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सगे भाई नहीं करते याद, पर गैरों का मिला साथ

अपनों की बेरुखी से बेघर हुए बुजुर्ग धूमधाम से मनाते हैं रक्षाबंधन का पर्व

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rakhi

सगे भाई नहीं करते याद, पर गैरों का मिला साथ

भोपाल. रेशम की डोर से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत बनाने के पर्व रक्षाबंधन का इंतजार सभी को रहता है। परिजनों या कहें कि अपनों की मौजूदगी में बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। आज के दौर में कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्हें अपनों का साथ नसीब नहीं होता है।

इसे बिडंबना ही कहेंगे कि बहनों की आंखे भाइयों के आने का इंतजार करती हैं, पर बरसों बाद भी भाइयों ने बहनों की सुध नहीं ली है। भले ही इन बुजुर्गों को सगे भाइयों का साथ न मिला हो, पर उन्हीं की तरह अपनों की बेरुखी के शिकार भाइयों की कलाई सूनी नहीं रहती है। तमाम दु:खों को दरकिनार कर वृद्धाश्रम की महिलाएं वहां रहने वाले भाइयों को राखी बांधती हैं।

वृद्धाश्रम के बुजुर्ग ही हैं हमारे भाई
शाहजहांनाबाद स्थित आसरा वृद्धाश्रम में रहने वाली ७५ वर्षीय चतुरबाई के सगे भाई ने पचास साल से उनकी कोई खबर नहीं ली है। लिहाजा उन्होंने भी उसका इंतजार करना छोड़ दिया है। वे कहते हैं कि आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग ही मेरे भाई हैं और इन्हीं को राखी बांधकर सगे भाई की कमी पूरी कर लेती हूं।

चतुरबाई की तरह कई बुजुर्ग महिलाएं ऐसी हैं जिनकी याददाश्त कमजोर हो गई है और उन्हें ये भी याद नहीं है कि उनका कोई सगा भाई है या नहीं। आसरा की प्रभारी राधा चौबे के मुताबिक यहां ९० बुजुर्ग महिलाएं एवं पुरुष हैं। कुछ महिलाओं को उनके परिजन त्योहार पर घर ले जाते हैं, पर कई ऐसी हैं जिनके परिजन नहीं आते। यहां समाजसेवी संस्थाओं के लोग आते हैं जो बुजुर्गों के साथ मिलकर रक्षाबंधन का पर्व मनाते हैं।

सगों से कहीं ज्यादा बढ़कर हैं ये भाई
कोलार स्थित अपना घर वृद्धाश्रम मेें कई बुजुर्ग महिलाएं ऐसी हैं जिनके भाई उनकी सुध तक नहीं लेते हैं, पर इस आश्रम में गैरों ने जरूर भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते की अहमियत समझी है। अपना घर संचालिका माधुरी श्रिमा ने बताया कि यहां रहने वाली बुजुर्ग साधना पाठक दस साल से रत्नाकर फड़के को दस साल से राखी बांध रही हैं।

बुजुर्ग अंजली श्रीवास्तव आठ साल से प्रेमनारायण सोनी एवं रुकमणी अग्रवाल भी आठ साल से कृष्णमुरारी को राखी बांध रही हैं। हालांकि इस साल बुजुर्ग कृष्णमुरारी का देहांत हो गया, लिहाजा उन्होंने भाई की फोटो को ही राखी बांधने का फैसला किया है। माधुरी मिश्रा ने बताया कि भाई-बहन के बीच रिश्ता ही ऐसा है कि ये सभी एक-दूसरे का खास ख्याल रखते हैं।

राजभवन भवन में मनाएंगे राखी का पर्व
हर साल की तरह इस साल भी एसओएस बाल ग्राम खजूरी में रक्षा बंधन का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। रक्षा बंधन के दिन बाल ग्राम में न केवल तरह-तरह के व्यंजन बनेंगे, बल्कि बहनें भाईयों की खातिरदारी के लिए विशेष इंतजाम भी करेंगी। इसके साथ ही राखी के दिन बाल ग्राम के करीब १०० बच्चे राज्यपाल भवन पहुंचकर राज्यपाल को राखी भेंट करेंगे।

एसओएस भारतीय बाल ग्राम की प्रमुख अनुजा बंसल ने बताया कि राखि के दिन बाल ग्राम से निकले १८ साल से अधिक उम्र के बच्चे भी राखी का त्योहार मनाने के लिए दूसरे शहरों से यहां आएंगे। बाल ग्राम में रक्षा बंधन का त्योहार उत्साह के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस समय बाल ग्राम में करीब २८० बच्चे हैं, जिसमें से करीब १६० बच्चे १८ साल से कम उम्र वाले हैं।