
11 अगस्त 2020 को दिल का दौरा पड़ने से राहत इंदौरी का निधन गया था।
Rahat Indori Shayari in Hindi: जुदा अंदाज और ख्याली उडा़न के साथ ही रियल जिंदगी को अपनी शायरी का हिस्सा बनाने वाली अलहदा शख्सियत राहत इंदौरी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शायरी और जिंदगी के किस्से सैकड़ों सालों तक लोगों के जहन में ताजा रहेंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं 11 अगस्त 2020 को दुनिया को अलविदा कहने वाले राहत इंदौरी का पुराना नाम क्या था? शायर बनने से पहले वो सड़कों पर साइन बोर्ड डिजाइन किया करते थे? राहत इंदौरी के नाम से कैसे हो गए मशहूर, किसने दिया था उन्हें ये नया नाम? ऐसे ही अनकहे अनसुने किस्सों को जानने के लिए जरूर पढ़ें मशहूर शायर, गीतकार राहत इंदौरी के बारे में ये इंट्रेस्टिंग फेक्ट्स…
राहत कुरैशी के राहत इंदौरी बनने का सफर बेहद दिलचस्प रहा। अपने स्कूली दिनों में सड़कों पर साइन बोर्ड लिखने और डिजाइन का काम करते थे। अपनी खूबसूरत लिखावट से राहत लोगों को दिल जीत लेते थे। लेकिन उनकी किस्मत में तो एक मशहूर शायर बनना लिखा था।
दरअसल उर्दू शायरी पढ़ने के शौकीन राहत अपने शहर इंदौर और उसके आसपास होने वाले मुशायरों में जरूर शामिल होते थे। एक बार एक मुशायरे में उनकी मुलाकात मशहूर शायर जां निसार अख्तर से हो गई। तब राहत इंदौरी ने उनके सामने अपनी दिली इच्छा जाहिर की कि, वे भी शायर बनना चाहते हैं।
राहत की बात सुनकर जां निसार अख्तर ने उन्हें कहा कि सबसे पहले 5 हजार शेर मुंह जुबानी याद करो। देखना तुम शायरी अपने आप करने लगोगे।
लेकिन तब राहत इंदौरी ने जां निसार अख्तर को ये जवाब देकर हैरान कर दिया था कि 5 हजार शेर तो उन्हें पहले से ही याद हैं। इस पर अख्तर साहब ने कहा कि फिर तो तुम पहले से ही शायर हो। मुशायरे में स्टेज संभालना शुरू करो।
यही वो दिन था जो मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले राहत कुरैशी को राहत इंदौरी की राह पर ले चला। उसके बाद कोई वक्त ऐसा ना हुआ कि जब राहत इंदौरी शहर में या शहर के आसपास होने वाले किसी मुशायरे में ना गए हों। यहां तक कि हर मुशायरे में राहत ने अपनी शायरी से दर्शकों का दिल ना जीता हो।
तब एक दिन ऐसा भी आया जब उन्होंने अपने नाम के आगे तखल्लुस लिखते हुए अपने शहर इंदौर का नाम जोड़ लिया। और इस नाम ने धीरे-धीरे राहत कुरैशी को राहत इंदौरी के रूप में मशहूर शायर बना दिया।
शायरी कहने के अपने जुदा अंदाज के लिए जाने-पहचाने जाने वाले राहत इंदौरी की शायरी में ऊंचे ख्यालों के रंग तो थे ही, लेकिन वो अपने मन की बात भी शायराना अंदाज में ऐसे कहते थे कि वो बात लोगों के दिल को छू जाती थी। रियल जिंदगी की कहानियां उनकी शायरी में ऐसी जान डालतीं कि उन्हें अनसुना या नजरअंदाज करना ही नामुमकिन होता था। शेर-ओ-शायरी का ये जुदा अंदाज उन्हें इतना मशहुर कर गया कि बड़े-बूढ़े तो क्या युवा दिलों की धड़कन बन गए। उनके कुछ शेर तो आज भी बच्चे-बच्चे की जुबान से सुने जा सकते हैं।
राहत इंदौरी के जुदा और खूबसूरत अंदाज के साथ ही आम जिंदगी से जुड़ी कहानियां शेर-ओ-शायरी ने उन्हें अपने समकालीन शायरों और कवियों में सबसे आगे रखा।
राहत इंदौरी अक्सर मुशायरों में ये दर्द जरूर बयां करते थे कि कुछ लोगों ने उन्हें जिहादी तक कहा है। और इस आरोप ने उन्हें रात भर सोने नहीं दिया। स्थिति ये थी कि जैसे ही सुबह की अजान हुई तो उन्होंने खुद से ही कहा कि 'राहत तू कुछ भी हो सकता है लेकिन एक जिहादी नहीं हो सकता।' अपने नाम के साथ जिहादी जुड़ता सुन वो इतने बेचैन हो गए थे कि इस पर उन्होंने एक शेर तक लिखा…
'मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना
लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना।'
सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है
कुछ लोगों से सुना है कि शायरी वही है जो इश्क और मोहब्बत की बात करती है, लेकिन राहत इंदौरी की शायरी में इश्क और मोहब्बत के अदब के साथ ही जुल्म से नफरत की झलक भी मिलती है। वे ऐसे शायर माने जाते हैं जो जालिम की आंख में आंख डालकर बात कर लेता था।
बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं।
अगर खिलाफ हैं तो होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुंआ है, कोई आसमान थोड़ी है
लगेगी आग तो आएंगे घर के ही जद में
यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है
हमारे मुंह से जो निकले वही सदाकत है
हमारे मुंह में तुम्हारी जुबान थोड़ी है।
और मैं जानता हूं कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पर जान थोड़ी है।
हमने खुद अपनी रहनुमाई की
और शोहरत हुई खुदाई की
मैंने दुनिया से और दुनिया ने मुझसे
सैकड़ों बार बेवफाई की।
रोज तारों को नुमाइश में खलल पड़ता है
चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है
राहत इंदौरी के कई शेर आपने पढ़े और सुने होंगे, लेकिन इस शेर को जरा गौर से पढ़िए, क्योंकि ये उनकी जिंदगी का आखिरी शेर साबित हुआ...
ऐ जमीन एक रोज तेरी खाक में खो जाएंगे, सो जाएंगे
मर के भी रिश्ता नहीं टूटेगा हिंदुस्तान से, ईमान से
....और ये शेर उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी हकीकत थी शायद वो इसे जानते थे कि...उनका नाम हिंदुस्तान यानी देश के मशहूर शायरों में शामिल है, जिनमें उनका नाम सबसे पहली पंक्ति के शायरों में आता है। उर्दू शायरी का जब भी ना लिया जाएगा, उनका नाम सबसे पहले आएगा।
Updated on:
10 Aug 2024 01:13 pm
Published on:
10 Aug 2024 01:05 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
