को उसके आर्थिक, राजनीतिक व सामाजिक सभी बिन्दुओं के आधार पर परखते हैं। यह सभी पक्ष एक-दूसरे को किस प्रकार प्रभावित करते हैं यह भी महत्वपूर्ण है। सत्राध्यक्ष प्रो जे भानुमूर्ति ने कहा कि महामारी के काल में सभी ने किसी ना किसी प्रकार की परेशानी का अनुभव किया है। यह पता चला है कि समस्याएं किस किस प्रकार से मानव जीवन को प्रभावित करती हैं। शोधकर्ताओं को चाहिए कि वे विभिन्न विषयों पर आधारित ऐसे शोध करें जिनमें समस्याओं का हल मिलता हो। इस काल को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए इस चुनौती पर विजय प्राप्त करना ही लक्ष्य होना चाहिए।

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